रेलवे ओवर ब्रिज के शुभारंभ में मुख्यमंत्री के न आने से सिहोरा में नाराजगी,उपेक्षा के आरोप तेज।
आमंत्रण के बावजूद कार्यक्रम में नहीं पहुंचेंगे मुख्यमंत्री,मंत्री राकेश सिंह होंगे मुख्य अतिथि,क्षेत्र में उबाल,आंदोलन की चेतावनी।
सिहोरा,ग्रामीण खबर MP।
सिहोरा-खितौला रेलवे ओवर ब्रिज का बहुप्रतीक्षित शुभारंभ क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा था। लंबे समय से इस पुल की मांग की जा रही थी और इसके निर्माण को लेकर क्षेत्रवासियों में उत्साह का माहौल था। लोगों को उम्मीद थी कि इस महत्वपूर्ण परियोजना के शुभारंभ अवसर पर स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उपस्थित रहकर सिहोरा क्षेत्र को एक नई पहचान देंगे।
लेकिन जैसे ही यह खबर सामने आई कि मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे, सिहोरा सहित आसपास के क्षेत्रों में नाराजगी की लहर दौड़ गई। आमजन से लेकर सामाजिक संगठनों और आंदोलन से जुड़े लोगों तक ने इसे क्षेत्र की लगातार हो रही उपेक्षा का प्रतीक बताया है। लोगों का कहना है कि जिस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताया जा रहा था, उसमें मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति ने इसकी गरिमा को प्रभावित किया है।
बताया जाता है कि 26 दिसंबर 2025 को भोपाल में सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला था। इस प्रतिनिधिमंडल में लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति के सदस्य भी शामिल थे। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सिहोरा आने की सहमति जताई थी और स्थानीय विधायक संतोष बरकड़े को कार्यक्रम तय करने के निर्देश भी दिए थे। इस आश्वासन के बाद क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी थी कि जल्द ही मुख्यमंत्री का सिहोरा आगमन होगा और क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।
इसके बाद स्थानीय स्तर पर खितौला रेलवे ओवर ब्रिज के शुभारंभ को मुख्यमंत्री के आगमन से जोड़ते हुए कार्यक्रम का प्रस्ताव तैयार किया गया। क्षेत्रवासियों ने इसे केवल एक पुल का उद्घाटन नहीं, बल्कि सिहोरा के विकास और जिला बनाए जाने की मांग को गति देने का अवसर माना था।
हालांकि अब 17 अप्रैल को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के स्थान पर मंत्री एवं पूर्व सांसद राकेश सिंह के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की घोषणा ने पूरे माहौल को बदल दिया है। लोगों का कहना है कि मंत्री का आगमन सम्मानजनक है, लेकिन मुख्यमंत्री का न आना एक बड़ा संकेत है, जो क्षेत्र के प्रति शासन की प्राथमिकता पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सिहोरा लंबे समय से विकास की दौड़ में पीछे छूटता जा रहा है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुविधाओं के मामले में भी अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है। ऐसे में रेलवे ओवर ब्रिज को एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन इस अवसर पर मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति ने लोगों की उम्मीदों को ठेस पहुंचाई है।
आंदोलन समिति से जुड़े सदस्यों का कहना है कि सिहोरा को जिला बनाने की मांग वर्षों से चल रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल आश्वासन देकर जनता को शांत करने का प्रयास किया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई निर्णायक पहल नजर नहीं आती।
क्षेत्र के व्यापारियों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री स्वयं आकर क्षेत्र की समस्याओं को देखते और जनता से संवाद करते, तो इससे सकारात्मक संदेश जाता। इससे न केवल प्रशासनिक सक्रियता बढ़ती, बल्कि विकास कार्यों में भी तेजी आती।
इसी बीच लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति के सदस्य अनिल जैन ने मुख्यमंत्री के निवास पर पत्र मेल कर उन्हें पुनः सिहोरा आने का आमंत्रण भेजा है। पत्र में उन्होंने 26 दिसंबर को दिए गए आश्वासन की याद दिलाते हुए आग्रह किया है कि मुख्यमंत्री रेलवे ओवर ब्रिज के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होकर क्षेत्रवासियों की भावनाओं का सम्मान करें।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सिहोरा की जनता मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर उत्साहित थी और उनके न आने से लोगों में निराशा का माहौल बन गया है। समिति ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री इस विषय को गंभीरता से लेंगे और जल्द ही सिहोरा का दौरा करेंगे।
वहीं, आंदोलन समिति और स्थानीय संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र की उपेक्षा इसी तरह जारी रही, तो आने वाले समय में बड़े स्तर पर जनआंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल रेलवे ओवर ब्रिज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सिहोरा को जिला बनाने और समग्र विकास की मांग को लेकर व्यापक रूप ले सकता है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह मामला महत्वपूर्ण होता जा रहा है। क्षेत्र में बढ़ती नाराजगी आगामी चुनावों में भी प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि शासन-प्रशासन इस स्थिति को कैसे संभालता है और क्या मुख्यमंत्री भविष्य में सिहोरा आकर जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरते हैं या नहीं।
फिलहाल, सिहोरा-खितौला रेलवे ओवर ब्रिज का उद्घाटन तो तय समय पर होगा, लेकिन इस कार्यक्रम के साथ जुड़ी राजनीतिक और सामाजिक हलचल ने इसे एक सामान्य उद्घाटन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। क्षेत्र की जनता अब केवल विकास कार्यों की नहीं, बल्कि सम्मान और पहचान की भी मांग कर रही है।
