पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर का भारत पर तीखा बयान,सिंधु जल संधि पर "सभी आवश्यक कदम" उठाने की चेतावनी।
पानी के मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा,टीटीपी को भारत से समर्थन मिलने का लगाया आरोप,भारत पहले ही आरोपों को कर चुका है खारिज।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने सिंधु जल संधि (इंडस वाटर्स ट्रीटी) को लेकर भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि और सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दों पर तनाव लगातार बना हुआ है।
रावलपिंडी में आयोजित कॉर्प्स कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के बाद जारी आधिकारिक बयान में जनरल मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान अपने जल अधिकारों की रक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतेगा। उन्होंने कहा कि देश के हिस्से के पानी की सुरक्षा पाकिस्तान की प्राथमिकता है और आवश्यकता पड़ने पर हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।
अपने संबोधन के दौरान असीम मुनीर ने पाकिस्तान में बढ़ रही आतंकी घटनाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे आतंकी संगठनों को भारत से समर्थन मिल रहा है, जिसके कारण पाकिस्तान की धरती पर हिंसक घटनाएं हो रही हैं। हालांकि भारत ने पहले भी ऐसे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार और तथ्यहीन बताया है।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर मतभेद लगातार बढ़े हैं। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि को पूर्ववत लागू करना संभव नहीं है। भारत ने अपने रुख में यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
दूसरी ओर पाकिस्तान लगातार यह दावा करता रहा है कि सिंधु जल संधि एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है और इसका पालन दोनों देशों की जिम्मेदारी है। पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति भी पहले यह कह चुकी है कि यदि उसके हिस्से के पानी को रोका गया या मोड़ा गया तो वह इसे अत्यंत गंभीर विषय मानेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि दशकों तक भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे स्थिर समझौतों में से एक रही है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देशों के संबंधों में आई तल्खी का असर इस संधि पर भी दिखाई दे रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से निकालना ही सबसे व्यावहारिक और स्थायी विकल्प माना जाता है।
फिलहाल असीम मुनीर के इस बयान ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों और सिंधु जल संधि को लेकर नई राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा छेड़ दी है। दोनों देशों की आगे की रणनीति और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर बनी हुई है।

