बेटियों की सुरक्षा हर समाज की जिम्मेदारी,उन्हें आत्मनिर्भर बनाना ही सच्चा सशक्तिकरण-रेखा अंजू तिवारी।
अंतरराष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण दिवस पर कार्यक्रम आयोजित,समाजसेवी व अधिवक्ता रेखा अंजू तिवारी ने बेटियों की शिक्षा,सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर दिया जोर।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कटनी जिले की समाजसेवी एवं अधिवक्ता रेखा अंजू तिवारी ने महिलाओं और बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बेटियाँ हमारे समाज और देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। एक बेटी केवल परिवार का ही नहीं बल्कि पूरे समाज का भविष्य होती है, इसलिए उनकी सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जब किसी समाज में बेटियों को सम्मान और समान अवसर मिलते हैं, तब वह समाज तेजी से प्रगति करता है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज भी कई स्थानों पर बेटियों के साथ भेदभाव किया जाता है। कहीं भ्रूण हत्या की घटनाएँ सामने आती हैं तो कहीं बेटियों को शिक्षा और अवसरों से वंचित रखा जाता है। यह स्थिति बदलने की जरूरत है और इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सोच में परिवर्तन लाना होगा।
रेखा अंजू तिवारी ने कहा कि बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच और सम्मान की भावना विकसित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसी दुखद घटनाएँ सामने आती हैं जब नवजात बेटियों को परिवार और समाज के डर से कचरे के ढेर में छोड़ दिया जाता है। यह केवल एक बच्ची के साथ अन्याय नहीं बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध है। समाज को ऐसी घटनाओं के खिलाफ मजबूती से खड़ा होना होगा और बेटियों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने के लिए सामूहिक प्रयास करना होगा।
उन्होंने कहा कि बेटियाँ किसी से कम नहीं होतीं। आज देश और दुनिया में अनेक क्षेत्रों में बेटियों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। शिक्षा, खेल, प्रशासन, विज्ञान, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में बेटियों की उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि यदि उन्हें सही अवसर और प्रोत्साहन मिले तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।
रेखा अंजू तिवारी ने महिलाओं और बेटियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। यदि उन्हें किसी भी प्रकार का खतरा, अन्याय या उत्पीड़न महसूस हो तो वे डरने के बजाय साहस के साथ उसका सामना करें और कानून की मदद लें। उन्होंने कहा कि आज महिलाओं की सुरक्षा के लिए अनेक कानून और व्यवस्थाएँ मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभाव तभी दिखाई देगा जब महिलाएँ स्वयं जागरूक और आत्मविश्वासी होंगी।
उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास और शिक्षा ही महिलाओं को सशक्त बनाती है। जब एक बेटी शिक्षित होती है तो वह न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाती है बल्कि पूरे परिवार और समाज को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए परिवारों को चाहिए कि वे बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए हर संभव अवसर प्रदान करें।
रेखा अंजू तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में भले ही महिलाओं और बेटियों की राह में कई चुनौतियाँ दिखाई देती हों, लेकिन यदि परिवार और समाज उनका साथ दे तो वे हर बाधा को पार कर अपनी मंजिल तक जरूर पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि बेटियाँ अपने माता-पिता का सहारा बनती हैं और जीवन के हर कठिन समय में उनके साथ खड़ी रहती हैं।
उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि हमें मिलकर यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपनी बेटियों को शिक्षा, कौशल विकास और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। बेटियों को अपने जीवन के निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सकें।
उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन द्वारा महिलाओं और बेटियों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएँ और बेटियाँ तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं, स्वरोजगार के छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर सकती हैं और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं। जब महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होंगी तब समाज में उनका सम्मान और भी बढ़ेगा।
रेखा अंजू तिवारी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक दिन मनाने का विषय नहीं है बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें परिवार, समाज और शासन सभी की भागीदारी आवश्यक है। बेटियों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर मिलें, तभी सच्चे अर्थों में महिला सशक्तिकरण संभव होगा।
उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा कि हमें यह समझना होगा कि बेटियाँ किसी पर बोझ नहीं बल्कि समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं। जब समाज की हर बेटी निर्भीक और निडर होकर अपने सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ेगी, तभी एक सशक्त, समृद्ध और संवेदनशील राष्ट्र का निर्माण होगा।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने महिला सशक्तिकरण, बेटियों की सुरक्षा और शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प लिया तथा समाज में सकारात्मक सोच और समानता का वातावरण बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं और युवाओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए बेटियों को आगे बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मिलकर काम करने का संकल्प दोहराया।
