सिहोरा में दो ट्रेनों के ठहराव से पूरी हुई वर्षों पुरानी मांग,जनजागरण और जनदबाव का दिखा असर।

 सिहोरा में दो ट्रेनों के ठहराव से पूरी हुई वर्षों पुरानी मांग,जनजागरण और जनदबाव का दिखा असर।

सांसद आशीष दुबे के प्रयास और जनता की जागरूकता से मिली सफलता,लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने बताया जनसंकल्प की जीत।

सिहोरा,ग्रामीण खबर MP।

सिहोरा रेलवे स्टेशन पर दो ट्रेनों के ठहराव की मंजूरी को क्षेत्र की जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग की महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने इसे केवल एक सामान्य प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि सिहोरा की जनता की जागरूकता, एकजुटता और अपने अधिकारों के प्रति बढ़ती सजगता का परिणाम बताया है।

समिति के अनुसार सिहोरा में ट्रेनों के ठहराव की मांग कई वर्षों से उठती रही है। क्षेत्र के नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा समय-समय पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाता रहा, लेकिन लंबे समय तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी। हाल ही में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र के सांसद आशीष दुबे, विधायक संतोष बरकड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में जब ट्रेनों के ठहराव की घोषणा हुई तो इसे सिहोरा वासियों की सामूहिक आवाज की जीत माना गया।

कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी स्वीकार किया कि ट्रेनों के ठहराव की मांग पुरानी और बहुप्रतीक्षित थी। इस दौरान प्रधानमंत्री और रेल मंत्री के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया। आंदोलन समिति का कहना है कि मांग पुरानी जरूर थी, लेकिन उसे प्रभावी तरीके से उच्च स्तर तक पहुंचाया जाना भी उतना ही जरूरी था। समिति के अनुसार वर्तमान सांसद आशीष दुबे द्वारा इस मांग को मजबूती से उठाए जाने का सकारात्मक परिणाम सामने आया है और सिहोरा को दो ट्रेनों का ठहराव एक साथ मिल सका है।

समिति का मानना है कि इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण सिहोरा की जागरूक जनता है, जिसने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग को सामने रखना सीख लिया है। सांसद आशीष दुबे ने भी अपने संबोधन में कहा कि जब भी वह सिहोरा आते थे या सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट करते थे, तो सिहोरा के लोगों की ओर से एक ही सवाल बार-बार सामने आता था कि ट्रेन सिहोरा में कब रुकेगी।

समिति के अनुसार लगातार उठती इस मांग ने जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया और अंततः इसे उच्च स्तर तक पहुंचाया गया, जिसके बाद मांग पूरी होने में अधिक समय नहीं लगा। समिति का यह भी कहना है कि सिहोरा वासियों द्वारा दो ट्रेनों के ठहराव की जो मांग रखी गई थी, उसे एक साथ स्वीकार किया जाना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र की जनता की मांगें ठोस तथ्यों और वास्तविक जरूरतों पर आधारित होती हैं।

लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति ने इसे सिहोरा के नागरिकों के चरित्र और सामूहिक सोच का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह घटना केवल ट्रेनों के ठहराव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि जब जनता संगठित होकर अपनी बात रखती है तो उसे अनदेखा करना संभव नहीं होता।

समिति ने यह भी बताया कि सांसद आशीष दुबे ने 4 जून 2024 को चुनाव जीतने के बाद 26 जून को शपथ ग्रहण किया और इसके बाद 31 अगस्त 2024 को सिहोरा रेलवे स्टेशन पर छह ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखा था। वर्तमान में दो ट्रेनों के ठहराव की स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र की जनता ने इसके लिए आभार व्यक्त किया है, वहीं यह संकेत भी दिया है कि पत्र में जिन अन्य चार ट्रेनों का उल्लेख किया गया है, उनकी मांग भी अभी शेष है।

समिति का कहना है कि सिहोरा क्षेत्र की प्रमुख आवश्यकताओं में ट्रेनों के ठहराव के साथ-साथ रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी शामिल है। क्षेत्र के नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि जनप्रतिनिधि इन मुद्दों को भी गंभीरता से आगे बढ़ाएंगे ताकि क्षेत्र के विकास को गति मिल सके।

समिति ने अंत में कहा कि सिहोरा की जनता जब भी किसी मुद्दे को उठाती है तो वह निराधार नहीं होता। यदि जनप्रतिनिधि इन मांगों को उचित मंच तक पहुंचाते हैं तो निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। समिति ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी जनप्रतिनिधि जनता की आवाज को प्राथमिकता देंगे और सिहोरा के विकास से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

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