कटनी नदी के सीमांकन की तैयारी तेज:कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर दो विशेष राजस्व दल गठित।
नगर निगम के सहयोग से होगा नदी की वास्तविक सीमाओं का निर्धारण,अवैध अतिक्रमण मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
शहर की पहचान और जीवनरेखा मानी जाने वाली कटनी नदी को संरक्षित करने तथा नदी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर कटनी नदी के सीमांकन के लिए दो विशेष राजस्व दलों का गठन किया गया है। प्रशासन की इस पहल को नदी संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और भविष्य की शहरी योजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नगर निगम के सहयोग से गठित ये विशेष दल मौके पर पहुंचकर नदी की वास्तविक सीमाओं का निर्धारण करेंगे तथा आवश्यक स्थानों पर सीमा चिन्ह स्थापित कर सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करेंगे।
प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार सीमांकन कार्य को पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के उद्देश्य से दो अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। दल क्रमांक-1 की जिम्मेदारी राजस्व निरीक्षक विभा गर्ग को दी गई है। उनके साथ पटवारी अमित कनकने, धर्मेन्द्र ताम्रकार, दादूराम पटेल, सुभाष गर्ग एवं राजेश दुबे को शामिल किया गया है। यह दल संबंधित क्षेत्र में मौके पर पहुंचकर नदी के सीमांकन का कार्य करेगा और सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार करेगा।
वहीं दल क्रमांक-2 का प्रभारी राजस्व निरीक्षक ब्रजबिहारी दुबे को बनाया गया है। इस दल में पटवारी तुलाराम वर्मा, विनीत सिंह बघेल, संदीप गर्ग, नितेश पाण्डेय एवं विवेक बहरे को शामिल किया गया है। यह टीम भी अपने निर्धारित क्षेत्र में राजस्व अभिलेखों और स्थल परीक्षण के आधार पर नदी की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कर सीमांकन संबंधी प्रक्रिया पूरी करेगी।
प्रशासन द्वारा दोनों दलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सीमांकन की समस्त कार्रवाई पूरी कर निर्धारित प्रारूप में सीमांकन प्रतिवेदन, पंचनामा, फील्डबुक तथा नक्शा ट्रेस तैयार कर तहसीलदार कटनी नगर के माध्यम से एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत किया जाए। अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि सीमांकन कार्य पूरी निष्पक्षता और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर किया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
जानकारी के अनुसार लंबे समय से कटनी नदी के आसपास अतिक्रमण को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई स्थानों पर नदी क्षेत्र में अवैध निर्माण और कब्जों की चर्चा भी होती रही है, जिसके कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित होने की आशंका जताई जाती रही है। बरसात के दौरान जल निकासी में बाधा और जलभराव जैसी समस्याओं के पीछे भी अतिक्रमण को एक बड़ी वजह माना जाता रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा सीमांकन की कार्रवाई शुरू किया जाना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सीमांकन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि नदी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी तत्काल प्रारंभ की जाएगी। प्रशासन की इस सख्त चेतावनी के बाद नदी किनारे अतिक्रमण कर बैठे लोगों में हलचल देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नदी का अस्तित्व केवल जल प्रवाह तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसका प्राकृतिक क्षेत्र, तट और जलग्रहण क्षेत्र भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यदि नदी की भूमि पर लगातार अतिक्रमण होता रहे तो भविष्य में बाढ़, जलभराव और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। कटनी नदी के सीमांकन की कार्रवाई को इसी दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी जिला प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नदी क्षेत्र को सुरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में शहर को गंभीर पर्यावरणीय और जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। कई नागरिकों ने मांग की है कि सीमांकन के बाद नदी क्षेत्र में हरित पट्टी विकसित की जाए तथा नियमित निगरानी व्यवस्था भी बनाई जाए ताकि दोबारा अतिक्रमण न हो सके।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि सीमांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद नदी संरक्षण से संबंधित योजनाओं को भी गति मिल सकेगी। नदी किनारे सफाई व्यवस्था, जल संरक्षण और सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों के लिए भी स्पष्ट सीमांकन आवश्यक माना जाता है। प्रशासन का मानना है कि इस कार्रवाई से भविष्य में शहर के विकास कार्यों और मास्टर प्लान को भी बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।
राजस्व विभाग और नगर निगम के संयुक्त प्रयास से शुरू हुई यह कार्रवाई अब शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। आम लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस अभियान को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि वास्तविक रूप से अतिक्रमण हटाकर नदी के अस्तित्व को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा। कटनी नदी के सीमांकन की यह प्रक्रिया आने वाले समय में शहर के पर्यावरण, जल संरक्षण और सुव्यवस्थित विकास के लिए एक महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकती है।

