उपेक्षा का शिकार ढीमरखेड़ा-सिलोड़ी मार्ग,झाड़ियों से अंधे मोड़ और जलजमाव से बढ़ा हादसों का खतरा।
पिंडरई गांव में नाली निर्माण नहीं होने से सड़क पर जमा हो रहा पानी,ग्रामीणों ने जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की दी चेतावनी।
ढीमरखेड़ा। लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित ढीमरखेड़ा से बिरासन पाली होते हुए सिलोड़ी जाने वाला महत्वपूर्ण मार्ग इन दिनों बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार नजर आ रहा है। सड़क किनारे उगी घनी झाड़ियों और अनियंत्रित पेड़-पौधों के कारण मार्ग कई स्थानों पर संकरा हो गया है। वहीं, पिंडरई गांव के भीतर जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से सड़क पर पानी जमा रहने के कारण ग्रामीणों, राहगीरों और स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं को लेकर स्थानीय लोगों में जिम्मेदार विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार कुछ वर्षों पहले तक लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क के दोनों ओर नियमित रूप से झाड़ियों और अनावश्यक पेड़-पौधों की कटाई-छंटाई कराई जाती थी। इससे वाहन चालकों को सड़क के दोनों ओर पर्याप्त दृश्यता मिलती थी और आवागमन भी सुरक्षित रहता था। लेकिन लंबे समय से सड़क किनारे सफाई और झाड़ियों की छंटाई का कार्य नहीं होने के कारण स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
मार्ग के कई हिस्सों में झाड़ियां सड़क की ओर फैल गई हैं, जिससे सड़क का उपयोगी हिस्सा भी प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से अंधे और खतरनाक मोड़ों पर झाड़ियों के कारण सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते। ऐसे स्थानों पर तेज गति से आने वाले वाहनों के साथ दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मार्ग पर लगातार आवागमन होने के बावजूद सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक साफ-सफाई नहीं कराई जा रही है।
पिंडरई गांव में जल निकासी बनी बड़ी समस्या
ढीमरखेड़ा-सिलोड़ी मार्ग पिंडरई गांव के बीच से होकर गुजरता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण से जुड़े कार्य के दौरान गांव के भीतर पर्याप्त नाली निर्माण नहीं कराया गया, जिसके कारण बरसात के दिनों में पानी की निकासी नहीं हो पाती। ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला बरसाती तथा गंदा पानी सड़क पर ही जमा हो जाता है।
सड़क पर पानी जमा होने से पैदल चलने वालों के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी होती है। सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को उठानी पड़ रही है। जलभराव के कारण उन्हें सड़क के किनारे से निकलने में कठिनाई होती है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
ग्रामीणों ने कई बार उठाई समस्या
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की साफ-सफाई, झाड़ियों की कटाई और पिंडरई में जल निकासी की व्यवस्था को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को आवेदन और शिकायतें दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बाद कुछ समय तक समस्या के समाधान की उम्मीद बंधती है, लेकिन मौके पर आवश्यक कार्रवाई नहीं होने से स्थिति फिर जस की तस हो जाती है।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद संबंधित ठेकेदार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि प्रशासन और ठेकेदार की कथित मिलीभगत के चलते सड़क से जुड़ी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच कराने और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि ढीमरखेड़ा-सिलोड़ी मार्ग के दोनों ओर तत्काल झाड़ियों की कटाई-छंटाई कराई जाए, खतरनाक मोड़ों पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और पिंडरई गांव में जल निकासी के लिए नाली निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
अब देखना यह है कि ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद लोक निर्माण विभाग और प्रशासन इस महत्वपूर्ण मार्ग की बदहाली को लेकर कब तक ठोस कदम उठाते हैं। सड़क की नियमित सफाई, खतरनाक मोड़ों की दृश्यता और पिंडरई में जल निकासी की व्यवस्था बहाल करना क्षेत्रवासियों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।


