उमरिया पान में मुहर्रम का पर्व उल्लास, आस्था और भाईचारे के वातावरण में मनाया गया।
हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल बना ताजिया जुलूस, कर्बला मैदान तक उमड़ा जनसैलाब, शांति व्यवस्था रही प्रभावी।
उमरिया पान,ग्रामीण खबर mp:
कटनी जिले की उप तहसील उमरिया पान में रविवार को मुस्लिम समुदाय का प्रमुख पर्व मुहर्रम पारंपरिक धार्मिक विधियों, आस्था, भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और पूर्ण शांति के वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर शहर के इमामबाड़ा से लेकर कर्बला मैदान तक पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया, जिसमें हर वर्ग के नागरिकों ने पूरे श्रद्धा और सम्मान के साथ भागीदारी निभाई।
जुलूस का प्रारंभ इमामबाड़े से हुआ, जो नगर के प्रमुख स्थलों – झंडा चौक, अथईया मोहल्ला, मचखंडा मोहल्ला, ब्योहार मोहल्ला सहित अन्य गलियों से होकर गुज़रा। रास्ते भर जुलूस में ढोल-ताशों की धुन पर बच्चों और युवाओं का उत्साह देखते ही बनता था। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और ताजिया दर्शन के लिए जगह-जगह खड़े दिखाई दिए। पूरा मार्ग श्रद्धालुओं से भरा हुआ था, जिससे एक जनसैलाब का दृश्य उत्पन्न हो गया।
जुलूस का समापन कर्बला मैदान में किया गया, जहाँ परंपरागत रूप से ताजियों को ठंडा कर हज़रत इमाम हुसैन और उनके परिजनों की कुर्बानी को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अंत में सभी उपस्थित जनों ने दुआ कर देश, समाज और मानवता के लिए अमन, शांति और सद्भाव की कामना की।
इस वर्ष मुहर्रम पर विशेष बात यह रही कि इसमें हिन्दू और मुस्लिम समुदाय ने मिलकर भाग लिया। आयोजन के दौरान हिन्दू समाज के लोगों ने भी व्यवस्थाओं में बढ़-चढ़कर सहयोग किया। यही नहीं, कई स्थानों पर व्यापारियों और समाजसेवियों द्वारा पेयजल, शरबत, व अल्पाहार की नि:शुल्क व्यवस्था की गई, जिससे सभी को राहत मिली। यह गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से भी आयोजन बेहतरीन रहा। उमरिया पान पुलिस थाना प्रभारी दिनेश तिवारी और उनकी टीम लगातार निगरानी में लगे रहे। जुलूस मार्ग पर जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा, जिससे कोई भी अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हो सकी। ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा एवं व्यवस्था की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। पुलिस बल के साथ-साथ स्थानीय युवाओं की वालंटियर टीम ने भी भीड़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
मुहर्रम के इस अवसर पर न केवल धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति हुई, बल्कि यह आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों को एक सूत्र में पिरोने वाला पर्व बनकर उभरा। उमरिया पान की धरती ने हिन्दू-मुस्लिम एकता की जो मिसाल पेश की, वह अपने आप में अनूठी रही। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा कि कैसे विविधता भरे समाज में एकता, प्रेम और भाईचारे के साथ पर्वों को मनाया जा सकता है।
आयोजन के समापन पर कर्बला में विशेष रूप से हज़रत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया गया, जिन्होंने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उपस्थित लोगों ने शांति, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। यह पर्व सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि यह एक सामाजिक सन्देश लेकर आया – कि प्रेम, करुणा और सौहार्द ही वह मूल तत्व हैं जो समाज को जोड़कर रखते हैं।
इस भव्य और सफल आयोजन ने उमरिया पान को पुनः यह सिद्ध करने का अवसर दिया कि धार्मिक विविधता के बावजूद यहाँ का समाज एक-दूसरे के पर्वों में सहभागी बनकर एकता की मिसाल पेश करता है।
ग्रामीण खबर MP से तहसील रिपोर्टर अखिलेश नामदेव की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
