एयर इंडिया फ्लाइट 171 हादसे की जांच पर उठे सवाल,पायलट संगठन ने AAIB रिपोर्ट पर लगाए गंभीर आरोप।

 एयर इंडिया फ्लाइट 171 हादसे की जांच पर उठे सवाल,पायलट संगठन ने AAIB रिपोर्ट पर लगाए गंभीर आरोप।

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने कहा-महत्वपूर्ण कॉकपिट डेटा को नजरअंदाज किया गया,अंतिम रिपोर्ट से पहले दोबारा सिम्युलेटर परीक्षण कराने की मांग।

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

अहमदाबाद में 12 जून 2025 को हुए एयर इंडिया फ्लाइट 171 हादसे की जांच को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियों और कॉकपिट वॉर्निंग डेटा को शामिल नहीं किया गया है। पायलट संगठन का दावा है कि दुर्घटना से पहले विमान में संभावित इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी के संकेत मौजूद थे, जिनका पर्याप्त उल्लेख रिपोर्ट में नहीं किया गया।

एफआईपी ने केंद्र सरकार को लिखे अपने पत्र में कहा है कि उपलब्ध तथ्यों और स्वतंत्र तकनीकी परीक्षणों के आधार पर प्रारंभिक रिपोर्ट में कई ऐसे बिंदु हैं जिनकी दोबारा जांच की आवश्यकता है। संगठन का मानना है कि अंतिम रिपोर्ट जारी करने से पहले व्यापक सिम्युलेटर परीक्षण कराए जाने चाहिए ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक और निष्पक्ष तरीके से पता लगाया जा सके।

पायलट संगठन के अनुसार उन्होंने स्वतंत्र रूप से विमान संचालन से जुड़े विशेषज्ञों की सहायता से सिम्युलेटर परीक्षण कराए, जिनमें कुछ ऐसी तकनीकी विसंगतियां सामने आईं जो प्रारंभिक रिपोर्ट में दर्ज घटनाक्रम और समय-क्रम से मेल नहीं खातीं। एफआईपी का कहना है कि इन तथ्यों को नजरअंदाज करने से जांच की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

गौरतलब है कि एयर इंडिया फ्लाइट 171 के हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया था। अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसके बाद इस घटना की जांच एएआईबी को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी द्वारा जारी प्रारंभिक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि टेकऑफ के कुछ सेकंड बाद विमान के दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ स्थिति में पहुंच गए थे, जिससे इंजनों को ईंधन की आपूर्ति बाधित हुई और विमान की शक्ति तेजी से कम होने लगी।

रिपोर्ट में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से प्राप्त कुछ संवादों का भी उल्लेख किया गया था, जिनमें एक पायलट दूसरे से फ्यूल सप्लाई कट होने के संबंध में सवाल करता सुनाई दिया था। हालांकि जांच एजेंसी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में किसी निश्चित तकनीकी खराबी या मानवीय त्रुटि को दुर्घटना का अंतिम कारण घोषित नहीं किया था। साथ ही विमान निर्माता कंपनी और इंजन निर्माता से संबंधित किसी तत्काल सुरक्षा चेतावनी की भी अनुशंसा नहीं की गई थी।

अब एफआईपी का कहना है कि दुर्घटना से पहले विमान के इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़े कुछ संकेत और कॉकपिट वॉर्निंग संदेश जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं। संगठन ने मांग की है कि इन पहलुओं का गहन विश्लेषण किया जाए और स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से अतिरिक्त परीक्षण कराए जाएं।

वहीं, विमान दुर्घटना जांच से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़ी विमान दुर्घटना की जांच एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होती है। प्रारंभिक रिपोर्ट का उद्देश्य केवल उपलब्ध तथ्यों को सार्वजनिक करना होता है, जबकि अंतिम रिपोर्ट में विस्तृत तकनीकी विश्लेषण और निष्कर्ष शामिल किए जाते हैं। इसलिए किसी भी प्रारंभिक निष्कर्ष को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।

इस पूरे मामले में एएआईबी और सरकार का रुख स्पष्ट है कि जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसी का कहना है कि सभी उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों, रिकॉर्डिंग, डेटा और परीक्षणों का विश्लेषण किया जा रहा है तथा अंतिम रिपोर्ट में दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत निष्कर्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

फिलहाल एयर इंडिया फ्लाइट 171 हादसे की जांच को लेकर पायलट संगठन और जांच एजेंसी के बीच तकनीकी मतभेद सामने आ गए हैं। विमानन जगत की नजर अब एएआईबी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।

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