पत्रकार पर जानलेवा हमला,उल्टा FIR से भड़का आक्रोश,डीजीपी से न्याय की गुहार।
विदिशा के आनंदपुर में रिपोर्टिंग के दौरान हमला,आरोपी पर कार्रवाई की मांग,IFWJ ने चेताया-न्याय नहीं मिला तो प्रदेशव्यापी आंदोलन।
विदिशा,ग्रामीण खबर MP।
मध्यप्रदेश के विदिशा जिले की लटेरी तहसील अंतर्गत आनंदपुर में पत्रकार पर हुए जानलेवा हमले का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और इसने प्रदेशभर के पत्रकारों में गहरी चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। 6 मार्च 2026 को अपने पेशेवर दायित्व का निर्वहन करते हुए रिपोर्टिंग करने पहुंचे पत्रकार मनीष शर्मा पर हुए हमले के बाद पुलिस द्वारा उल्टा उन्हीं के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई, जिसने पूरे घटनाक्रम को और अधिक विवादास्पद बना दिया है। इस प्रकरण ने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दर्शाया है कि जमीनी स्तर पर पत्रकारों की सुरक्षा किस हद तक असुरक्षित होती जा रही है।
जानकारी के अनुसार, मनीष शर्मा किसी स्थानीय मुद्दे की रिपोर्टिंग के सिलसिले में आनंदपुर पहुंचे थे। इसी दौरान सरपंच पुत्र एवं शासकीय शिक्षक राधा बल्लभ शर्मा द्वारा उन पर अचानक हमला कर दिया गया। बताया जा रहा है कि हमला इतना गंभीर था कि इसे जानलेवा प्रयास माना जा रहा है। घटना के समय मौजूद स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने इस पूरी घटना को देखा, वहीं कुछ लोगों ने इसका वीडियो भी बनाया, जो घटना की सच्चाई को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इसके बावजूद पुलिस द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों को गंभीरता से न लेते हुए उल्टा पीड़ित पत्रकार के खिलाफ ही मामला दर्ज कर दिया गया, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
इस कार्रवाई के बाद प्रदेशभर के पत्रकार संगठनों में नाराजगी का माहौल है। पत्रकारों का कहना है कि यदि एक पत्रकार, जो समाज के मुद्दों को सामने लाने का कार्य करता है, उसी को इस प्रकार प्रताड़ित किया जाएगा और न्याय के बजाय उसे ही आरोपी बना दिया जाएगा, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है। इस घटना को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला बताया जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र गौतम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल पहुंचकर पुलिस महानिदेशक को औपचारिक आवेदन पत्र सौंपा। इस आवेदन में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग के साथ-साथ पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि इस मामले में जल्द और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो पत्रकार समाज व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
प्रेषित आवेदन पत्र में कई महत्वपूर्ण मांगें प्रमुखता से रखी गई हैं। इनमें पत्रकार मनीष शर्मा पर दर्ज FIR को तत्काल निरस्त करने की मांग सबसे प्रमुख है। इसके साथ ही आरोपी राधा बल्लभ शर्मा के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उनकी शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित करने, पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, तथा पीड़ित पत्रकार और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी शामिल है। संगठन का कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक न्याय की उम्मीद अधूरी रहेगी।
प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र गौतम ने इस पूरे मामले को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए, तो इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट के बैनर तले पूरे मध्यप्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों के पत्रकार शामिल होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्थिति के लिए पूरी तरह से पुलिस प्रशासन और शासन जिम्मेदार होगा।
इस घटना के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों में पत्रकार संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन की तैयारी भी शुरू हो गई है। कई स्थानों पर ज्ञापन सौंपे जाने और धरना-प्रदर्शन की रणनीति बनाई जा रही है। पत्रकारों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे पत्रकार समाज की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल पत्रकारों के मनोबल को प्रभावित करती हैं, बल्कि समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही की प्रक्रिया को भी कमजोर करती हैं। यदि पत्रकार बिना भय के कार्य नहीं कर पाएंगे, तो जनहित से जुड़े मुद्दे सामने नहीं आ सकेंगे, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से किसी ठोस कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस और शासन इस गंभीर प्रकरण में किस प्रकार की भूमिका निभाते हैं और क्या पीड़ित पत्रकार को न्याय मिल पाता है या नहीं। वहीं पत्रकार संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मामले को किसी भी स्थिति में दबने नहीं देंगे और न्याय मिलने तक अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
