जैविक खेती की मिसाल बने किसान हरेंद्र सिंह बागरी,बिना रासायनिक खाद के कर रहे बेहतर उत्पादन।
कटनी कृषि विभाग के अधिकारियों ने किया खेतों का निरीक्षण,मूंगफली,तिल और मक्का की फसलों की सराहना,साप्ताहिक बाजार में जैविक उत्पाद बेचकर कमा रहे अच्छा लाभ।
सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP।
ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत ग्राम अतरसूमा के प्रगतिशील किसान हरेंद्र सिंह बागरी आज क्षेत्र में जैविक खेती की एक सफल मिसाल बनकर उभरे हैं। रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के उपयोग से दूरी बनाकर वे पूरी तरह जैविक पद्धति से खेती कर रहे हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
किसान हरेंद्र सिंह बागरी द्वारा अपने खेतों में मूंगफली, तिल, मक्का सहित विभिन्न फसलों का उत्पादन जैविक विधि से किया जा रहा है। उनकी मेहनत और नवाचार को देखने एवं फसलों की प्रगति का आकलन करने के लिए उपसंचालक कृषि कटनी अरुणिमा सेन आयंगर तथा सहायक संचालक कृषि डॉ. रामनाथ पटेल ने उनके खेत का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मूंगफली प्रदर्शन प्लॉट सहित अन्य फसलों की स्थिति का अवलोकन किया और किसान द्वारा अपनाई जा रही जैविक खेती की तकनीकों की सराहना की।
अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती रासायनिक खेती के बीच जैविक खेती पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने तथा मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसान हरेंद्र सिंह बागरी द्वारा अपनाया गया यह मॉडल अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक है।
हरेंद्र सिंह बागरी केवल फसलों का उत्पादन ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने खेतों में उगाई गई जैविक सब्जियों एवं अन्य कृषि उत्पादों को स्थानीय साप्ताहिक बाजार में विक्रय कर अच्छी आय भी अर्जित कर रहे हैं। उनके उत्पादों की मांग उपभोक्ताओं के बीच लगातार बढ़ रही है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से भी लाभ मिल रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक के साथ जैविक खेती को अपनाएं तो उत्पादन लागत में कमी के साथ-साथ बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद प्राप्त किए जा सकते हैं। हरेंद्र सिंह बागरी ने अपने अनुभव और परिश्रम से यह सिद्ध कर दिया है कि बिना रासायनिक खाद के भी खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसान हरेंद्र सिंह बागरी को जिला कलेक्टर द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। उनकी उपलब्धियां क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का विषय बनी हुई हैं तथा कृषि विभाग भी उनके प्रयासों को प्रोत्साहित कर रहा है।
ग्राम अतरसूमा के इस प्रगतिशील किसान की सफलता यह संदेश देती है कि यदि किसान दृढ़ संकल्प, नवाचार और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करें तो जैविक खेती के माध्यम से बेहतर उत्पादन और अधिक आय दोनों प्राप्त की जा सकती हैं।

