सायना महाविद्यालय में नई शिक्षा नीति 2020 के अनुच्छेद 14(1) पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित।

 सायना महाविद्यालय में नई शिक्षा नीति 2020 के अनुच्छेद 14(1) पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित।

SWAYAM ऑनलाइन पाठ्यक्रम से जुड़ने की पहल सराही गई,आधुनिक शिक्षण,डिजिटल लर्निंग और व्यावसायिक विकास पर विस्तृत मार्गदर्शन।

कटनी,ग्रामीण खबर MP। 

नई शिक्षा नीति 2020 के अनुच्छेद 14(1) के प्रभावी क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सायना महाविद्यालय में एक विस्तृत और उद्देश्यपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य फोकस शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को आधुनिक शिक्षण विधियों, डिजिटल लर्निंग, विषय-विशेष नवाचार, कौशल-विकास तथा व्यवहारिक रणनीतियों से परिचित कराना रहा, ताकि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार लाया जा सके।

नई शिक्षा नीति 2020 शिक्षा के उस मॉडल को बढ़ावा देती है, जिसमें शिक्षार्थी केंद्र में रहता है और उसकी सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक, प्रासंगिक और परिणामोन्मुख बनाया जाता है। इसी लक्ष्य की पूर्ति के लिए इस कार्यशाला में SWAYAM पोर्टल तथा विभिन्न ऑनलाइन कोर्सेस से परिचय कराते हुए प्रतिभागियों को डिजिटल शिक्षा के व्यापक आयामों और लाभों के बारे में जानकारी दी गई। SWAYAM और MOOCs जैसे प्लेटफॉर्म न केवल शिक्षार्थियों को अपनी गति से सीखने का अवसर देते हैं, बल्कि विषय की गहरी समझ विकसित करने, कौशलों को तराशने और रोजगारोन्मुख दक्षता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस — शासकीय तिलक महाविद्यालय कटनी के नई शिक्षा नीति नोडल अधिकारी डॉ. के. पी. मिश्र तथा SWAYAM पोर्टल की नोडल अधिकारी संगीता बासरानी ने विशेष रूप से उपस्थित होकर प्रतिभागियों को पोर्टल पर पंजीयन की विस्तृत प्रक्रिया, उपलब्ध MOOCs कोर्सेस की विशेषताओं, डिजिटल सामग्री के उपयोग, और राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों के बारे में महत्वपूर्ण दिशानिर्देश प्रदान किए। दोनों विशेषज्ञों ने ऑनलाइन शिक्षा को आज के समय की अनिवार्यता बताते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों का समुचित उपयोग ही छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सी. राजेश कुमार ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए SWAYAM पोर्टल पर पंजीयन करने और उपलब्ध विभिन्न ऑनलाइन कोर्सेस को नियमित रूप से अध्ययन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्व-अध्ययन, डिजिटल संसाधनों का उपयोग और नवाचार आधारित शिक्षण ही भविष्य की दिशा तय करेंगे।

वर्कशॉप में विभागाध्यक्ष डॉ. सी. ए. लियोनी, प्रो. आर. अबिरामी, शरद यादव, नोडल अधिकारी हीरा लाल केवट, तथा सहायक प्राध्यापक अरुण उरमलिया, सत्यवीर सिंह, शोभित त्रिपाठी, साक्षी कटारिया, दोलन रॉय, नेहा सिंह और रुचिता लूनावत सहित महाविद्यालय के कई शिक्षकों ने भागीदारी निभाई। उन्होंने छात्रों को नई शिक्षा नीति के विभिन्न बिंदुओं, शिक्षा में तकनीकी एकीकरण, भविष्य की कौशल-आवश्यकताओं तथा उद्योग आधारित सीखने के महत्व पर महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराया।

कार्यशाला में वाणिज्य संकाय के सभी छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने SWAYAM पोर्टल के उपयोग, MOOCs की भूमिका, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की डिजिटल शिक्षण सामग्री, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित लर्निंग टूल्स, स्किल डेवलपमेंट मॉड्यूल्स, और नई शिक्षा नीति द्वारा संचालित शैक्षणिक सुधारों से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

इस प्रशिक्षण से छात्रों के बीच डिजिटल लर्निंग को लेकर नया उत्साह देखने को मिला। कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप यदि शिक्षा प्रणाली में तकनीक का अधिक और प्रभावी उपयोग किया जाए, तो न केवल शिक्षण प्रक्रिया मजबूत होगी बल्कि छात्रों का आत्मविश्वास, कौशल और भविष्य की तैयारी भी बेहतर होगी।

महाविद्यालय प्रशासन द्वारा बताया गया कि आने वाले समय में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से निरंतर जोड़े रखा जा सके और गुणवत्ता युक्त उच्च शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।

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