सगमा पुल निर्माण में विभागीय लापरवाही का आरोप,11.25 करोड़ की स्वीकृति के दो वर्ष बाद भी शुरू नहीं हुआ कार्य।

 सगमा पुल निर्माण में विभागीय लापरवाही का आरोप,11.25 करोड़ की स्वीकृति के दो वर्ष बाद भी शुरू नहीं हुआ कार्य।

विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह के प्रयासों से मिली थी प्रशासनिक मंजूरी,मण्डल अध्यक्ष मनीष सिंह बागरी लगातार उठा रहे मुद्दा,दर्जनभर गांवों के हजारों लोग आवागमन संकट से जूझने को मजबूर।

ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।

कटनी जिले के ढीमरखेड़ा जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सगमा में स्थित पुल का निर्माण कार्य लंबे समय से क्षेत्रीय जनता के लिए एक गंभीर समस्या बना हुआ है। लगभग तीन वर्ष पूर्व क्षतिग्रस्त होकर टूट चुके इस पुल के पुनर्निर्माण के लिए क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह द्वारा किए गए प्रयासों के फलस्वरूप शासन स्तर से 11 करोड़ 25 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन स्वीकृति मिलने के बाद भी आज तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। इससे क्षेत्र के दर्जनभर गांवों के हजारों ग्रामीणों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने इस मामले में लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए शीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ कराने की मांग की है।

सिलौड़ी से ढीमरखेड़ा को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग पर स्थित सगमा पुल वर्षों से क्षेत्र की जीवनरेखा के रूप में कार्य करता रहा है। इस पुल के माध्यम से सगमा, सिलौड़ी, गोपालपुर, लालपुर, अतरसूमा सहित आसपास के अनेक गांवों के लोग आवागमन करते रहे हैं। पुल टूट जाने के बाद से क्षेत्र की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। ग्रामीणों को अपने दैनिक कार्यों के लिए कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की हानि हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुल टूटने के बाद सबसे पहले इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का कार्य भाजपा सिलौड़ी मण्डल अध्यक्ष मनीष सिंह बागरी ने किया था। उन्होंने लगातार क्षेत्रीय जनता की समस्याओं को जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष रखा तथा पुल निर्माण की मांग को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए। मण्डल अध्यक्ष मनीष सिंह बागरी की पहल और जनहित के प्रति उनकी सक्रियता के कारण यह मामला शासन तक पहुंच सका।

स्थानीय नागरिकों की मांग और मण्डल अध्यक्ष मनीष सिंह बागरी के अथक प्रयासों को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने भी इस विषय को प्रमुखता से उठाया। विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने 8 जुलाई 2024 को लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह को पत्र लिखकर सगमा पुल की जर्जर और खतरनाक स्थिति से अवगत कराया था। पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण हजारों ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा क्षेत्र के विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विधायक द्वारा किए गए इस प्रयास के बाद शासन स्तर से पुल के पुनर्निर्माण के लिए 11.25 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर दी गई।

राशि स्वीकृत होने की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि शीघ्र ही पुल का निर्माण कार्य प्रारंभ होगा और वर्षों से चली आ रही समस्या समाप्त हो जाएगी। लेकिन समय बीतता गया और निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो सका। आज स्थिति यह है कि स्वीकृति मिलने के लंबे समय बाद भी पुल निर्माण केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रहा है।

क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग की उदासीनता और धीमी कार्यप्रणाली के कारण यह महत्वपूर्ण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। लोगों का कहना है कि जब शासन द्वारा राशि स्वीकृत कर दी गई है और जनप्रतिनिधियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए आवश्यक प्रयास कर दिए हैं, तब विभागीय स्तर पर देरी का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसके बावजूद निर्माण कार्य प्रारंभ न होना कई सवाल खड़े करता है।

पुल के अभाव में सबसे अधिक परेशानी स्कूली छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है। प्रतिदिन सैकड़ों बच्चे विद्यालय पहुंचने के लिए जोखिम भरे रास्तों का सहारा लेने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब छोटे-छोटे नाले और जलभराव वाले क्षेत्र आवागमन को लगभग असंभव बना देते हैं। कई बार बच्चों को विद्यालय पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है।

किसानों को भी इस समस्या का गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और परिवहन व्यय लग रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण में हो रही देरी का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और किसानों की आय पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों के लिए भी यह समस्या किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में कठिनाई होती है। कई बार एम्बुलेंस को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ता है, जिससे मरीजों के जीवन पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि भविष्य में कोई गंभीर दुर्घटना या अप्रिय घटना घटित होती है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

ग्रामीणों ने बताया कि विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह समय-समय पर क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को शासन के समक्ष रखते रहे हैं और सगमा पुल का मुद्दा भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। वहीं मण्डल अध्यक्ष मनीष सिंह बागरी भी लगातार ग्रामीणों के साथ खड़े होकर इस मांग को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई का अभाव जनता की नाराजगी का कारण बनता जा रहा है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि विकास कार्यों की घोषणा और राशि स्वीकृति तभी सार्थक मानी जाएगी जब उनका लाभ आम जनता तक पहुंचे। यदि करोड़ों रुपये की स्वीकृति के बावजूद निर्माण कार्य वर्षों तक शुरू नहीं हो पाता है तो इससे सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। लोगों का मानना है कि सगमा पुल का निर्माण केवल एक आधारभूत संरचना परियोजना नहीं, बल्कि हजारों लोगों की दैनिक आवश्यकताओं, बच्चों के भविष्य, किसानों की आजीविका और क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़ा विषय है।

ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि सगमा पुल निर्माण कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा तत्काल निर्माण प्रक्रिया प्रारंभ कराई जाए। साथ ही निर्माण कार्य में हो रही देरी के कारणों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई भी की जाए। क्षेत्र के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं कराया गया तो सगमा, सिलौड़ी, गोपालपुर, लालपुर, अतरसूमा सहित आसपास के सभी गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर व्यापक जनआंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होंगे।

अब क्षेत्र की जनता की निगाहें शासन और लोक निर्माण विभाग पर टिकी हुई हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि जब पुल निर्माण के लिए 11.25 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हो चुकी है, तब आखिर निर्माण कार्य शुरू होने में इतनी देरी क्यों हो रही है। जनता को उम्मीद है कि जिम्मेदार विभाग इस महत्वपूर्ण जनहित के विषय पर गंभीरता दिखाएगा और जल्द से जल्द सगमा पुल निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा।



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