अशोक गहलोत का बड़ा बयान,“देश हिंदू राष्ट्र बन चुका,सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी”।
पूर्व मुख्यमंत्री ने BJP-RSS पर साधा निशाना,कांग्रेस की नरम नीति को बताया संघ के विस्तार की बड़ी वजह।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने हिंदू राष्ट्र, भारतीय राजनीति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बढ़ते प्रभाव को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। उनके बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। गहलोत ने कहा कि देश मौजूदा परिस्थितियों में व्यवहारिक रूप से हिंदू राष्ट्र बन चुका है और अब केवल इसकी औपचारिक घोषणा होना बाकी है।
अशोक गहलोत ने कहा कि देश में ऐसा माहौल तैयार किया गया है, जहां अन्य धर्मों के लोगों पर लगातार दबाव महसूस कराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में अल्पसंख्यक समुदायों के भीतर असुरक्षा की भावना बढ़ी है। उनके अनुसार धार्मिक आधार पर राजनीति ने सामाजिक ताने-बाने को कमजोर किया है और देश की बहुलतावादी पहचान को चुनौती दी है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर Rashtriya Swayamsevak Sangh और Bharatiya Janata Party पर निशाना साधते हुए कहा कि इन संगठनों का प्रभाव लगातार बढ़ता गया और इसके पीछे कांग्रेस की नरम रणनीति भी जिम्मेदार रही। उन्होंने कहा कि यदि Indian National Congress ने समय रहते संघ की विचारधारा का अधिक सख्ती से मुकाबला किया होता, तो आज स्थिति अलग हो सकती थी।
गहलोत ने आत्मालोचनात्मक अंदाज में स्वीकार किया कि कांग्रेस ने कई मौकों पर अपेक्षित कठोरता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सॉफ्ट एप्रोच के कारण ही RSS को विस्तार का पर्याप्त अवसर मिला और संगठन ने अपने 100 वर्षों का सफर इतनी मजबूती से पूरा किया। उनका मानना है कि वैचारिक स्तर पर लगातार सक्रिय रहने के कारण संघ ने समाज के बड़े हिस्से पर प्रभाव स्थापित किया।
अपने बयान के दौरान गहलोत ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री Indira Gandhi का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं, तो धर्म आधारित राजनीति के खिलाफ कहीं अधिक सख्त कदम उठाए जाते। उन्होंने यह तक कहा कि इंदिरा गांधी ऐसी राजनीति करने वाली ताकतों के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटतीं।
गहलोत के बयान के सामने आते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। भाजपा नेताओं ने उनके बयान को कांग्रेस की निराशा और वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित बताया। भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस लंबे समय से समाज को धर्म और जाति के आधार पर बांटने की राजनीति करती रही है और अब जनता के बीच समर्थन घटने के कारण ऐसे बयान दिए जा रहे हैं।
वहीं कांग्रेस के भीतर भी इस बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ नेताओं ने गहलोत की बातों को वैचारिक चेतावनी बताया, जबकि कुछ ने इसे व्यक्तिगत राय करार दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत का बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि देश के वर्तमान वैचारिक संघर्ष पर गंभीर सवाल भी खड़ा करता है।
फिलहाल अशोक गहलोत के इस बयान ने हिंदू राष्ट्र, धर्मनिरपेक्षता और भारतीय लोकतंत्र की दिशा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और भी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

