विधानसभा में गूंजा माधवनगर थाना का मामला,पुलिस कार्यप्रणाली पर चार विधायकों ने लगाए गंभीर आरोप।
पुलिस अभिरक्षा में कांग्रेस नेता द्वारा अवैध पूछताछ का आरोप,शुभम त्रिपाठी पर गलत धाराएँ लगाने का मामला तूल पकड़ा,मुख्यमंत्री की ओर से संपूर्ण जांच का आश्वासन।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
कटनी जिले की कानून व्यवस्था से जुड़े एक बेहद संवेदनशील प्रकरण ने मंगलवार को मध्यप्रदेश विधानसभा में हलचल मचा दी। प्रदेश में सत्ता पक्ष के चार विधायकों संदीप जायसवाल, संजय पाठक, प्रणय पांडे और अभिलाष पांडे ने एक साथ माधवनगर थाना प्रभारी की कार्यशैली और पुलिस द्वारा की गई कथित मनमानी पर गंभीर सवाल उठाए। विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से उठाए गए इस मुद्दे को प्रदेश के इतिहास में अभूतपूर्व बताया जा रहा है, क्योंकि पहली बार किसी जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर इतने बड़े स्तर पर सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त आपत्ति दर्ज की है।
विधायकों ने अपने ध्यानाकर्षण में कहा कि माधवनगर थाना क्षेत्र में हाल ही में हुई आगजनी की एक मामूली घटना को पुलिस द्वारा गंभीर अपराध में बदल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में बिना उचित जांच किए शुभम त्रिपाठी नामक युवक पर गैरजमानती धाराएँ थोप दी गईं और पुलिस की भूमिका पूरे घटनाक्रम में संदिग्ध दिखाई देती है।
ध्यानाकर्षण पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से अधिकृत मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने सदन को आश्वस्त किया कि पूरे मामले की पुनः निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज सहित सभी तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही, दबाव, पक्षपात या विधि-विपरीत कार्रवाई सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि विधायकों द्वारा लिखित में दिए गए सभी बिंदुओं पर विस्तृत जांच कराई जाएगी।
सदन में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी नाजिम खान के घर के बाहर लगी नाम पट्टिका और गेट पर 26–27 अगस्त 2025 की मध्यरात्रि अज्ञात व्यक्तियों ने आग लगाने की कोशिश की। बाउंड्रीवाल पर लगी नेम प्लेट में आग लगने का वीडियो भी उपलब्ध है जिसमें साफ दिखाई देता है कि आग कुछ ही सेकंड में बुझ जाती है और न तो घर को कोई नुकसान होता है, न ही किसी व्यक्ति को चोट पहुँचती है। घर और बाउंड्रीवाल की दूरी लगभग 15 फुट बताई गई है। इसके बावजूद पुलिस ने शुभम त्रिपाठी को गंभीर धाराओं के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया कि शुभम त्रिपाठी को न्यायालय द्वारा पुलिस रिमांड पर दिए जाने के बाद पुलिस अभिरक्षा में नियमों का खुला उल्लंघन किया गया। आरोपों के अनुसार थाना प्रभारी की मौजूदगी में कांग्रेस के एक नेता और पूर्व हथियार सप्लायर ने थाने के भीतर बैठकर शुभम त्रिपाठी से पूछताछ की, जबकि विधि के अनुसार पुलिस अभिरक्षा में किसी भी बाहरी व्यक्ति को पूछताछ का अधिकार नहीं होता। यह भी कहा गया कि उस नेता ने शुभम पर दबाव बनाते हुए कटनी के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति और उनके परिवार का नाम लेने को मजबूर करने का प्रयास किया, और ऐसा करने पर पुलिस से बचाने का लालच दिया गया।
विधायकों ने इसे पुलिस और बाहरी तत्वों की मिलीभगत बताते हुए कहा कि जिस प्रकार से शुभम त्रिपाठी को अपराधी दिखाने की कोशिश की गई, वह न्याय और विधिक प्रक्रिया के विपरीत है। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल वास्तविक अज्ञात आरोपी आज तक पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं, जबकि शुभम को बिना ठोस साक्ष्यों के जेल भेज दिया गया।
स्थानीय ब्राह्मण समाज ने भी लगातार पुलिस के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। बड़ी संख्या में समाजजन पहले ही जिला प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर मांग कर चुके हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, शुभम त्रिपाठी पर दर्ज प्रकरण निरस्त किया जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध तात्कालिक कार्रवाई की जाए। समाज का कहना है कि पिछले कुछ समय से ब्राह्मण समुदाय के युवाओं पर लगातार अनावश्यक, पक्षपातपूर्ण और एकतरफा कार्रवाई की जा रही है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पूरे घटनाक्रम ने कटनी जिले की पुलिस कार्यप्रणाली और थानों में व्यवस्था एवं नैतिकता के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधानसभा में मामला उठने के बाद अब यह राजनीतिक दायरे से निकलकर पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। जनता और जनप्रतिनिधियों की नजरें अब शासन-प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं, जिनका असर प्रदेश की पुलिसिंग व्यवस्था और थाने स्तर की जवाबदेही पर भी दिखाई देगा।
मामले की संवेदनशीलता, राजनीतिक महत्व और जनता की अपेक्षाओं को देखते हुए यह प्रकरण आगामी समय में प्रदेश की कानून व्यवस्था पर व्यापक बहस का कारण बन सकता है।
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