पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची महिला की एंजियोप्लास्टी के बाद मौत,परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप।

 पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची महिला की एंजियोप्लास्टी के बाद मौत,परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप।

शैल्बी हॉस्पिटल में उपचार के बाद 62 वर्षीय भगवती पटेल की मौत,परिजनों ने इलाज की जरूरत,कैशलेस बीमा और करीब ढाई से तीन लाख रुपये के बिल पर उठाए सवाल,अस्पताल प्रबंधन ने कहा-गंभीर हार्ट अटैक की स्थिति में लाई गई थीं मरीज।

जबलपुर। विजयनगर स्थित शैल्बी हॉस्पिटल में उपचार के दौरान पनागर क्षेत्र के बिजोरा गांव निवासी भगवती पटेल की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकीय प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने नाराजगी जताई और इलाज, एंजियोप्लास्टी की आवश्यकता तथा अस्पताल के बिल को लेकर जवाब मांगा। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालते हुए मामले की जांच शुरू की।

परिजनों के अनुसार भगवती पटेल पेट और पीठ में दर्द की शिकायत के बाद अपने परिजनों के साथ शैल्बी हॉस्पिटल पहुंची थीं। परिजनों का कहना है कि महिला अस्पताल तक चलकर पहुंची थी और प्रारंभिक शिकायत पेट दर्द से संबंधित थी। जांच के बाद चिकित्सकों द्वारा हृदय में ब्लॉकेज बताए जाने पर एंजियोप्लास्टी किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद महिला को उपचार के लिए अस्पताल में रखा गया, लेकिन कुछ घंटे बाद उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी मृत्यु हो गई।

मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें इलाज की प्रक्रिया और एंजियोप्लास्टी की आवश्यकता को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। परिवार का यह भी आरोप है कि अस्पताल को मरीज के बीमा और कैशलेस सुविधा की जानकारी मिलने के बाद उपचार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और कुछ ही घंटों के उपचार के बाद लाखों रुपये का बिल तैयार कर दिया गया। हालांकि, बीमा के कारण ही एंजियोप्लास्टी की गई थी, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

बिल को लेकर भी विवाद सामने आया है। विभिन्न रिपोर्टों में बिल की राशि करीब ढाई लाख रुपये से लेकर तीन लाख रुपये तक बताई गई है। इसलिए वास्तविक बिल की राशि की पुष्टि अस्पताल के बिल और भुगतान संबंधी दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकेगी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से बिल की पूरी जानकारी और उपचार में किए गए प्रत्येक चिकित्सकीय हस्तक्षेप का विवरण मांगा है।

घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों और प्रबंधन से महिला की मौत के कारण को लेकर जवाब मांगा। मामले को लेकर अस्पताल परिसर में काफी देर तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। पुलिस के पहुंचने के बाद मामले को शांत कराया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार परिजन मामले की शिकायत संबंधित स्तरों पर करने की तैयारी में हैं।

वहीं अस्पताल की ओर से लगाए गए आरोपों पर अलग पक्ष सामने आया है। अस्पताल के चिकित्सकीय पक्ष के अनुसार मरीज गंभीर स्थिति में अस्पताल लाई गई थीं और हृदय संबंधी जांच में गंभीर समस्या सामने आई थी। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि एंजियोप्लास्टी सफल रही और मरीज को बचाने के लिए चिकित्सकों ने पूरा प्रयास किया, लेकिन उपचार के बाद उन्हें गंभीर हार्ट अटैक की जटिलता का सामना करना पड़ा और उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल प्रबंधन ने इलाज में जानबूझकर लापरवाही या गलत उपचार के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि मरीज की प्रारंभिक चिकित्सकीय स्थिति क्या थी, जांच में वास्तव में किस प्रकार का हृदय संबंधी अवरोध पाया गया, एंजियोप्लास्टी की चिकित्सकीय आवश्यकता क्या थी और उपचार के दौरान किन-किन प्रक्रियाओं को अपनाया गया। इन सवालों का स्पष्ट उत्तर मेडिकल रिकॉर्ड, ईसीजी, एंजियोग्राफी रिपोर्ट, उपचार संबंधी दस्तावेज और चिकित्सकीय विशेषज्ञों की जांच से ही सामने आ सकता है।

मामले में परिजनों के आरोपों और अस्पताल के पक्ष के बीच अंतर होने के कारण किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच होती है तो मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज, बिलिंग विवरण, बीमा संबंधी दस्तावेज तथा चिकित्सकीय रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि शैल्बी हॉस्पिटल जबलपुर विजयनगर क्षेत्र में स्थित है और जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी अस्पताल का पता दर्ज है। अस्पताल की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यहां कार्डियक साइंसेज सहित विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।

फिलहाल भगवती पटेल की मौत को लेकर उठे सवालों का अंतिम उत्तर जांच और उपलब्ध चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर ही सामने आ सकेगा। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज की जान बचाने के लिए चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप उपचार किया गया और गंभीर हृदय संबंधी जटिलता के कारण उनकी मृत्यु हुई।

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