दतिया उपचुनाव के बाद कांग्रेस में खुलकर फूटी अंदरूनी कलह,प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर भाजपा से मिलकर भीतरघात और फंडिंग लेने के लगाए गंभीर आरोप,भारती ने भी किया जोरदार पलटवार।

 दतिया उपचुनाव के बाद कांग्रेस में खुलकर फूटी अंदरूनी कलह,प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर भाजपा से मिलकर भीतरघात और फंडिंग लेने के लगाए गंभीर आरोप,भारती ने भी किया जोरदार पलटवार।

दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप से मचा सियासी भूचाल,पार्टी संगठन में बढ़ी हलचल,कांग्रेस नेतृत्व से कार्रवाई की मांग के बीच विवाद ने पकड़ा तूल।


दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी रहे घनश्याम सिंह और कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के बीच सार्वजनिक रूप से लगाए गए गंभीर आरोपों ने जिले की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर भाजपा से सांठगांठ, भीतरघात और चुनावी फंडिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस संगठन की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं और राजनीतिक गलियारों में इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर आरोप लगाया कि उन्होंने उपचुनाव के दौरान भाजपा नेताओं के साथ मिलकर कांग्रेस के खिलाफ भीतरघात किया। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान पार्टी प्रत्याशी को कमजोर करने के उद्देश्य से कई स्तरों पर काम किया गया, जिससे कांग्रेस को चुनावी नुकसान उठाना पड़ा। घनश्याम सिंह ने आरोप लगाया कि राजेंद्र भारती ने भाजपा नेताओं के साथ मिलकर चुनावी रणनीति बनाई और इसके बदले आर्थिक लाभ भी लिया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो पार्टी नेतृत्व को राजेंद्र भारती के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।

घनश्याम सिंह ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से यह भी मांग की कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि कार्यकर्ताओं का विश्वास संगठन में बना रहे। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्त निर्णय नहीं लिया गया तो इसका असर भविष्य के चुनावों पर भी पड़ सकता है।

दूसरी ओर, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए पलटवार किया है। एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि घनश्याम सिंह पहले वर्ष 2013, 2018 और 2023 के विधानसभा चुनावों का रिकॉर्ड देख लें। उन्होंने आरोप लगाया कि उन चुनावों में स्वयं घनश्याम सिंह की गतिविधियों से भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को राजनीतिक लाभ मिला था।

राजेंद्र भारती ने मीडिया के माध्यम से कई सवाल उठाते हुए कहा कि यह भी सार्वजनिक होना चाहिए कि चुनाव लड़ने के लिए किससे आर्थिक सहयोग लिया गया और चुनावी अभियान में किन लोगों की भूमिका रही। उन्होंने दावा किया कि भाजपा से जुड़े लोगों ने घनश्याम सिंह के चुनाव में सक्रिय सहयोग किया। भारती ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान करोड़ों रुपये की फंडिंग पहुंचाई गई तथा भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी उनके पक्ष में काम किया। उन्होंने बंटी गौतम का नाम लेते हुए भी गंभीर आरोप लगाए और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।

दोनों नेताओं के बीच छिड़ी इस बयानबाजी ने कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी को सार्वजनिक मंच पर ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनाव के परिणाम के बाद हार की समीक्षा के बजाय पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जिससे संगठन की छवि प्रभावित हो सकती है। कार्यकर्ताओं के बीच भी इस विवाद को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं और संगठन के भीतर असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने समय रहते इस विवाद का समाधान नहीं निकाला तो इसका असर आने वाले स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संगठन जल्द ही दोनों पक्षों से जवाब-तलब कर सकता है।

दतिया की राजनीति में इस समय यह विवाद चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। दोनों नेताओं के एक-दूसरे पर लगाए गए आरोपों ने न केवल कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी को उजागर किया है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है और संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है।

उल्लेखनीय है कि दोनों नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप सार्वजनिक बयानों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित मामलों में किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा आधिकारिक निष्कर्ष जारी किया गया है। इसलिए अंतिम स्थिति किसी संभावित जांच या पार्टी के आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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