झंडा चौक बना मौत का जाल,सड़क के बीच निकली लोहे की छड़ें,दो महीने से प्रशासन बेखबर।
उमरियापान के सबसे व्यस्त चौराहे पर हादसे का खतरा बरकरार,स्थानीय नागरिकों में आक्रोश,तत्काल मरम्मत की मांग तेज।
उमरियापान,ग्रामीण खबर MP।
नगर के सबसे प्रमुख और व्यस्त माने जाने वाले झंडा चौक की हालत इन दिनों गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। यहां सड़क के ठीक बीचों-बीच लोहे की नुकीली छड़ें (सरिया) बाहर निकली हुई हैं, जो हर पल राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा बनी हुई हैं। यह स्थिति पिछले लगभग दो महीनों से जस की तस बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों और स्थानीय प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
झंडा चौक को नगर का हृदय स्थल कहा जाता है, जहां से दिनभर में हजारों छोटे-बड़े वाहन, स्कूली छात्र-छात्राएं, व्यापारी और आम नागरिकों का आवागमन होता है। ऐसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थान पर सड़क के बीचों-बीच निकली लोहे की छड़ें सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को दर्शाती हैं। यह लापरवाही कभी भी एक बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह समस्या अचानक उत्पन्न नहीं हुई, बल्कि पिछले दो महीनों से लगातार बनी हुई है। कई बार लोगों ने इस ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। नागरिकों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में व्यवस्थाएं सुधारने की बात करते हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
विशेष रूप से रात के समय यह स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है। सड़क पर पर्याप्त रोशनी न होने के कारण ये लोहे की छड़ें स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतीं, जिससे बाइक सवारों और साइकिल चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। पैदल चलने वाले लोग भी अनजाने में इनसे टकराकर घायल हो सकते हैं। कई स्थानीय लोगों ने इसे खुलेआम “डेथ ट्रैप” की संज्ञा दी है।
वाहन चालकों के अनुसार, यदि कोई तेज रफ्तार वाहन इन छड़ों के संपर्क में आता है, तो उसके टायर फट सकते हैं, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट सकता है या अन्य वाहनों से टकरा सकता है। ऐसी स्थिति में गंभीर सड़क दुर्घटना होना तय है। वहीं दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह खतरा और भी अधिक है, क्योंकि हल्की सी टक्कर भी उन्हें सड़क पर गिराकर गंभीर रूप से घायल कर सकती है।
झंडा चौक के आसपास बाजार क्षेत्र होने के कारण यहां हमेशा भीड़ बनी रहती है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में मवेशियों का भी आवागमन रहता है। ऐसे में सड़क के बीच निकली ये नुकीली छड़ें न केवल इंसानों के लिए बल्कि जानवरों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती हैं।
स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों में इस समस्या को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि प्रशासन की यह उदासीनता समझ से परे है। इतने व्यस्त चौराहे पर यदि दो महीनों तक ऐसी खतरनाक स्थिति बनी रहती है, तो यह स्पष्ट रूप से लापरवाही और जिम्मेदारी से बचने का उदाहरण है। लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा।
नागरिकों ने यह भी बताया कि कई बार संबंधित विभागों को मौखिक और लिखित रूप से शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। मौके पर कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। इससे लोगों का प्रशासन पर से भरोसा भी कमजोर पड़ता जा रहा है।
क्षेत्रीय जनता ने जिला प्रशासन, ग्रामपंचायत और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए। सड़क के बीच निकली लोहे की छड़ों को तुरंत हटाकर सड़क को समतल किया जाए या फिर पूरी सड़क की मरम्मत कर उसे सुरक्षित बनाया जाए। साथ ही जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक अस्थायी रूप से चेतावनी संकेतक या बैरिकेड्स लगाए जाएं, ताकि लोग सावधान रह सकें।
नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते इस खतरे को दूर नहीं किया गया, तो किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले पर कब तक कार्रवाई करते हैं और आम जनता को इस खतरे से राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
