भारत की वायु सुरक्षा को बड़ी मजबूती,रूस से S-400 ‘सुदर्शन चक्र’की चौथी खेप पहुंचनी शुरू।
लंबे इंतजार के बाद मिली बड़ी रक्षा उपलब्धि,पश्चिमी सीमा की सुरक्षा होगी और मजबूत,पांचवीं रेजिमेंट का भी रास्ता साफ।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
भारत की वायु रक्षा क्षमता को एक बार फिर बड़ी मजबूती मिलने जा रही है। रूस से अत्याधुनिक S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम, जिसे भारत में ‘सुदर्शन चक्र’ के नाम से भी जाना जाता है, की चौथी खेप भारत पहुंचनी शुरू हो गई है। रक्षा सूत्रों के अनुसार इस रेजिमेंट की पहली खेप 3 जून को भारत पहुंची, जबकि आने वाले दिनों में पूरा सिस्टम चरणबद्ध तरीके से देश में पहुंच जाएगा। इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा।
यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब विश्व के कई हिस्सों में सैन्य तनाव और मिसाइल हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे माहौल में भारत की वायु सुरक्षा प्रणाली का और अधिक मजबूत होना राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और रूस के बीच वर्ष 2018 में लगभग 5.43 अरब अमेरिकी डॉलर के रक्षा समझौते के तहत पांच S-400 रेजिमेंट की खरीद का अनुबंध हुआ था। इस समझौते को भारत की रक्षा तैयारियों के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण रक्षा सौदों में से एक माना जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण इस परियोजना में कुछ देरी अवश्य हुई, लेकिन अब चौथी रेजिमेंट की आपूर्ति शुरू होने से भारत की सुरक्षा तैयारियों को नया बल मिला है।
S-400 ट्रायम्फ को दुनिया की सबसे उन्नत और प्रभावी एयर डिफेंस प्रणालियों में गिना जाता है। यह प्रणाली दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों को लंबी दूरी से पहचानकर उन्हें नष्ट करने की क्षमता रखती है। इसकी अत्याधुनिक रडार प्रणाली एक साथ सैकड़ों लक्ष्यों पर नजर रख सकती है तथा कई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाने में सक्षम है।
विशेषज्ञों के अनुसार S-400 की सबसे बड़ी ताकत इसकी बहुस्तरीय सुरक्षा क्षमता है। यह प्रणाली अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर आने वाले खतरों को पहचानकर उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई कर सकती है। इसकी निगरानी क्षमता लगभग 600 किलोमीटर तक मानी जाती है, जबकि यह 400 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद हवाई खतरों को निशाना बना सकती है। यही कारण है कि इसे विश्व की सबसे भरोसेमंद और घातक वायु रक्षा प्रणालियों में शामिल किया जाता है।
पिछले वर्ष भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा संचालित ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी S-400 प्रणाली की क्षमताओं ने व्यापक चर्चा बटोरी थी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रणाली ने भारत की वायु सुरक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसकी प्रभावशीलता को देखते हुए इसे भारतीय रक्षा व्यवस्था का प्रमुख सुरक्षा कवच माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार चौथी रेजिमेंट की संभावित तैनाती पश्चिमी सीमा क्षेत्र में की जा सकती है, जहां से भारत को पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि सरकार या सेना की ओर से तैनाती के सटीक स्थान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती भारत की सामरिक क्षमता को और अधिक मजबूत करेगी तथा किसी भी संभावित हवाई खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में मदद करेगी।
भारत को अब तक S-400 की तीन रेजिमेंट प्राप्त हो चुकी हैं और वे विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं। चौथी रेजिमेंट के आने के बाद देश का वायु रक्षा नेटवर्क और अधिक व्यापक एवं मजबूत हो जाएगा। इसके अलावा पांचवीं और अंतिम रेजिमेंट की आपूर्ति भी आगामी महीनों में पूरी होने की संभावना जताई जा रही है।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में किसी भी देश की सुरक्षा केवल उसकी आक्रामक सैन्य शक्ति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि मजबूत रक्षा कवच भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। S-400 जैसी उन्नत प्रणाली भारत को संभावित हवाई हमलों से सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ रणनीतिक बढ़त भी देती है।
चौथी S-400 रेजिमेंट की आपूर्ति शुरू होना भारत की रक्षा तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल भारतीय वायु रक्षा तंत्र और अधिक मजबूत होगा, बल्कि देश की सामरिक शक्ति में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। आने वाले समय में जब पांचों रेजिमेंट पूरी तरह से परिचालन में आ जाएंगी, तब भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा जिनके पास अत्याधुनिक बहुस्तरीय वायु रक्षा कवच उपलब्ध है।
इस नई उपलब्धि के साथ भारत ने एक बार फिर स्पष्ट संकेत दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के लिए वह आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के विकास एवं अधिग्रहण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

