117 एकड़ सरकारी भूमि से अतिक्रमण न हटने से अटका गौशाला निर्माण,नेगाईं पंचायत का प्रस्ताव राजस्व विभाग में लंबित।
राजस्व विभाग की सुस्ती से प्रभावित हो रहे विकास कार्य,आवारा पशुओं से किसान परेशान-ग्रामीणों ने शीघ्र कार्रवाई की उठाई मांग।
सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP।
शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा पशुओं की समस्या के समाधान तथा किसानों की फसलों की सुरक्षा के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर गौशालाओं के निर्माण की योजना संचालित की जा रही है। इसी क्रम में सिलौंडी क्षेत्र की ग्राम पंचायत नेगाईं में भी एक विशाल गौशाला निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। गौशाला निर्माण के लिए पंचायत द्वारा लगभग 117 एकड़ शासकीय भूमि चिन्हित कर उसका प्रस्ताव तैयार कर राजस्व विभाग को भेज दिया गया था, लेकिन लंबे समय से भूमि से अतिक्रमण न हटाए जाने के कारण यह महत्वपूर्ण परियोजना अब तक प्रारंभ नहीं हो सकी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र में आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए किसानों को लगातार फसलों के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह द्वारा शासन स्तर पर प्रयास किए गए, जिसके परिणामस्वरूप नेगाईं में एक बड़ी और व्यवस्थित गौशाला निर्माण की स्वीकृति प्राप्त हुई। शासन द्वारा पंचायत से उपयुक्त शासकीय भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए थे, ताकि निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराया जा सके।
ग्राम पंचायत नेगाईं ने शासन के निर्देशों का पालन करते हुए तत्काल कार्रवाई की और नेगाईं महाविद्यालय के समीप स्थित लगभग 117 एकड़ शासकीय भूमि को गौशाला निर्माण के लिए उपयुक्त मानते हुए उसका प्रस्ताव तैयार किया। पंचायत ने यह प्रस्ताव सिलौंडी नायब तहसीलदार कार्यालय को भेजते हुए शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग भी की, जिससे निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए और शासन की योजना समय पर पूरी हो सके।
हालांकि प्रस्ताव भेजे जाने के बाद कई महीने बीत जाने के बावजूद राजस्व विभाग के स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है, जिसके कारण शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। परिणामस्वरूप गौशाला निर्माण का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है और शासन की महत्वपूर्ण योजना अधर में लटकी हुई दिखाई दे रही है।
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि गांव और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आवारा पशु खुले में घूमते रहते हैं, जो रात के समय खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। कई किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए रात-रात भर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। यदि नेगाईं में प्रस्तावित गौशाला का निर्माण शीघ्र हो जाता है तो आवारा पशुओं को वहां सुरक्षित रखा जा सकेगा और किसानों को इस गंभीर समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।
ग्रामीणों के अनुसार जिस शासकीय भूमि को गौशाला निर्माण के लिए चिन्हित किया गया है, उस पर कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि कुछ दबंग लोगों ने शासकीय भूमि के हिस्सों पर कब्जा कर रखा है, जिसके कारण राजस्व विभाग की कार्रवाई में भी देरी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण हटाकर भूमि को मुक्त नहीं कराया गया तो गौशाला निर्माण में और अधिक देरी हो सकती है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि शासन की कई योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं क्योंकि संबंधित विभाग समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं कर पाते। नेगाईं में प्रस्तावित गौशाला का मामला भी कुछ ऐसा ही प्रतीत हो रहा है, जहां पंचायत द्वारा अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी गई है, लेकिन राजस्व विभाग की सुस्ती के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि यदि भूमि को जल्द खाली कराया जाता है तो गौशाला निर्माण का कार्य शुरू हो सकेगा और क्षेत्र के हजारों किसानों को आवारा पशुओं की समस्या से राहत मिल सकेगी।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय पर कार्रवाई की जाए तो नेगाईं में बनने वाली यह गौशाला पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा साबित हो सकती है। इससे न केवल आवारा पशुओं की समस्या का समाधान होगा बल्कि पशुओं के संरक्षण और देखभाल के लिए भी एक व्यवस्थित व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी। अब क्षेत्र के लोग प्रशासन और राजस्व विभाग से शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद लगाए हुए हैं, ताकि शासन की इस महत्वपूर्ण योजना को धरातल पर उतारा जा सके और किसानों को राहत मिल सके।
