ग्राम पंचायत पाली में बनी सीसी रोड छह माह में बदहाल,निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल।

 ग्राम पंचायत पाली में बनी सीसी रोड छह माह में बदहाल,निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल।

शिकायतों के बावजूद नहीं हुई जांच,ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

ढीमरखेड़ा। जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत ग्राम पंचायत पाली में निर्माणाधीन एवं हाल ही में बनाई गई सीसी रोड की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये की लागत से कराए गए सीसी रोड निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई, जिसके चलते निर्माण के महज पांच से छह माह के भीतर ही सड़क खराब होने लगी है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत पाली में सीसी रोड निर्माण के दौरान ही सड़क की गुणवत्ता को लेकर संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई थी। उनका आरोप है कि सड़क की मोटाई और निर्माण प्रक्रिया में निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के बीच वाले हिस्से में अपेक्षाकृत कम ढलाई की गई, जबकि किनारों पर अधिक ढलाई दिखाई दी। निर्माण के समय ही इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए थे, लेकिन शिकायतों के बावजूद निर्माण कार्य की प्रभावी जांच नहीं की गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि सीसी रोड निर्माण के दौरान जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी यजुर्वेन्द्र कोरी को दो-तीन बार शिकायत कर सड़क की गुणवत्ता की जांच कराने का आग्रह किया गया था। इसके बावजूद अब तक सड़क की गुणवत्ता की कोई स्पष्ट जांच सामने नहीं आई है और न ही संबंधित सरपंच, सचिव अथवा निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियर की जिम्मेदारी तय की गई है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप कराया गया था, तो महज पांच से छह महीने में सड़क की स्थिति खराब क्यों होने लगी? वहीं यदि निर्माण में किसी प्रकार की तकनीकी अनियमितता या गुणवत्ता में कमी थी, तो शिकायत मिलने के बाद समय रहते उसकी जांच क्यों नहीं कराई गई? ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी सीधे तौर पर आम जनता के हितों को प्रभावित करती है।

ग्रामीणों ने कहा कि सरकार गांवों के विकास और बेहतर आवागमन के लिए बड़ी राशि खर्च करती है। यदि निर्माण कार्य कुछ ही महीनों में खराब हो जाएं तो इससे न केवल शासन की राशि का दुरुपयोग होता है, बल्कि ग्रामीणों को भी दोबारा उसी समस्या का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे बेहतर तो सड़क का निर्माण ही न किया जाए, कम से कम सरकारी धन की बर्बादी तो नहीं होगी।

मामले को लेकर अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए ग्राम पंचायत पाली में निर्मित सीसी रोड की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की वास्तविक मोटाई, इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री, गुणवत्ता, माप पुस्तिका, स्वीकृत लागत और निर्माण कार्य से संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए। साथ ही मौके पर तकनीकी टीम भेजकर सड़क की वर्तमान स्थिति का परीक्षण कराया जाए, ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच में यदि निर्माण कार्य में अनियमितता अथवा लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित सरपंच, सचिव, इंजीनियर सहित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय कर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही खराब हो चुकी सड़क की आवश्यक मरम्मत या पुनर्निर्माण जिम्मेदारों से कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी न हो।

ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच केवल एक सड़क की गुणवत्ता का मामला नहीं है, बल्कि इससे गांव में होने वाले अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी विश्वास कायम होगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच कराता है और यदि अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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