हाथ में जामुन की लकड़ी,जमीन से फूटा पानी,पूर्व मंत्री बृजेंद्र सिंह यादव की पारंपरिक विधि बनी चर्चा का विषय।

 हाथ में जामुन की लकड़ी,जमीन से फूटा पानी,पूर्व मंत्री बृजेंद्र सिंह यादव की पारंपरिक विधि बनी चर्चा का विषय।

अशोकनगर के भरियाखेड़ी स्थित खेत में जामुन की लकड़ी से चिन्हित स्थान पर बोरिंग के दौरान 50 फीट पर मिला पानी,सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो।

अशोकनगर,ग्रामीण खबर MP

प्रदेश में भीषण गर्मी और लगातार घटते भूजल स्तर के बीच अशोकनगर जिले से सामने आई एक अनोखी घटना इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। मुंगावली विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक एवं प्रदेश के पूर्व लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) राज्यमंत्री बृजेंद्र सिंह यादव द्वारा अपने खेत में पारंपरिक तरीके से पानी खोजने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में विधायक हाथ में जामुन की लकड़ी लेकर खेत में घूमते दिखाई दे रहे हैं और बाद में जिस स्थान को उन्होंने पानी की संभावित मौजूदगी वाला स्थान बताया, वहां बोरिंग के दौरान पानी निकल आने की बात कही जा रही है।

जानकारी के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम अशोकनगर जिले के भरियाखेड़ी ग्राम स्थित विधायक के निजी कृषि फार्म का है। गुरुवार को बृजेंद्र सिंह यादव अपने खेत पर कृषि गतिविधियों का निरीक्षण करने पहुंचे थे। क्षेत्र में बढ़ती गर्मी और सिंचाई के लिए जल की आवश्यकता को देखते हुए खेत में एक नए बोरवेल की योजना बनाई गई थी। बोरवेल के लिए उपयुक्त स्थान का चयन करने के दौरान विधायक ने आधुनिक तकनीकी सर्वेक्षण की बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से प्रचलित एक पारंपरिक विधि का सहारा लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विधायक ने जामुन की लकड़ी की दो टहनियां हाथ में लेकर खेत के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। ग्रामीणों का दावा है कि एक विशेष स्थान पर पहुंचने के बाद लकड़ियों में हलचल दिखाई दी, जिसके आधार पर विधायक ने वहां पानी होने की संभावना व्यक्त की। इसके बाद उस स्थान को चिन्हित कर लिया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड कर लिया, जिसका वीडियो बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर वायरल हो गया।

अगले दिन सुबह चिन्हित स्थान पर बोरिंग मशीन लगाकर खुदाई कार्य प्रारंभ किया गया। जैसे-जैसे मशीन जमीन की गहराई में पहुंचती गई, वहां मौजूद लोगों की उत्सुकता भी बढ़ती चली गई। बताया जाता है कि लगभग 50 फीट की गहराई पर पहुंचते ही पानी का स्रोत मिल गया और पानी का दबाव सतह तक दिखाई देने लगा। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद ग्रामीणों में उत्साह का माहौल बन गया। बाद में विशेषज्ञों की सलाह पर बोरिंग को लगभग 200 से 250 फीट की गहराई तक बढ़ाया गया ताकि जलस्रोत लंबे समय तक सुरक्षित और उपयोगी बना रहे।

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में इस विषय को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। गांवों में रहने वाले कई बुजुर्गों का कहना है कि पुराने समय में आधुनिक तकनीकों के अभाव में इसी प्रकार के पारंपरिक तरीकों का उपयोग पानी खोजने के लिए किया जाता था। उनका मानना है कि अनुभवी लोग मिट्टी की प्रकृति, वनस्पति, भूमि की संरचना और स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन कर संभावित जल स्रोतों का अनुमान लगाने में सक्षम होते थे।

हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले विशेषज्ञ इस प्रकार की विधियों को प्रमाणित तकनीक नहीं मानते। भूजल विशेषज्ञों का कहना है कि किसी स्थान पर पानी मिलने का संबंध वहां की भूगर्भीय संरचना, जलभृतों की स्थिति और प्राकृतिक परिस्थितियों से होता है। वर्तमान समय में जल स्रोतों की खोज के लिए हाइड्रोजियोलॉजिकल सर्वे, इलेक्ट्रिकल रेसिस्टिविटी सर्वे तथा अन्य वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग अधिक विश्वसनीय माना जाता है। इसके बावजूद भरियाखेड़ी की इस घटना ने लोगों के बीच पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के संबंध में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय बृजेंद्र सिंह यादव लंबे समय से अपने सरल और जमीनी स्वभाव के लिए पहचाने जाते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाने वाले यादव अक्सर किसानों के बीच देखे जाते हैं। ट्रैक्टर चलाने से लेकर खेतों में कृषि कार्यों में भागीदारी तक, उनके कई वीडियो पहले भी चर्चा में रह चुके हैं। यही कारण है कि पानी खोजने के इस देसी तरीके ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग हैं। कुछ लोग इसे ग्रामीण अनुभव और पारंपरिक ज्ञान की सफलता बता रहे हैं तो कुछ इसे महज संयोग मान रहे हैं। हालांकि अधिकांश लोग इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि जिस स्थान को पारंपरिक विधि से चिन्हित किया गया, वहीं कम गहराई में पानी मिल गया। इस कारण यह घटना इंटरनेट पर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि खेतों में पर्याप्त जल उपलब्ध हो जाए तो कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। ऐसे में पानी मिलने की खबर ने आसपास के किसानों में भी उत्साह पैदा किया है। कई किसान इस घटना को ग्रामीण अनुभव और प्रकृति की समझ से जोड़कर देख रहे हैं।

फिलहाल भरियाखेड़ी गांव में हुई यह घटना न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पूरे प्रदेश के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई है। गांव की चौपालों से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों तक लोग इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। पारंपरिक ज्ञान, ग्रामीण अनुभव और आधुनिक विज्ञान के बीच संतुलन को लेकर चल रही बहस के बीच बृजेंद्र सिंह यादव का यह वीडियो लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में भी इसकी चर्चा जारी रहने की संभावना है।



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