मां वीरासन देवी के जवारे विसर्जन में उमड़ा आस्था का सैलाब।
सिलौंडी में नवरात्रि पर्व पर हजारों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़,भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम।
सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP।
कटनी जिले के सिलौंडी स्थित प्रसिद्ध मां वीरासन देवी मंदिर में नवरात्रि पर्व के समापन अवसर पर जवारे विसर्जन के दौरान आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस अवसर पर न केवल कटनी जिले बल्कि आसपास के कई जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन और इस विशेष अनुष्ठान के साक्षी बनने पहुंचे।
नवरात्रि के नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना रहा, जिसका चरम रूप जवारे विसर्जन के दिन देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगनी शुरू हो गई थी, जो देर शाम तक लगातार बढ़ती रही। भक्तजन मां के जयकारों के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा परंपरागत विधि-विधान से विशेष अनुष्ठान संपन्न किया गया। उन्होंने वाना छेदकर मां वीरासन देवी की महाआरती की, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और आस्था का केंद्र रही। इसके साथ ही कांटों के झूले में झूलने की प्राचीन परंपरा का निर्वहन भी किया गया, जिसे देखने के लिए श्रद्धालु उत्सुक नजर आए। इस अद्भुत और रोमांचकारी दृश्य ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं पर मां की भक्ति का भाव प्रकट हुआ। कई भक्त भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए, जिससे पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा। यह दृश्य श्रद्धा और विश्वास की गहराई को दर्शाता रहा।
नवरात्रि के प्रथम दिवस से लेकर अंतिम दिवस तक सेवा भारती कटनी द्वारा प्रतिदिन भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। भंडारे की सुव्यवस्थित व्यवस्था और सेवा भाव ने श्रद्धालुओं के मन को विशेष रूप से प्रभावित किया।
जवारे विसर्जन के दौरान प्रशासन और स्थानीय समिति द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे पूरे कार्यक्रम का संचालन सुचारू रूप से संपन्न हुआ।
सिलौंडी में आयोजित यह धार्मिक आयोजन न केवल आस्था का केंद्र बना, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक एकता का भी प्रतीक बनकर उभरा। मां वीरासन देवी के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि नवरात्रि का यह पर्व क्षेत्रवासियों के जीवन में विशेष महत्व रखता है।
