अच्छी आदतों का नशा अपनाएं, व्यसनों से दूर रहें,ब्रह्माकुमारी रुक्मणी दीदी।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम,राजयोग ध्यान को बताया नशा मुक्ति का प्रभावी माध्यम।
विदिशा,ग्रामीण खबर एमपी।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, ए-33 मुखर्जी नगर सेवा केंद्र द्वारा नगर पालिका के सामने विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य तंबाकू एवं अन्य व्यसनों से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति समाज को जागरूक करना तथा युवाओं एवं बच्चों को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक, समाजसेवी, चिकित्सक, पुलिस अधिकारी एवं ब्रह्माकुमारी संस्थान के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत नुक्कड़ नाटक से हुई, जिसमें कलाकारों ने तंबाकू, गुटखा, शराब और अन्य व्यसनों से होने वाले शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक नुकसान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उपस्थित लोगों ने नाटक की सराहना करते हुए इससे प्रेरणा प्राप्त की।
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी ने कहा कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस की शुरुआत वर्ष 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य तंबाकू सेवन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा इसके उपयोग को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने हेतु प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी और बच्चों को तंबाकू एवं नशे से होने वाले दुष्परिणामों की सही जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। अक्सर देखा जाता है कि बच्चे मित्रों के दबाव और परिवार के बड़े सदस्यों की आदतों को देखकर नशे की ओर आकर्षित हो जाते हैं। यदि वे समय रहते साहस और समझदारी का परिचय दें तो अपने जीवन को बर्बादी से बचाकर उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर हो सकते हैं।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी रुक्मणी दीदी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अच्छी आदतों का नशा अपनाना चाहिए। पढ़ाई का नशा, सेवा का नशा, स्वस्थ जीवन का नशा और श्रेष्ठ कर्मों का नशा व्यक्ति को सभी प्रकार के दुर्व्यसनों से दूर रख सकता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने लक्ष्य और कर्तव्य को सर्वोपरि बना लेता है, तब उसे किसी भी प्रकार के नशे की आवश्यकता महसूस नहीं होती। ईश्वरीय स्मृति, आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक जीवनशैली ही वास्तविक शक्ति का स्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि राजयोग ध्यान व्यक्ति के आंतरिक मनोबल को बढ़ाता है और उसे नकारात्मक प्रवृत्तियों से संघर्ष करने की शक्ति प्रदान करता है। संस्थान के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राजयोग का नियमित अभ्यास करने वाले अधिकांश लोगों ने स्थायी रूप से तंबाकू और अन्य व्यसनों का त्याग किया है। शुद्ध खान-पान, श्रेष्ठ संगति और सकारात्मक वातावरण व्यक्ति को व्यसनमुक्त जीवन की ओर ले जाते हैं।
रुक्मणी दीदी ने कहा कि अधिकांश लोग सही और गलत का अंतर जानते हैं, लेकिन आत्मबल और दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी के कारण वे सही मार्ग पर निरंतर नहीं चल पाते। इसलिए आवश्यकता है कि व्यक्ति अपने मनोबल को मजबूत बनाए और इसके लिए सहज राजयोग ध्यान एक प्रभावी साधन है।
महिला पुलिस थाना प्रभारी उर्मिला यादव ने अपने संबोधन में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में छोटे-छोटे बच्चों में भी गुटखा और तंबाकू सेवन की प्रवृत्ति बढ़ती दिखाई दे रही है। इसके कारण कैंसर सहित अनेक गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि समाज और व्यवस्था दोनों को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा, क्योंकि नशे से जुड़ी सामग्री आसानी से और कम कीमत पर उपलब्ध हो जाती है।
उन्होंने ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा संचालित नशा मुक्ति अभियान की सराहना करते हुए बताया कि भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के साथ हुए समझौते के बाद संस्थान देशभर में व्यापक स्तर पर नशा मुक्ति संबंधी सेवाएं प्रदान कर रहा है।
कार्यक्रम में डॉक्टर सुमत जैन, सब इंस्पेक्टर मेघा शर्मा एवं वरिष्ठ समाजसेवी आर.के. कुलश्रेष्ठ ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कोई भी बुरी आदत इतनी बड़ी नहीं होती जिसे दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयासों से छोड़ा न जा सके। उन्होंने सभी नागरिकों से नशा, व्यसन एवं अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहने तथा स्वस्थ और सकारात्मक जीवन अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों को राजयोग ध्यान का अभ्यास कराया गया तथा परमात्म स्मृति की गहन अनुभूति कराई गई। साथ ही समाज को नशामुक्त बनाने और युवा पीढ़ी को स्वस्थ जीवन की दिशा में प्रेरित करने का सामूहिक संकल्प भी लिया गया।
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विदिशा जिला ब्यूरो यशवंत सिंह रघुवंशी
