यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी,भाजपा जिलामंत्री प्रशांत राय की स्कॉर्पियो बनी जाम का कारण।

 यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी,भाजपा जिलामंत्री प्रशांत राय की स्कॉर्पियो बनी जाम का कारण।

झंडाचौक पर आधी सड़क घेरकर खड़ी रही गाड़ी,ड्राइवर ने दिखाया सत्ता का रौब,पुलिस की मुस्तैदी पर उठे सवाल।

उमरिया पान,ग्रामीण खबर MP।

शासन एवं प्रशासन द्वारा यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं। आम नागरिकों से नियमों के पालन की अपील के साथ ही पुलिस द्वारा नियमित रूप से चालानी कार्रवाई भी की जा रही है। बावजूद इसके, जब प्रभावशाली और राजनीतिक पदों से जुड़े व्यक्तियों के मामलों में नियमों की अनदेखी होती है, तो यह न केवल प्रशासनिक सख्ती के दावों को कमजोर करता है, बल्कि आम जनता के मन में भी असंतोष पैदा करता है।

ऐसा ही एक मामला उमरिया पान के सबसे व्यस्त और संवेदनशील झंडाचौक क्षेत्र में सामने आया है। जानकारी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी के जिलामंत्री प्रशांत राय की स्कॉर्पियो वाहन अशोक स्तंभ के पास काफी समय तक आधी सड़क पर खड़ी रही। झंडाचौक क्षेत्र पहले से ही संकरी गलियों, बाजार और लगातार होने वाले आवागमन के कारण जाम की समस्या से जूझता रहता है। ऐसे में सड़क के बीचोंबीच वाहन खड़ा करना यातायात नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना जाता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार स्कॉर्पियो वाहन के सड़क पर खड़े रहने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। दोपहिया वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग तलाशने पड़े, वहीं चारपहिया वाहन चालकों को काफी देर तक जाम में फंसे रहना पड़ा। राहगीरों और दुकानदारों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ समय के लिए पूरे क्षेत्र में अव्यवस्था का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वाहन काफी देर तक उसी स्थान पर खड़ा रहा और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति द्वारा उसे हटाने की पहल नहीं की गई। इसी दौरान ग्रामीण खबर MP के संपादक द्वारा जब वाहन चालक से गाड़ी को सड़क के किनारे लगाने का आग्रह किया गया, तो चालक ने सहयोग करने के बजाय कथित तौर पर सत्ता का रौब दिखाते हुए गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया। चालक द्वारा न तो यातायात अवरोध को गंभीरता से लिया गया और न ही आम जनता की परेशानी को समझने का प्रयास किया गया।

इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में आक्रोश देखा गया। लोगों का कहना है कि यदि कोई सामान्य नागरिक इस तरह से आधी सड़क पर वाहन खड़ा करता, तो तुरंत चालान की कार्रवाई होती या वाहन जब्त कर लिया जाता। लेकिन जब मामला राजनीतिक पद पर आसीन व्यक्ति या उनके वाहन का होता है, तो नियमों में नरमी क्यों दिखाई जाती है। यह स्थिति कानून के समान रूप से लागू होने के सिद्धांत पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

घटना ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। एक ओर पुलिस प्रशासन यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर व्यस्त चौराहे पर लंबे समय तक खड़े वाहन पर कोई कार्रवाई न होना दोहरी नीति को उजागर करता है। इससे आम जनता में यह संदेश जाता है कि नियम केवल आम लोगों के लिए हैं, प्रभावशाली वर्ग के लिए नहीं।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि झंडाचौक जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अवैध रूप से खड़े वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कानून सभी के लिए समान हो, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल, पद या रसूख से जुड़ा व्यक्ति क्यों न हो। नियमों के निष्पक्ष पालन से ही यातायात व्यवस्था में सुधार और जनता का विश्वास बहाल किया जा सकता है।

यह मामला केवल एक वाहन के गलत तरीके से खड़े होने का नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक निष्पक्षता, कानून के समान क्रियान्वयन और जिम्मेदार आचरण की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। यदि समय रहते इस तरह की घटनाओं पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आम जनता में असंतोष और अव्यवस्था और अधिक बढ़ सकती है।

ग्रामीण खबर MP-

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प्रधान संपादक:अज्जू सोनी। संपर्क:9977110734

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