बड़वारा में ओवरलोडिंग और नो-एंट्री उल्लंघन के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता,प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम।

 बड़वारा में ओवरलोडिंग और नो-एंट्री उल्लंघन के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता,प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम।

जय सूर्यवंशी के नेतृत्व में तहसीलदार और थाना प्रभारी को सौंपा ज्ञापन,कार्रवाई नहीं होने पर चक्काजाम और उग्र आंदोलन की चेतावनी।

बड़वारा,ग्रामीण खबर MP।

बड़वारा बस्ती में लंबे समय से जारी ओवरलोड वाहनों की आवाजाही, नो-एंट्री नियमों के लगातार हो रहे उल्लंघन और तेज रफ्तार भारी वाहनों के कारण आम नागरिकों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। लगातार बढ़ते हादसों के खतरे और प्रशासनिक लापरवाही से नाराज स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को एकजुट होकर तहसीलदार बड़वारा एवं थाना प्रभारी बड़वारा को संयुक्त ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की मांग की।

बड़वारा बस्ती के लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा लागू की गई नो-एंट्री व्यवस्था केवल कागजों में सीमित रह गई है। वास्तविक स्थिति यह है कि दिन-रात भारी डंपर, ट्रक और ट्राले बस्ती के भीतर से बेधड़क गुजर रहे हैं। इन वाहनों की तेज रफ्तार के कारण क्षेत्र में हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी केवल आश्वासन देते रहे, लेकिन धरातल पर अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

ज्ञापन सौंपने के दौरान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय सूर्यवंशी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बड़वारा क्षेत्र में पहले भी कई दर्दनाक सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई परिवारों ने अपने परिजनों को खोया है। इसके बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता समझ से परे है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो आने वाले समय में कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे प्रशासन की होगी।

जय सूर्यवंशी ने कहा कि स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले आम नागरिक सबसे ज्यादा खतरे में हैं। बस्ती की संकरी सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ते ओवरलोड वाहन लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ वाहन चालक नो-एंट्री नियमों को खुलेआम चुनौती देते हुए प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।

ग्रामीणों ने कहा कि सुबह और शाम के समय स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है, जब स्कूल जाने वाले बच्चे और बाजार आने-जाने वाले लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर मौजूद रहते हैं। ऐसे समय में भारी वाहनों की आवाजाही से कई बार दुर्घटना जैसी स्थिति निर्मित हो चुकी है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि कई वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक माल भरकर तेज गति से निकलते हैं, जिससे सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं और दुर्घटना की संभावना लगातार बढ़ती जा रही है।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने बड़वारा बस्ती के प्रवेश और निकास मार्गों पर बड़े और स्पष्ट नो-एंट्री बोर्ड लगाए जाने की मांग की, ताकि वाहन चालकों को नियमों की स्पष्ट जानकारी मिल सके। इसके अलावा प्रमुख चौराहों एवं संवेदनशील स्थानों पर स्थायी पुलिस बल की तैनाती की मांग भी की गई, जिससे नियमों का सख्ती से पालन कराया जा सके।

ग्रामीणों ने ओवरलोड वाहनों के खिलाफ नियमित जांच अभियान चलाने, चालानी कार्रवाई करने और बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन सख्त रवैया नहीं अपनाएगा, तब तक नियमों का उल्लंघन जारी रहेगा और आम लोगों की जान जोखिम में बनी रहेगी।

ज्ञापन सौंपने पहुंचे नागरिकों ने प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा के भीतर ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो बड़वारा की जनता उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी। ग्रामीणों ने कहा कि आंदोलन के तहत धरना-प्रदर्शन, चक्काजाम और जनआंदोलन जैसे कदम उठाए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

इस दौरान क्षेत्र के नागरिकों में भारी आक्रोश देखने को मिला। बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों और युवाओं ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जनता की सुरक्षा से जुड़ा यह मुद्दा अब किसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। लोगों ने एक स्वर में कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने के दौरान जय सूर्यवंशी, नागेंद्र अहिरवार, रामखिलावन, अनुज, धनेंद्र सहित बड़ी संख्या में स्थानीय युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़वारा बस्ती के नागरिक उपस्थित रहे। पूरे घटनाक्रम के दौरान क्षेत्र में लोगों का समर्थन देखने को मिला और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग लगातार उठती रही।



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