कटनी के लमतरा में हरे पेड़ों की अवैध चिराई का आरोप,वीडियो वायरल,डीएफओ ने लिया संज्ञान।

 कटनी के लमतरा में हरे पेड़ों की अवैध चिराई का आरोप,वीडियो वायरल,डीएफओ ने लिया संज्ञान।

तेंदू,जामुन,करही और देशी बबूल की लकड़ी चीरकर फैक्ट्रियों में भेजने का दावा,वन विभाग ने जांच के बाद सख्त कार्रवाई का दिया भरोसा।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

मध्यप्रदेश सरकार जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर पौधरोपण अभियान चला रही है और लोगों को अधिक से अधिक पौधे वितरित कर हरियाली बढ़ाने का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर कटनी जिले की चाका ग्राम पंचायत अंतर्गत लमतरा गांव से सामने आए एक वीडियो ने वन संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में हरे पेड़ों की लकड़ी की कथित अवैध चिराई होते हुए दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में इसकी चर्चा तेज हो गई है और वन विभाग भी हरकत में आ गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार लमतरा गांव में संचालित एक लकड़ी टाल पर आरा मशीन के माध्यम से बड़ी मात्रा में हरे पेड़ों की लकड़ी काटी और चिरी जा रही है। वायरल वीडियो में मशीन के समीप ताजा कटी हुई लकड़ियों का बड़ा ढेर दिखाई दे रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यहां तेंदू, जामुन, करही और देशी बबूल जैसे हरे पेड़ों की लकड़ी को छोटे-छोटे गुटकों के रूप में तैयार किया जाता है। इसके बाद इन्हें सुखाकर विभिन्न फैक्ट्रियों में भेजा जाता है।

मामले को और गंभीर तब माना गया जब टाल पर कार्यरत एक कर्मचारी से लकड़ी की खरीद के संबंध में पूछताछ की गई। वीडियो में कर्मचारी कथित रूप से यह कहते हुए दिखाई देता है कि यहां तेंदू, करही, जामुन तथा देशी बबूल की लकड़ी खरीदी जाती है। वन विभाग के नियमों के अनुसार इन प्रजातियों की हरी लकड़ी की कटाई, परिवहन और चिराई के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया, अनुमति तथा ट्रांजिट पास (टीपी) आवश्यक होता है। ऐसे में वीडियो में सामने आए दावों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

वहीं जब टाल संचालक से लाइसेंस के संबंध में सवाल किया गया तो उसने कथित रूप से कहा कि बिना लाइसेंस के इतनी बड़ी टाल संचालित नहीं हो सकती और उसका पूरा कार्य वैध है। हालांकि मौके पर कथित रूप से हरे पेड़ों की लकड़ी की चिराई से संबंधित आवश्यक दस्तावेज या वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं किए जाने का भी दावा किया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

वन संरक्षण से जुड़े नियमों के अनुसार बिना वैध अनुमति और आवश्यक ट्रांजिट पास के हरे पेड़ों की लकड़ी का परिवहन अथवा चिराई करना दंडनीय अपराध माना जाता है। यदि जांच में इस प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित आरा मशीन को सील करने, लकड़ी जब्त करने तथा संचालकों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करने जैसी कार्रवाई का प्रावधान है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई केवल वन संपदा को ही नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि भूजल स्तर, जैव विविधता और स्थानीय पर्यावरण संतुलन पर भी दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव डालती है। ऐसे समय में जब सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर पौधरोपण और हरित अभियान चला रही है, यदि इस प्रकार की गतिविधियां बिना रोक-टोक संचालित होती हैं तो इससे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को गंभीर क्षति पहुंच सकती है।

वीडियो वायरल होने के बाद जिला वन अधिकारी (डीएफओ) कटनी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया है। मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा के दौरान उन्होंने पूरे मामले की लोकेशन प्राप्त की तथा संबंधित वीडियो एवं फोटोग्राफ भी मंगवाए हैं। डीएफओ ने आश्वासन दिया है कि मौके पर जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की अवैध गतिविधि पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध वन अधिनियम एवं प्रचलित नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

अब सभी की निगाहें वन विभाग की जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल अवैध लकड़ी कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वन संरक्षण व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करेगा। वहीं दूसरी ओर यदि जांच में सभी दस्तावेज और गतिविधियां वैध पाई जाती हैं तो इससे स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई वन विभाग की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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