देगवा महगवां पंचायत में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच बनी मज़ाक, पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट और प्रशासनिक चुप्पी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा।

 देगवा महगवां पंचायत में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच बनी मज़ाक, पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट और प्रशासनिक चुप्पी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा।

जांच अधिकारी पर सरपंच-सचिव को बचाने का आरोप, कलेक्टर कटनी से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग।

ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर mp:

ग्रामपंचायत देगवा महगवां में हुए भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामवासियों ने जिला कलेक्टर कटनी को एक बार फिर शिकायत पत्र सौंपकर मांग की है कि पंचायत में हुए व्यापक भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पूर्व में कराई गई जांच सिर्फ दिखावे की थी, जिसमें जांच अधिकारी ने सरपंच-सचिव को बचाने का पूरा प्रयास किया और रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण तरीके से तैयार की गई।

शिकायत में ग्रामवासियों ने बताया कि वे तहसील ढीमरखेड़ा अंतर्गत ग्राम देगवा महगवां के स्थायी निवासी हैं और पंचायत में हुए भ्रष्टाचार की उन्होंने पहले भी शिकायत की थी। इस पर जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के उपयंत्री अजय केशरवानी की टीम ने ग्रामीणों की उपस्थिति में जांच की, जिसमें कई गड़बड़ियां उजागर हुईं। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से आज दिनांक तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

जांच में सामने आया कि माध्यमिक शाला परिसर में बनाई गई बाउंड्री वाल की लंबाई मात्र 85 मीटर पाई गई, जबकि 181 हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत की जांच के बाद उपयंत्री आनंद उसरेठे द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में इसकी लंबाई 110 मीटर दर्शाई गई है। इन दोनों रिपोर्टों में भारी अंतर साफ तौर पर निर्माण कार्य में हुई अनियमितताओं और संभवतः सरकारी धन के गबन को इंगित करता है।

इसके अतिरिक्त, शंकर जी जोड़ीदार तालाब में सीमेंट, बोल्डर, मिक्सर मशीन और डिस्प्ले बोर्ड के फर्जी बिल प्रस्तुत किए गए, जिससे लाखों रुपये की गड़बड़ी सामने आई। इसी तरह, खेरदाई तालाब जोड़ीदार में भी बिल फर्जी पाए गए। नाला तट सौंदर्यीकरण कार्य में पहले से मौजूद बोल्डरों का ही दोबारा उपयोग कर फर्जी बिलों के माध्यम से राशि आहरित की गई।

ग्रामवासियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जांच सरपंच पति की उपस्थिति में की गई, लेकिन पंचनामा में अधिकारीयों ने यह उल्लेख नहीं किया और जानबूझकर सरपंच की उपस्थिति दर्शाकर पूरे मामले को मोड़ देने का प्रयास किया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि जांच में निष्पक्षता नहीं बरती गई और अधिकारी पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाए हुए हैं।

ग्रामवासियों ने जिला कलेक्टर कटनी से आग्रह किया है कि उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी द्वारा दोबारा जांच कराई जाए। साथ ही दोषी सरपंच, सचिव, उनके सहयोगियों तथा जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को तत्काल पद से हटाकर उनके विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए एवं गबन की गई राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए।

ग्रामवासियों ने प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो वे सभी मजबूर होकर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।

यह प्रकरण न सिर्फ पंचायत में फैले भ्रष्टाचार की भयावह तस्वीर पेश करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जब जांच ही पक्षपातपूर्ण हो, तो ग्रामीण जनता को न्याय कैसे मिलेगा। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर प्रकरण पर किस हद तक कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी बाकी फाइलों की तरह धूल खा जाएगा।


प्रधान संपादक:अज्जू सोनी,ग्रामीण खबर mp

संपर्क सूत्र:9977110734

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