बजरंग दल ने थाना प्रभारी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर मौलाना मदनी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

 बजरंग दल ने थाना प्रभारी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर मौलाना मदनी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

भड़काऊ और उग्र बयान को बताया देश की अखंडता पर हमला,न्यायपालिका,संविधान और सामाजिक सौहार्द को चुनौती देने के आरोप,उमरिया पान प्रखंड में गहरा रोष।

उमरिया पान,ग्रामीण खबर MP।

विश्व हिन्दू परिषद बजरंग दल प्रखंड उमरिया पान के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को एकजुट होकर पुलिस थाना प्रभारी उमरिया पान को ज्ञापन सौंपा और मौलाना महमूद अरशद मदनी द्वारा 29 नवंबर 2025 को भोपाल में दिए गए विवादित बयान पर त्वरित और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि “जब जब आतंक बढ़ेगा तब तब जिहाद बढ़ेगा” जैसे वाक्य न केवल भड़काऊ हैं, बल्कि सीधे-सीधे राष्ट्र की सुरक्षा, सामाजिक समरसता तथा संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को चुनौती देने वाले हैं। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह बयान देश के शांतिपूर्ण वातावरण को नुकसान पहुंचाने तथा विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास पैदा करने की मंशा से दिया गया है।

ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया कि ऐसे बयानों से समाज के भीतर असुरक्षा और तनाव का माहौल बनता है, जो देश के समग्र सामाजिक ढांचे को कमजोर करता है। कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि मौलाना मदनी का उक्त वक्तव्य न केवल देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था के निर्णयों और संवैधानिक अधिकारों को चुनौती देता है, बल्कि युवाओं को उकसाकर सशस्त्र विद्रोह जैसी खतरनाक सोच को बढ़ावा देता है। बजरंग दल ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की भाषा किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकती और यह राष्ट्र की एकता-अखंडता को ध्वस्त करने का एक सुनियोजित प्रयास प्रतीत होता है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रखंड अध्यक्ष प्रवीण गर्ग ने कहा कि जब भी देश के विरुद्ध इस प्रकार के उग्र बयान दिए जाते हैं, तब राष्ट्र को तोड़ने की कोशिश करने वाली शक्तियां हिम्मत पकड़ती हैं। उन्होंने कहा कि यह बयान केवल एक समुदाय की आस्था पर हमला नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण भारत की सांस्कृतिक मूल्यों को चोट पहुंचाने का प्रयास है। मंत्री अरविंद गुप्ता ने कहा कि भाषण सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर तेजी से फैल रहा है, जिससे आम लोगों में भय और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों को अत्यंत गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि इनका असर व्यापक स्तर पर समाज को प्रभावित करता है।

संयोजक कान्हा सोनी ने कहा कि देश के खिलाफ जहर उगलने वाली भाषा किसी भी रूप में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे बयानों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह भविष्य में बड़े सामाजिक संघर्षों का कारण बन सकता है। कान्हा सोनी ने कहा कि हिन्दू समाज की सहनशीलता को कमजोरी न समझा जाए, क्योंकि जब बात राष्ट्र और धर्म की आती है, तब पूरा समाज एकजुट होकर खड़ा होता है। उन्होंने इस मामले में तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस तरह की गैरजिम्मेदार बयानबाजी का कठोर उदाहरण पेश किया जाना चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति देश की शांति भंग करने का साहस न कर सके।

राजेंद्र लखेरा, गोलू सोनी, प्रिंस सोनी, अभिषेक यादव, देव पटेल सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने भी इस बयान को भारत की विविधता और साझा संस्कृति के खिलाफ बताया। सभी ने एकमत होकर कहा कि देश किसी भी प्रकार के उकसावे, हिंसा, उग्रवाद या धार्मिक विद्वेष को सहन नहीं करेगा और संविधान ने सभी नागरिकों को समान अधिकार और जिम्मेदारियां दी हैं, जिनका सम्मान सभी को करना चाहिए। कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि देश की न्यायपालिका सर्वोपरि है और किसी भी स्थिति में उसके फैसलों को चुनौती देने वाली भाषा को प्रोत्साहन नहीं दिया जा सकता।

ज्ञापन में थाना प्रभारी से यह अनुरोध भी किया गया कि ऐसे बयान देने वाले व्यक्तियों पर न केवल उचित धाराओं में मामला दर्ज कर कठोर दंड दिया जाए, बल्कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने हेतु ठोस कानूनी प्रावधान भी लागू किए जाएं। कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश की शांति, सद्भाव और भाईचारे की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है और ऐसे मामलों में सरकार तथा प्रशासन की त्वरित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।

 उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और किसी भी परिस्थिति में देश विरोधी और समाज विभाजनकारी सोच को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि समाज को भड़काने और धर्म के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देने वाले तत्वों पर कठोरतम कार्रवाई ही समय की मांग है, जिससे देश में अमन, शांति और आपसी सद्भाव कायम रह सके।

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