ड्रोन युद्ध के युग में भारत की बड़ी तैयारी,सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में तेज कदम।
रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों से मिले सबक के बाद भारत ने बढ़ाया फोकस,स्वदेशी ड्रोन निर्माण और आधुनिक युद्ध तकनीक पर विशेष जोर।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।।
आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप ने दुनिया भर की सेनाओं की रणनीतियों को नई दिशा दी है। कभी युद्ध के मैदान में टैंकों, लड़ाकू विमानों और भारी तोपों का दबदबा माना जाता था, लेकिन अब ड्रोन तकनीक ने युद्ध की तस्वीर बदल दी है। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों तक, ड्रोन ने जिस प्रकार अपनी प्रभावशीलता साबित की है, उसने दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियों को भी अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। इसी क्रम में भारत भी अब ड्रोन आधारित सैन्य क्षमताओं को तेजी से विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया कि अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन भी दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, हथियार प्रणालियों और रणनीतिक संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। इसी प्रकार पश्चिम एशिया में विभिन्न संघर्षों के दौरान भी ड्रोन तकनीक ने युद्ध संचालन में निर्णायक भूमिका निभाई है। इन घटनाओं ने विश्वभर के रक्षा तंत्रों का ध्यान ड्रोन युद्ध क्षमता की ओर आकर्षित किया है।
भारत ने भी बीते कुछ वर्षों में सैन्य ड्रोन, निगरानी ड्रोन, आत्मघाती ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों के विकास एवं खरीद पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा स्वदेशी कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे देश में अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक विकसित की जा सके। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में भारतीय सेना के विभिन्न सैन्य गठन ड्रोन आधारित युद्ध प्रणाली से और अधिक सशक्त होंगे।
हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी ड्रोन तकनीक की उपयोगिता व्यापक रूप से सामने आई। इस अभियान में निगरानी, लक्ष्य की पहचान और सटीक जानकारी जुटाने में ड्रोन ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। आधुनिक तकनीकों और विभिन्न सैन्य संसाधनों के समन्वित उपयोग के माध्यम से सुरक्षा बलों ने अपने अभियान को प्रभावी ढंग से अंजाम दिया। रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि भविष्य के अभियानों में ड्रोन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।
भारतीय सेना अब सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी क्षमता बढ़ाने, दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने तथा आवश्यक होने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए उन्नत ड्रोन तकनीकों को शामिल कर रही है। इसके साथ ही एंटी-ड्रोन सिस्टम पर भी कार्य किया जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते मुकाबला किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ड्रोन तकनीक आधुनिक युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण हथियार बन सकती है। ऐसे में भारत का इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाना और स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता देना राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में बढ़ती तकनीकी क्षमता न केवल देश की सैन्य शक्ति को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी नई पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत की यह रणनीति स्पष्ट संकेत देती है कि देश भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपनी सैन्य तैयारियों को नई तकनीकों के अनुरूप ढाल रहा है। ड्रोन आधारित युद्ध प्रणाली की दिशा में उठाए जा रहे कदम आने वाले समय में भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

