पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव,क्या दक्षिण एशिया एक नए संघर्ष की ओर?

 पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव,क्या दक्षिण एशिया एक नए संघर्ष की ओर?

लगातार सैन्य झड़पों और आरोप-प्रत्यारोप से क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ी चिंता,विशेषज्ञ बोले-स्थिति गंभीर,लेकिन औपचारिक युद्ध की घोषणा नहीं।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

भारत के पड़ोस में स्थित पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लगातार बढ़ता तनाव एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता का कारण बन गया है। दोनों देशों के बीच सीमा पर बीते कई महीनों से लगातार झड़पें, हवाई हमले, गोलाबारी और तीखी बयानबाज़ी देखने को मिल रही है। हालांकि अभी तक किसी भी देश ने औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा नहीं की है, लेकिन हालात पहले की तुलना में अधिक संवेदनशील माने जा रहे हैं।

पाकिस्तान का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के लड़ाके अफगानिस्तान की सीमा में सुरक्षित ठिकानों का उपयोग कर पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों को अंजाम दे रहे हैं। इसी आधार पर पाकिस्तान कई बार सीमा पार सैन्य कार्रवाई और हवाई हमले कर चुका है। दूसरी ओर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए पाकिस्तान पर अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करने तथा निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाती रही है।

सीमा पर कई स्थानों पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच गोलीबारी और जवाबी कार्रवाई की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं में सैनिकों और आम नागरिकों के हताहत होने की भी खबरें मिलती रही हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है, जिससे कूटनीतिक संबंध भी प्रभावित हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद का सबसे बड़ा कारण सीमा सुरक्षा, आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा अविश्वास है। डूरंड रेखा को लेकर भी दोनों देशों के बीच वर्षों पुराना विवाद बना हुआ है, जो समय-समय पर तनाव को और बढ़ा देता है।

यदि सैन्य शक्ति की बात की जाए तो पाकिस्तान के पास आधुनिक वायुसेना, टैंक, मिसाइल प्रणाली और बड़ी नियमित सेना मौजूद है। वहीं अफगान तालिबान के पास सीमित आधुनिक सैन्य संसाधन हैं, लेकिन उसे पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे समय तक संघर्ष करने का अनुभव प्राप्त है। यही कारण है कि किसी भी संभावित संघर्ष को आसान नहीं माना जा सकता।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझाने की अपील कर रहा है। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता रहा और कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। हालांकि वर्तमान समय में दोनों देशों के बीच पूर्ण युद्ध की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्ष व्यापक युद्ध से बचने का प्रयास भी कर रहे हैं।

भारत के दृष्टिकोण से भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों ही भारत के पड़ोसी देश हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर दक्षिण एशिया की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बनी हुई हैं और आने वाले दिनों में दोनों देशों की रणनीति पर वैश्विक समुदाय की पैनी निगाह रहेगी।

Post a Comment

Previous Post Next Post