सिलौंडी में श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति के साथ मनाई गई डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती।
सभी बूथों पर कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके विचारों को आत्मसात करने का लिया संकल्प।
सिलौंडी,ग्रामीण खबर mp:
आज सिलौंडी में राष्ट्रभक्ति और विचारधारा के प्रतीक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती पर विविध आयोजनों के माध्यम से श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन सिलौंडी मंडल द्वारा किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों एवं स्थानीय नागरिकों की सहभागिता रही।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के तैल चित्र पर माल्यार्पण से हुई। इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष मनीष सिंह बागरी, मंडल उपाध्यक्ष सीमा भरत शुक्ला, वरिष्ठ कार्यकर्ता प्रदीप बर्मन, बूथ अध्यक्ष गोपी मिश्रा, मणिकेश्वर राय, वीरेंद्र चक्रवर्ती, सुरेश चक्रवर्ती, सोशल मीडिया प्रभारी धीरज जैन सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रहित में किए गए योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय राजनीति में एक नए युग की नींव रखी और देश की एकता एवं अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस राष्ट्रवाद की भावना को जीवंत किया, वह आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके द्वारा दिया गया नारा "एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे" न केवल जम्मू-कश्मीर की एकता के लिए ऐतिहासिक सिद्ध हुआ, बल्कि यह भारतीय जनमानस की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व भी करता है।
कार्यक्रम में विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें उनके व्यक्तित्व, शिक्षा, राजनीतिक दृष्टिकोण और देश के प्रति समर्पण पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि मुखर्जी जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था और वे प्रारंभ से ही मेधावी, राष्ट्रवादी चिंतनधारा के समर्थक और स्पष्ट विचारों वाले व्यक्ति थे। वे न केवल शिक्षा मंत्री के रूप में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्ति थे, बल्कि उन्होंने अखिल भारतीय जनसंघ की स्थापना कर वैकल्पिक राजनीति की शुरुआत की।
इस जयंती पर सिलौंडी मंडल के अंतर्गत प्रत्येक बूथ पर कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से तैल चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके सिद्धांतों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। अनेक स्थानों पर राष्ट्रगान, देशभक्ति गीत, एवं डॉ. मुखर्जी के जीवन पर आधारित वाचन भी किया गया।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि आज देश को पुनः ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है, जो बिना किसी स्वार्थ के राष्ट्र को सर्वोपरि माने। डॉ. मुखर्जी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि विचारों से देश की दिशा बदली जा सकती है। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और युवाओं को उनके सिद्धांतों पर चलने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि अर्पित करना ही नहीं था, बल्कि डॉ. मुखर्जी के विचारों को समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं तक पहुंचाना भी रहा। इस मौके पर विशेष रूप से युवाओं से संवाद कर उनके मन में राष्ट्रप्रेम और वैचारिक प्रतिबद्धता को बल देने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे राष्ट्रवाद के इस महान पुरोधा की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाएंगे और उनकी विचारधारा को अपने जीवन में आत्मसात करेंगे।
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