फादर्स डे से पहले बेटियों ने लिखी त्याग की मिसाल,किडनी और लीवर दान कर बचाई पिता की जिंदगी।
गाजियाबाद के मोरटा गांव की दो बेटियों ने पेश की अद्भुत मिसाल,पिता की जान बचाने के लिए एक ने दी किडनी तो दूसरी ने किया लीवर डोनेट।
गाजियाबाद,ग्रामीण खबर MP।
फादर्स डे से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मोरटा गांव से एक ऐसी भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। अक्सर कहा जाता है कि बेटियां परिवार की शान, सम्मान और सबसे मजबूत सहारा होती हैं। मोरटा गांव की दो बेटियों ने अपने साहस, त्याग और समर्पण से इस बात को पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है।
यह कहानी कारोबारी जयंत त्यागी और उनकी दो बेटियों रिषिका तथा खुशी की है। पिछले करीब एक वर्ष से जयंत त्यागी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। शुरुआत में सामान्य बीमारी समझकर इलाज कराया गया, लेकिन समय के साथ उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। परिवार उन्हें बेहतर उपचार के लिए गाजियाबाद के एक बड़े निजी अस्पताल में लेकर पहुंचा, जहां जांच रिपोर्ट ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।
डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि जयंत त्यागी की किडनी और लीवर दोनों गंभीर रूप से प्रभावित हो चुके हैं। उनकी स्थिति इतनी नाजुक थी कि केवल दवाइयों से इलाज संभव नहीं था। डॉक्टरों ने साफ कहा कि उनकी जान बचाने के लिए जल्द से जल्द किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट करना आवश्यक है। यह सुनते ही परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
सबसे बड़ी चिंता यह थी कि इतनी जल्दी डोनर कहां से मिलेगा। परिवार के सामने समय बहुत कम था और स्थिति हर दिन गंभीर होती जा रही थी। इसी बीच उनकी दोनों बेटियां अपने पिता के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आईं।
22 वर्षीय बड़ी बेटी रिषिका ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने पिता को एक किडनी दान करने का फैसला लिया। वहीं 19 वर्षीय छोटी बेटी खुशी ने अपने पिता को लीवर का हिस्सा दान करने की इच्छा जताई। दोनों बेटियों के इस निर्णय ने परिवार ही नहीं, डॉक्टरों को भी भावुक कर दिया।
परिवार के अनुसार, दोनों बेटियों ने एक ही बात कही कि अगर पिता को कुछ हो गया तो पूरा परिवार टूट जाएगा। बेटियों ने यह भी कहा कि उनके पिता ही परिवार की सबसे बड़ी ताकत हैं और उन्हें हर हाल में बचाना जरूरी है। उनकी यह भावना सुनकर अस्पताल में मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा।
सभी आवश्यक मेडिकल जांच और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद ट्रांसप्लांट की तैयारी शुरू हुई। डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने लंबी और जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। कई घंटों तक चले इस ऑपरेशन के बाद आखिरकार वह पल आया जिसका पूरा परिवार इंतजार कर रहा था।
डॉक्टरों ने बताया कि किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट दोनों सफल रहे। ऑपरेशन के बाद जयंत त्यागी और छोटी बेटी खुशी को गहन निगरानी के लिए आईसीयू में रखा गया, जबकि बड़ी बेटी रिषिका की हालत स्थिर बताई गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार सभी की रिकवरी सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है।
इस घटना ने समाज को एक बड़ा संदेश दिया है। अक्सर बेटियों को लेकर समाज में पुरानी सोच देखने को मिलती है, लेकिन मोरटा गांव की इन दोनों बेटियों ने साबित कर दिया कि बेटियां केवल घर की रौनक नहीं, बल्कि मुश्किल समय में सबसे मजबूत सहारा भी होती हैं।
फादर्स डे से पहले सामने आई यह कहानी केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि त्याग, प्रेम और रिश्तों की गहराई का जीवंत उदाहरण है। आज सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच रिषिका और खुशी की बहादुरी की चर्चा हो रही है। हर कोई उनकी सराहना कर रहा है और उन्हें बेटियों के रूप में एक मिसाल बता रहा है।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि माता-पिता और संतान के बीच का रिश्ता केवल खून का नहीं, बल्कि निस्वार्थ प्रेम, समर्पण और विश्वास का रिश्ता होता है। मोरटा गांव की इन दोनों बेटियों ने अपने साहसिक फैसले से साबित कर दिया कि जब बात परिवार की हो, तो बेटियां किसी भी हद तक जा सकती हैं।

