गरीब,किसान और मध्यम वर्ग की अनदेखी का बजट:करण सिंह चौहान।

 गरीब,किसान और मध्यम वर्ग की अनदेखी का बजट:करण सिंह चौहान।

केंद्रीय बजट पर कांग्रेस नेता का तीखा प्रहार,युवाओं,महिलाओं और ग्रामीण रोजगार को लेकर सरकार पर उठाए गंभीर सवाल।

कटनी,ग्रामीण खबर MP। 

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत किए गए केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं छिंदवाड़ा प्रभारी करण सिंह चौहान ने इसे आम जनता की अपेक्षाओं से कोसों दूर बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट न तो गरीबों की जरूरतों को समझता है और न ही मध्यम वर्ग, किसानों और बेरोजगार युवाओं को कोई ठोस राहत देता है।

करण सिंह चौहान ने कहा कि बजट को देखने और समझने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि इसमें अन्नदाता किसान के लिए किसी भी प्रकार की ठोस सहायता या सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की गई है। देश का किसान लगातार बढ़ती लागत, खाद-बीज के दाम, डीजल-पेट्रोल की महंगाई और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है, लेकिन बजट में उसकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस नीति या आर्थिक पैकेज नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि किसान की आय दोगुनी करने के दावे केवल भाषणों तक सीमित रह गए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार सृजन की दिशा में भी यह बजट पूरी तरह विफल है। देश में बेरोजगारी अपने चरम पर है, शिक्षित युवा नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है और महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के लिए अवसर तलाश रही हैं, लेकिन बजट में रोजगार बढ़ाने के लिए कोई ठोस योजना या स्पष्ट रोडमैप पेश नहीं किया गया है। इससे युवाओं और महिलाओं में निराशा बढ़ना स्वाभाविक है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि गरीब और मध्यम वर्ग के लिए इस बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। न तो बढ़ती महंगाई से राहत देने के उपाय किए गए हैं और न ही आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ाने की दिशा में कोई घोषणा की गई है। मध्यम वर्ग टैक्स, महंगाई और शिक्षा-स्वास्थ्य के खर्च के बोझ तले दबा हुआ है, लेकिन बजट में उसके लिए कोई राहत नजर नहीं आती।

करण सिंह चौहान ने यह भी कहा कि सामाजिक सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी योजनाओं को लेकर भी बजट पूरी तरह मौन है। गरीबों, बुजुर्गों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और जरूरतमंद वर्ग के लिए किसी नई सामाजिक सुरक्षा योजना की घोषणा नहीं की गई, जिससे यह साफ होता है कि सरकार की प्राथमिकताओं में आम जनता शामिल नहीं है।

उन्होंने मनरेगा का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण रोजगार की रीढ़ मानी जाने वाली इस योजना के स्थान पर लाए जाने वाले नए कानून को लेकर बजट में किसी भी प्रकार के आवंटन या स्पष्टता का अभाव है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति और अधिक गंभीर होने की आशंका है और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।

बजट पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए करण सिंह चौहान ने कहा कि यह बजट देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो बेरोजगारों को इनकम टैक्स नहीं देना होगा, क्योंकि उनके पास आय ही नहीं है। बेघर लोगों के लिए हाउस टैक्स और वाटर टैक्स शत-प्रतिशत माफ मान लिया गया है, जिनके पास वाहन नहीं है उन्हें पेट्रोल मुफ्त मिलेगा और साइकिल से चलने वाले नागरिकों से रोड टैक्स और टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह व्यंग्य इस बजट की हकीकत को उजागर करता है।

अंत में उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों और शब्दों का खेल है, जिसमें आम आदमी के जीवन स्तर को सुधारने की कोई ठोस तस्वीर नजर नहीं आती। सरकार ने एक बार फिर गरीब, किसान, युवा और मध्यम वर्ग की अनदेखी की है, जिसे जनता आने वाले समय में जरूर याद रखेगी।

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