110 साल पुराने दस्तावेजों के साथ मंत्री प्रतिमा बागरी ने रखा पक्ष,जाति प्रमाणपत्र विवाद में राज्य स्तरीय समिति ने पूरी की सुनवाई।
वंशावली,पुराने अभिलेख और आपत्तिकर्ताओं के दस्तावेज भी हुए प्रस्तुत,जांच समिति ने फैसला सुरक्षित रखा।
भोपाल,ग्रामीण खबर MP।
मध्य प्रदेश की नगरीय प्रशासन एवं विकास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाणपत्र से जुड़े विवाद की सुनवाई राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति के समक्ष संपन्न हुई। इस दौरान मंत्री प्रतिमा बागरी ने अपने पक्ष में लगभग 110 वर्ष पुराने दस्तावेज, वंशावली तथा अन्य अभिलेख समिति के समक्ष प्रस्तुत किए। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार सहित अन्य आपत्तिकर्ताओं ने भी अपने दस्तावेज एवं आपत्तियां समिति के समक्ष रखीं। सुनवाई पूरी होने के बाद समिति ने मामले में निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
सुनवाई के दौरान प्रतिमा बागरी ने समिति के समक्ष कहा कि वे बागरी समाज से संबंध रखती हैं, जिसे मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने अपने परिवार की कई पीढ़ियों से संबंधित वंशावली, पुराने राजस्व अभिलेख तथा अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि उनका जाति प्रमाणपत्र पूरी तरह वैध है और सभी आवश्यक नियमों के अनुरूप जारी किया गया है।
सुनवाई के बाद मीडिया से चर्चा में मंत्री प्रतिमा बागरी ने जांच प्रक्रिया को लेकर नाराजगी भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान गांव में मुनादी कराई गई और उनके परिवार के साथ ऐसा व्यवहार किया गया, मानो उन्होंने कोई गंभीर अपराध किया हो। उनका कहना था कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और किसी भी नागरिक की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।
दूसरी ओर शिकायतकर्ता एवं कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने समिति के समक्ष अपने तर्क और दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने अपने द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में उपलब्ध अभिलेख समिति को सौंपे। पन्ना और सतना जिले से जुड़े कुछ अन्य आपत्तिकर्ताओं ने भी अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर मंत्री के जाति प्रमाणपत्र पर आपत्ति दर्ज कराई।
जानकारी के अनुसार सुनवाई राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति के अध्यक्ष एवं प्रमुख सचिव गुलशन बामरा की अध्यक्षता में हुई। समिति में सचिव सत्येंद्र सिंह तथा विषय विशेषज्ञ मातादीन कनेरिया और सुधीर श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे। समिति ने दोनों पक्षों की दलीलें, दस्तावेज और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया तथा आवश्यक जानकारी दर्ज की।
मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह एक संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। जाति प्रमाणपत्र की वैधता का अंतिम निर्णय राज्य स्तरीय छानबीन समिति द्वारा दस्तावेजों, अभिलेखों और लागू नियमों के परीक्षण के आधार पर किया जाएगा।
फिलहाल समिति ने इस मामले में कोई अंतिम निर्णय या निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है। दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने के बाद अब समिति उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण करेगी, जिसके बाद अपना निर्णय जारी करेगी। ऐसे में वर्तमान स्थिति में यह कहना उचित नहीं होगा कि मंत्री प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाणपत्र सही है या गलत। अंतिम स्थिति समिति के आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस मामले पर प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक हलकों की भी नजर बनी हुई है। समिति के अंतिम फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तुत दस्तावेजों और आपत्तियों के आधार पर क्या निष्कर्ष निकलता है। तब तक यह मामला जांच और विधिक प्रक्रिया के अधीन माना जाएगा।

