बड़वारा में अवैध क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा छापा,50 प्रकार की दवाइयां जब्त,क्लीनिक सील।

 बड़वारा में अवैध क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा छापा,50 प्रकार की दवाइयां जब्त,क्लीनिक सील।

विलायतकला में बिना पंजीयन संचालित हो रहा था “बेस्ट केयर क्लीनिक”,एलोपैथी इलाज और मरीज भर्ती करने की मिली पुष्टि।

बड़वारा,ग्रामीण खबर MP।

जिले में फर्जी चिकित्सकों, झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध रूप से संचालित स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विकासखंड बड़वारा के ग्राम विलायतकला में संचालित “बेस्ट केयर क्लीनिक” पर जिला स्तरीय टीम ने बड़ी छापामार कार्रवाई करते हुए क्लीनिक को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां, उपचार संबंधी सामग्री तथा कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों और बिना अनुमति इलाज कर रहे लोगों के खिलाफ लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। शिकायतों के आधार पर जिला स्तरीय टीम गठित कर ग्राम विलायतकला स्थित “बेस्ट केयर क्लीनिक” में औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि क्लीनिक का संचालन जाकिर हुसैन नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था, जिसने स्वयं को बीएएमएस डिग्रीधारी बताया, लेकिन जांच टीम के समक्ष अपने शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित व्यक्ति द्वारा मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में अनिवार्य पंजीयन नहीं कराया गया था। इसके अलावा क्लीनिक संचालन के लिए आवश्यक वैध अनुमति एवं लाइसेंस भी उपलब्ध नहीं थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब परिसर का निरीक्षण किया तो वहां पांच बिस्तर व्यवस्थित रूप से लगाए गए मिले, जिन पर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। टीम को मौके पर बड़ी मात्रा में एलोपैथी दवाइयां, इंजेक्शन, उपचार सामग्री तथा अन्य चिकित्सकीय उपकरण भी मिले।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बीएएमएस चिकित्सकों को आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार करने की अनुमति होती है, लेकिन यहां एलोपैथिक दवाइयों का उपयोग कर मरीजों का इलाज किया जा रहा था। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ गंभीर खिलवाड़ भी माना जाता है। बिना वैध अनुमति मरीजों को भर्ती कर इलाज करना और एलोपैथिक उपचार देना स्वास्थ्य संबंधी कानूनों का सीधा उल्लंघन पाया गया।

कार्रवाई में शामिल जिला चिकित्सालय के सर्जिकल स्पेशलिस्ट डॉ. रीतेश दुबे एवं प्रभारी नर्सिंग होम नितिन तपा ने पूरे क्लीनिक का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने लगभग 50 प्रकार की दवाइयां जब्त कीं। इनमें कई एलोपैथिक दवाइयां और उपचार में उपयोग होने वाली सामग्री शामिल थी। जांच टीम ने मौके पर ही पंचनामा तैयार कर कार्रवाई की प्रक्रिया पूर्ण की।

गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए मध्यप्रदेश उपचारगृह तथा रुजोपचार संबंध स्थापना अधिनियम 1973 की धारा 3 एवं 4 के तहत कार्रवाई करते हुए क्लीनिक को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी कार्रवाई को विधिवत अंजाम दिया गया।

कार्रवाई के दौरान तहसीलदार बड़वारा हर्षवर्धन रामटेके, थाना प्रभारी के.के. पटेल, क्षेत्रीय पटवारी तथा पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त उपस्थिति में कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराई गई। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित अन्य क्लीनिक संचालकों में भी हड़कंप की स्थिति देखी गई।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर बिना अनुमति स्वास्थ्य संस्थान संचालित होने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। कई झोलाछाप डॉक्टर बिना वैध डिग्री और पंजीयन के मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना रहता है। ऐसे मामलों में गलत इलाज के कारण मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि आमजन की सुरक्षा के लिए इस प्रकार की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह ठाकुर ने कहा कि जिले में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों, फर्जी चिकित्सकों और बिना अनुमति स्वास्थ्य सेवाएं देने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि इलाज के लिए केवल पंजीकृत एवं अधिकृत चिकित्सकों के पास ही जाएं तथा किसी भी संदिग्ध क्लीनिक या झोलाछाप डॉक्टर की जानकारी तत्काल स्वास्थ्य विभाग को दें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।

स्वास्थ्य विभाग की इस सख्त कार्रवाई को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही या अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।



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