ट्राई साइकिल के लिए विधायक के चरणों में गिरी आदिवासी महिला,बोली-कई बार गुहार लगाई,फिर भी नहीं मिली मदद।

 ट्राई साइकिल के लिए विधायक के चरणों में गिरी आदिवासी महिला,बोली-कई बार गुहार लगाई,फिर भी नहीं मिली मदद।

विश्व सिकल सेल दिवस के स्वास्थ्य शिविर में सामने आई व्यवस्था की हकीकत,महिला की फरियाद सुन विधायक रीति पाठक हुईं भावुक,अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।

सीधी,ग्रामीण खबर MP।

मध्यप्रदेश के सीधी जिले में आयोजित विश्व सिकल सेल दिवस स्वास्थ्य शिविर के दौरान एक मार्मिक घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सेमरिया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित शिविर के समापन अवसर पर एक आदिवासी महिला विधायक के सामने पहुंची और अपनी वर्षों पुरानी समस्या सुनाते हुए उनके चरणों में गिर गई। महिला ने बताया कि वह लंबे समय से ट्राई साइकिल की मांग कर रही है, लेकिन कई आवेदन और अधिकारियों से लगातार गुहार लगाने के बावजूद उसे अब तक सहायता नहीं मिल सकी।

जानकारी के अनुसार, आदिवासी महिला छोटी रावत स्वास्थ्य शिविर के दौरान सीधे क्षेत्रीय विधायक रीति पाठक के पास पहुंची। भावुक महिला ने विधायक के पैर पकड़कर अपनी पीड़ा सुनाई और कहा कि वह लंबे समय से दिव्यांगजन सहायता योजना के अंतर्गत ट्राई साइकिल प्राप्त करने का प्रयास कर रही है। उसने बताया कि संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के कई चक्कर लगाने के बाद भी उसे केवल आश्वासन ही मिला, जबकि उसकी वास्तविक समस्या का समाधान आज तक नहीं हो पाया।

महिला ने आरोप लगाया कि उसने गोपद बनास के एसडीएम राकेश शुक्ला सहित अन्य अधिकारियों से भी कई बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन हर बार उसे इंतजार करने के लिए कहा गया। समय बीतता गया, लेकिन उसकी समस्या जस की तस बनी रही। आखिरकार जब उसे स्वास्थ्य शिविर में विधायक के आने की जानकारी मिली तो उसने अपनी पीड़ा सीधे जनप्रतिनिधि तक पहुंचाने का निर्णय लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला की बात सुनकर विधायक रीति पाठक स्वयं आश्चर्यचकित रह गईं। उन्होंने सिर पर हाथ रखते हुए भावुक अंदाज में कहा, “मोर बप्पा रे... अभी तक इनका रिक्सा नहीं मिला!” विधायक की यह प्रतिक्रिया वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। बताया जाता है कि विधायक ने तत्काल मौजूद अधिकारियों की ओर देखा और मामले की जानकारी चाही।

मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि विधायक की टिप्पणी के बावजूद संबंधित अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विधायक ने जब एसडीएम राकेश शुक्ला की ओर देखा तो उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। इतना ही नहीं, महिला की समस्या को लेकर भी कोई तत्काल आश्वासन या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया।

घटना के बाद विधायक ने मौके पर मौजूद भाजपा कार्यकर्ता को महिला का नाम, पता और आवश्यक जानकारी नोट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिला की समस्या का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए और यह पता लगाया जाए कि आखिर इतने लंबे समय तक उसे सरकारी सहायता क्यों नहीं मिल सकी।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जो अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली, जनहितकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंचने की प्रक्रिया और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक जरूरतमंद महिला को अपनी बुनियादी सहायता के लिए जनप्रतिनिधि के सामने इस तरह गुहार लगानी पड़े, तो यह व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है।

गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजनों एवं जरूरतमंद लोगों के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य पात्र हितग्राहियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि पात्र व्यक्ति वर्षों तक लाभ से वंचित रहता है तो संबंधित विभागों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि महिला को ट्राई साइकिल कब तक उपलब्ध कराई जाती है और उसकी शिकायत पर प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई होती है।

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