भारतीय किसान संघ का सरकार को दो टूक संदेश,किसानों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन,चेतावनी-अनदेखी पर होगा बड़ा आंदोलन।
लाभकारी समर्थन मूल्य,केसीसी ऋण की समय-सीमा बढ़ाने,नरवाई प्रबंधन में दंडात्मक कार्रवाई रोकने और फसल मुआवजा देने सहित आठ सूत्रीय मांगें रखीं,संजय सागर व सगड़ डैम से वंचित गांवों को नहर नेटवर्क से जोड़ने की भी उठी आवाज।
विदिशा,ग्रामीण खबर MP
भारतीय किसान संघ की तहसील इकाई नटेरन ने क्षेत्र के किसानों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम अनुविभागीय अधिकारी को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से संघ ने स्पष्ट किया कि यदि किसानों से जुड़े मुद्दों पर शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिए गए तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
ज्ञापन में किसानों ने फसलों के समर्थन मूल्य, कर्ज अदायगी की समय-सीमा, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित फसलों के मुआवजे, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार तथा नरवाई प्रबंधन के नाम पर की जा रही सख्ती जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। किसान संघ पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदूषण मुक्त भारत का संकल्प सभी नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है। केवल किसानों को ही प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराना न तो न्यायसंगत है और न ही व्यावहारिक।
उन्होंने कहा कि नरवाई प्रबंधन के नाम पर किसानों पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी देना और जुर्माने की तलवार लटकाना उचित नहीं है। यदि प्रशासन द्वारा इस प्रकार की कार्रवाई की जाती है तो किसान संघ तहसील मुख्यालय का घेराव कर व्यापक आंदोलन करेगा। संघ ने सरकार से अपील की कि किसानों को दंडित करने के बजाय उन्हें तकनीकी और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे बेहतर तरीके से नरवाई का प्रबंधन कर सकें।
ज्ञापन में आठ प्रमुख मांगें विस्तार से रखी गई हैं। किसान संघ ने चुनावी घोषणा के अनुरूप गेहूं की खरीदी 2700 रुपये प्रति क्विंटल पर सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही सभी फसलों के लिए लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिल सके और खेती घाटे का सौदा न बने।
संघ ने जिला सहकारी बैंक के केसीसी ऋण की अदायगी की अंतिम तिथि 28 मार्च से बढ़ाकर 15 मई 2026 करने की मांग की। उनका कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, ऐसे में उन्हें अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए ताकि वे बिना दबाव के कर्ज चुका सकें।
समर्थन मूल्य केंद्रों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए धर्म कांटे से तुलाई की अनिवार्यता की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। किसानों ने आरोप लगाया कि कई केंद्रों पर तुलाई प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रहती, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।
सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर संघ ने संजय सागर और सगड़ डैम से वंचित गांवों को शीघ्र नहर नेटवर्क से जोड़ने की मांग की। उनका कहना है कि क्षेत्र के कई गांव आज भी पर्याप्त सिंचाई सुविधा से वंचित हैं, जिससे फसलों की उत्पादकता प्रभावित होती है। यदि नहरों का विस्तार किया जाए तो किसानों को बड़ा लाभ मिल सकता है।
नरवाई निपटान के लिए किसानों को आर्थिक सहायता या सब्सिडी प्रदान करने की मांग करते हुए संघ ने कहा कि आधुनिक मशीनरी और संसाधनों की लागत अधिक होने के कारण छोटे और मध्यम किसान इन्हें वहन नहीं कर पाते। ऐसे में सरकार को विशेष योजना बनाकर सहयोग देना चाहिए।
प्राकृतिक आपदा से खराब हुई चना और मसूर की फसलों का शीघ्र सर्वे कर मुआवजा देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। किसानों ने बताया कि असमय वर्षा और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण फसलें प्रभावित हुई हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
इसके अतिरिक्त मसूर खरीदी की सीमा 2 क्विंटल 25 किलो से बढ़ाकर 3 क्विंटल प्रति बीघा करने की मांग की गई, ताकि किसानों को अपनी पूरी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिल सके।
किसानों ने कहा कि वे देश के अन्नदाता हैं और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भली-भांति समझते हैं। वे पर्यावरण संरक्षण और उत्पादन वृद्धि दोनों के लिए प्रतिबद्ध हैं, किंतु व्यवस्थागत कमियों का बोझ केवल उन पर डालना उचित नहीं है। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संभागीय उपाध्यक्ष भगवान सिंह रघुवंशी, प्रभारी प्राण सिंह रघुवंशी, जिला सदस्य वीर सिंह रघुवंशी, पूर्व जिला मंत्री कमल सिंह यादव, तहसील अध्यक्ष बालमुकुंद तिवारी, तहसील मंत्री दौलत सिंह लोधी, प्रचार-प्रसार प्रमुख कोक सिंह रघुवंशी सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे और एक स्वर में अपनी मांगों का समर्थन किया।
