उमरिया पान की आंगनबाड़ी केंद्र के आसपास गंदगी का अंबार,जिम्मेदार मौन; मासूम बच्चों पर संक्रमण का खतरा।

 उमरिया पान की आंगनबाड़ी केंद्र के आसपास गंदगी का अंबार,जिम्मेदार मौन; मासूम बच्चों पर संक्रमण का खतरा।

उमरिया पान में सफाई व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल,बस स्टैंड से लेकर नालियों तक बदहाली का आलम।

उमरिया पान। कटनी जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शुमार उमरिया पान इन दिनों अपनी बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। एक ओर जहां सफाई व्यवस्था के नाम पर लगातार खर्च होने की बातें सामने आती हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती नजर आ रही है। गांव के कई हिस्सों में जगह-जगह गंदगी, कचरे के ढेर और जाम नालियां ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि आंगनबाड़ी केंद्र के आसपास भी गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जहां छोटे-छोटे बच्चे रोजाना पहुंचते हैं।

आंगनबाड़ी केंद्र के आसपास जमा गंदगी और कचरे को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सफाई व्यवस्था किस स्तर पर संचालित हो रही है। जिन मासूम बच्चों के स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण को लेकर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, उन्हीं बच्चों को गंदगी के बीच आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचना पड़ रहा है। गंदगी के कारण मच्छर और अन्य संक्रमण फैलाने वाले जीव पनपने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

ग्रामीणों का आरोप है कि उमरिया पान में सफाई व्यवस्था कागजों और बिलों तक सीमित होकर रह गई है। धरातल पर नियमित सफाई दिखाई नहीं देती। गांव के सार्वजनिक स्थानों की स्थिति भी इस दावे पर सवाल खड़े करती नजर आती है। उमरिया पान को चारों तरफ से जोड़ने वाले बस स्टैंड क्षेत्र में भी कचरे के ढेर और गंदगी की समस्या दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों के लिए परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। थोड़ी सी बारिश होते ही नालियों का गंदा पानी और कचरा सड़कों एवं मकानों के सामने जमा होने लगता है। ग्रामीणों के मुताबिक कैलाश ताम्रकार, प्रदीप ताम्रकार एवं बल्लू विश्वकर्मा के मकानों के सामने बारिश के पानी के साथ नालियों की गंदगी जमा होने से आवागमन और रहवासियों की परेशानी बढ़ जाती है।

सवाल यह है कि जब गांव में सफाई व्यवस्था के लिए जिम्मेदार तंत्र मौजूद है, तो आखिर नियमित सफाई क्यों नहीं हो पा रही है? आंगनबाड़ी जैसे संवेदनशील स्थान के आसपास गंदगी का जमा होना जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। आखिर छोटे बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता की जिम्मेदारी किसकी है?

उमरिया पान के ग्रामीण अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि सफाई व्यवस्था के नाम पर होने वाले खर्च का वास्तविक लाभ उन्हें कब मिलेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लेंगे या फिर गंदगी के बीच ही ग्रामीणों को अपनी समस्याओं से जूझना पड़ेगा?

फिलहाल उमरिया पान की तस्वीर यही कह रही है कि सफाई व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच लंबा फासला है। आंगनबाड़ी केंद्र के आसपास पसरी गंदगी इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू है, क्योंकि यहां मामला सिर्फ सफाई का नहीं बल्कि मासूम बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण का भी है।

ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग तत्काल आंगनबाड़ी केंद्र के आसपास विशेष सफाई अभियान चलाए, नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए और सार्वजनिक स्थानों से कचरा हटाकर स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। अब देखना होगा कि जिम्मेदार इस गंभीर समस्या पर कब तक मौन रहते हैं और उमरिया पान को गंदगी से निजात दिलाने के लिए धरातल पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

नोट: स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभाग या पंचायत के आधिकारिक पक्ष से किया जाना शेष है। संबंधित जिम्मेदारों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है।

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