रोजगार सहायक पर विभागीय गाज तय,अवैध बोर खनन मामले में एफआईआर के बाद बढ़ीं मुश्किलें।
ग्राम पंचायत सनकुई में पदस्थ रोजगार सहायक रजा खान पर कलेक्टर के आदेश उल्लंघन का आरोप,पेयजल संकट के बीच बिना अनुमति बोर कराने पर पुलिस कार्रवाई।
ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।
जिले में पेयजल संकट के दौरान प्रशासन द्वारा निजी बोर खनन पर लगाए गए प्रतिबंध की खुली अवहेलना का मामला सामने आने के बाद अब कार्रवाई तेज हो गई है। तहसील ढीमरखेड़ा अंतर्गत ग्राम सनकुई में अवैध बोर खनन प्रकरण में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के साथ ही विभागीय कार्रवाई की तलवार भी लटकने लगी है। खास बात यह है कि जिस व्यक्ति पर अवैध बोर खनन कराने का आरोप है, वह कोई सामान्य नागरिक नहीं बल्कि स्वयं ग्राम पंचायत सनकुई में पदस्थ रोजगार सहायक है। ऐसे में एक शासकीय कर्मचारी द्वारा नियमों और कलेक्टर के आदेश का उल्लंघन करना प्रशासनिक हलकों में गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार आरोपी मोहम्मद रजा अहमद उर्फ रजा खान, पिता लाल मुहम्मद, निवासी ग्राम सनकुई ने अपनी निजी भूमि खसरा नंबर 717/2, रकबा 1.10 हेक्टेयर पर बिना वैधानिक अनुमति बोर खनन कराया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि 26 मई 2026 की रात लगभग 2 बजे बोर कराया गया। इसके बाद राजस्व अमले द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया, जिसमें बोर का गड्ढा तथा खुदाई से निकला मलबा मौके पर मिला।
हल्का पटवारी नीरज सिंह ने निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया और पूरी रिपोर्ट तहसीलदार ढीमरखेड़ा को सौंपी। तहसीलदार द्वारा रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद थाना ढीमरखेड़ा को एफआईआर दर्ज करने हेतु निर्देशित किया गया। पुलिस ने उपलब्ध दस्तावेजों और प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जिला प्रशासन पहले ही पेयजल संकट को लेकर अलर्ट मोड पर था। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कटनी द्वारा जारी आदेश के तहत 1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक पूरे जिले को पेयजल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया था। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि बिना सक्षम अनुमति कोई भी व्यक्ति नया निजी बोरवेल या नलकूप नहीं बनवा सकता। प्रशासन ने यह कदम भूजल स्तर में लगातार गिरावट और संभावित जल संकट को देखते हुए उठाया था।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार गर्मी के मौसम में भूजल स्तर तेजी से नीचे गया है। यदि अनियंत्रित तरीके से निजी बोर खनन जारी रहा तो जिले के कई क्षेत्रों में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है। यही कारण था कि कलेक्टर ने सख्त प्रतिबंध लागू करते हुए सार्वजनिक पेयजल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
नियमों के अनुसार निजी भूमि पर बोर खनन कराने के लिए संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होता है। साथ ही लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की तकनीकी अनुशंसा भी जरूरी होती है। लेकिन आरोप है कि रजा खान ने इन सभी प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए सीधे बोर खनन करा लिया।
यह तथ्य प्रशासन के लिए और अधिक गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि रजा खान वर्तमान में ग्राम पंचायत सनकुई में रोजगार सहायक के पद पर कार्यरत हैं। एक शासकीय कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह कानून, शासनादेश और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करे तथा आम नागरिकों के लिए उदाहरण बने। लेकिन इस मामले में आरोप उल्टा है कि सरकारी जिम्मेदारी निभाने वाला कर्मचारी ही नियमों को दरकिनार कर बैठा।
प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बाद अब विभागीय जांच की संभावना भी प्रबल हो गई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित विभाग द्वारा सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसमें कारण बताओ नोटिस, निलंबन अथवा अन्य विभागीय दंडात्मक कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। इसलिए रजा खान पर पुलिस कार्रवाई के साथ विभागीय गाज गिरना भी लगभग तय माना जा रहा है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 (संशोधित नियम 2022) की धारा 9 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना और प्रतिबंधित गतिविधियों को गंभीर अपराध की श्रेणी में माना जाता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब शासकीय कर्मचारी ही नियम तोड़ने लगें तो आम जनता तक कानून का संदेश कमजोर पड़ता है। वहीं दूसरी ओर यह कार्रवाई प्रशासन की सख्ती का भी संकेत दे रही है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ चाहे वह कोई भी हो, कार्रवाई तय है।
अब सबकी नजर आगामी विभागीय कार्रवाई पर टिकी है। यदि प्रशासन इस मामले में कठोर कदम उठाता है तो यह पूरे जिले के शासकीय कर्मचारियों और आम नागरिकों के लिए स्पष्ट संदेश होगा कि जल संकट जैसे संवेदनशील समय में शासन के आदेशों की अवहेलना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
