जल गंगा संवर्धन अभियान में शामिल हो लेभर नदी घाटों की सफाई,ग्रामीणों ने उठाई मांग।

 जल गंगा संवर्धन अभियान में शामिल हो लेभर नदी घाटों की सफाई,ग्रामीणों ने उठाई मांग।

सावन माह और धार्मिक आयोजनों को देखते हुए भारत नगर,नेगाईं,अतरसूमा सहित प्रमुख घाटों की स्वच्छता पर जोर,प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपील।

सिलौंडी,ग्रामीण खबर एमपी।

सिलौंडी क्षेत्र में बहने वाली लेभर नदी के विभिन्न घाटों की सफाई को लेकर ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग उठाई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान का मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, पुनर्जीवन और स्वच्छता सुनिश्चित करना है, ऐसे में इस अभियान के अंतर्गत लेभर नदी के प्रमुख घाटों की भी साफ-सफाई कराई जानी चाहिए। ग्रामीणों ने विशेष रूप से भारत नगर घाट, नेगाईं घाट, अतरसूमा घाट तथा पंचायत भवन के समीप स्थित घाटों को प्राथमिकता के आधार पर स्वच्छ कराने की आवश्यकता बताई है।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार वर्तमान समय में इन घाटों पर बड़ी मात्रा में झाड़ियां उग आई हैं तथा कई स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। घाटों तक पहुंचने वाले मार्ग भी कई जगह अव्यवस्थित दिखाई देते हैं, जिससे श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई कार्य नहीं कराया गया तो आगामी बारिश और मानसून के दौरान स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

ग्रामीणों ने बताया कि लेभर नदी केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आस्था का प्रमुख केंद्र भी है। वर्षभर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन-पाठ, स्नान, व्रत-त्योहार और पारंपरिक कार्यक्रम नदी तटों पर आयोजित होते रहते हैं। विशेष रूप से सावन माह में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। भगवान शिव की पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, कांवड़ यात्राओं से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम तथा विभिन्न देवी-देवताओं के पूजन के लिए बड़ी संख्या में लोग नदी घाटों पर पहुंचते हैं।

क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि वर्षों से लेभर नदी के घाट स्थानीय जनजीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। यहां धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी संपन्न होती हैं। ऐसे में घाटों की स्वच्छता बनाए रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की सामूहिक आवश्यकता भी है। हालांकि वर्तमान स्थिति को देखते हुए व्यापक स्तर पर सफाई अभियान चलाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि नवरात्रि के दौरान मां देवी के ज्वारे विसर्जन, धार्मिक स्नान और अन्य पारंपरिक कार्यक्रमों के लिए उन्हें नदी घाटों पर जाना पड़ता है। गंदगी और झाड़ियों के कारण कई बार असुविधा का सामना करना पड़ता है। यदि घाट स्वच्छ और व्यवस्थित होंगे तो धार्मिक कार्यक्रम अधिक सुगमता और श्रद्धा के साथ संपन्न हो सकेंगे।

क्षेत्र के युवाओं ने भी जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत घाटों की सफाई को आवश्यक बताते हुए कहा कि स्वच्छ नदी और स्वच्छ घाट पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे। उनका कहना है कि जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ नदी किनारों की सफाई और सौंदर्यीकरण भी किया जाना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित प्राकृतिक धरोहर मिल सके।

ग्रामीणों का मानना है कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि जनभागीदारी का अभियान है। यदि प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से लेभर नदी के घाटों पर विशेष सफाई अभियान चलाया जाए तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे क्षेत्र में दिखाई देगा। इससे लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और नदी संरक्षण को भी नई गति मिलेगी।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मानसून शुरू होने से पहले घाटों का निरीक्षण कर आवश्यक सफाई कार्य कराया जाए। साथ ही झाड़ियों की कटाई, कचरा हटाने, घाटों की मरम्मत तथा आवागमन के रास्तों को सुगम बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई होने पर सावन माह में आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।

क्षेत्रवासियों ने आशा व्यक्त की है कि शासन की जल गंगा संवर्धन योजना के उद्देश्यों के अनुरूप लेभर नदी के घाटों को भी अभियान में शामिल कर आवश्यक सफाई कार्य कराया जाएगा। इससे न केवल धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि नदी संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता को भी बल मिलेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा करते हुए कहा है कि लेभर नदी क्षेत्र की पहचान और आस्था का केंद्र है, इसलिए इसके घाटों की स्वच्छता और संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।



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