ग्राम खम्हरिया नं.1 में श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य आयोजन,श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर उमड़ा आस्था का सागर।
बाबा हरिदास जी के बंगले में संगीतमय कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने किया भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का भावपूर्ण स्वागत,वामन अवतार और समुद्र मंथन की कथाओं से मिला आध्यात्मिक संदेश।
रीठी,ग्रामीण खबर MP।
कटनी जिले के रीठी विकासखंड अंतर्गत ग्राम खम्हरिया नं. 1 इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना के अद्भुत संगम का साक्षी बन रहा है। ग्राम स्थित पूज्य बाबा हरिदास जी के बंगले में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचकर भगवान की दिव्य लीलाओं का श्रवण कर धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं। कथा स्थल पर सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तिमय वातावरण बना रहता है, जहां श्रद्धालु भजन, कीर्तन और भगवान के जयकारों के बीच आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कर रहे हैं।
कथा व्यास पूज्य श्री श्री 1008 श्री जगदेव बड़गैंया जी महाराज अपनी मधुर, ओजस्वी और ज्ञानवर्धक वाणी से श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी कथाओं का रसपान करा रहे हैं। उनके मुखारविंद से निकले आध्यात्मिक संदेश श्रद्धालुओं के हृदय को स्पर्श कर रहे हैं और लोगों को धर्म, भक्ति तथा मानव जीवन के उच्च आदर्शों की ओर प्रेरित कर रहे हैं।
कथा के दौरान महाराज श्री ने भगवान वामन अवतार का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि जब अहंकार बढ़ता है तब भगवान अपने भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए अवतार धारण करते हैं। उन्होंने राजा बलि और भगवान वामन की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि राजा बलि केवल एक पराक्रमी राजा ही नहीं बल्कि महान दानी और भगवान के अनन्य भक्त थे। भगवान ने उनकी परीक्षा लेने के लिए वामन ब्राह्मण का रूप धारण किया और तीन पग भूमि का दान मांगा। राजा बलि ने बिना किसी संकोच के अपना सर्वस्व भगवान को समर्पित कर दिया। उनके इस अद्भुत त्याग और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें अमर यश प्रदान किया और सुतल लोक का अधिपति बनाया।
महाराज श्री ने कहा कि यह कथा हमें सिखाती है कि मनुष्य के जीवन में धन, वैभव और सत्ता से अधिक महत्वपूर्ण भगवान के प्रति समर्पण और विनम्रता है। जो व्यक्ति अपने अहंकार को त्यागकर ईश्वर की शरण में जाता है, उसके जीवन में सुख, शांति और सफलता स्वतः प्राप्त हो जाती है।
इसके पश्चात समुद्र मंथन की कथा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा व्यास जी ने समुद्र मंथन को मानव जीवन का प्रतीक बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर एक समुद्र विद्यमान है, जिसमें अच्छाइयां और बुराइयां दोनों मौजूद रहती हैं। जब मनुष्य भगवान के नाम, सत्संग और साधना के माध्यम से अपने मन का मंथन करता है, तब सबसे पहले उसके भीतर छिपे दोष, विकार और नकारात्मकताएं बाहर आती हैं। यदि वह धैर्यपूर्वक साधना करता रहे तो अंततः उसे जीवन रूपी अमृत की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में लोग बाहरी सुखों की खोज में भटक रहे हैं, जबकि वास्तविक आनंद और शांति भगवान के नाम स्मरण और सत्संग में निहित है। भगवान का नाम ही वह अमृत है जो मनुष्य के जीवन को सफल और सार्थक बना सकता है।
कथा के दौरान सबसे अधिक भावुक और भक्तिमय वातावरण उस समय देखने को मिला जब भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा का वर्णन प्रारंभ हुआ। जैसे-जैसे कथा व्यास जी भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की दिव्य कथा सुनाते गए, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और भक्ति से नम होती चली गईं। पूरा कथा पंडाल "जय श्रीकृष्ण", "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" तथा अन्य भक्ति जयघोषों से गूंज उठा।
महाराज श्री ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के अत्याचारों से धरती, देवता और संतजन व्याकुल हो उठे, तब भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेने का संकल्प किया। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि को मथुरा की कारागार में भगवान श्रीकृष्ण ने चतुर्भुज स्वरूप में प्रकट होकर माता देवकी और पिता वासुदेव को दर्शन दिए। भगवान ने उन्हें आश्वस्त किया कि वे संसार के कल्याण और अधर्म के विनाश के लिए अवतरित हुए हैं।
इसके बाद भगवान ने बाल स्वरूप धारण किया और वासुदेव जी उन्हें यमुना नदी पार कर गोकुल लेकर पहुंचे। वहां नंद बाबा और माता यशोदा के घर भगवान की बाल लीलाओं का शुभारंभ हुआ। कथा व्यास जी ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, उनके दिव्य स्वरूप तथा भक्तों के प्रति उनके प्रेम का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर सुंदर एवं आकर्षक झांकियों का प्रदर्शन भी किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, वासुदेव द्वारा उन्हें गोकुल ले जाने तथा नंदोत्सव से जुड़ी झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। रंग-बिरंगी सजावट, पुष्पों की सुगंध, भजन-कीर्तन और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु घंटों तक झांकियों के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करते रहे।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की उपस्थिति देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर भगवान के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की तथा समाज में धर्म, संस्कार और सदाचार के महत्व को समझा। कथा स्थल पर अनुशासन, सेवा और भक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
कथा व्यास श्री जगदेव बड़गैंया जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाला आध्यात्मिक महायज्ञ है। इसके श्रवण से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन आता है, मन शुद्ध होता है और जीवन में धर्म, प्रेम, करुणा तथा सेवा की भावना का विकास होता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज अनेक चुनौतियों और तनावों से गुजर रहा है, तब भागवत कथा जैसे आयोजन लोगों को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करते हैं। भगवान की कथाओं का श्रवण मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप का बोध कराता है और जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर ग्राम के पूर्व सरपंच उदयभान यादव, संतकुमार यादव, चंद्रभान यादव,सुक्खीलाल यादव, कैलाश यादव, इंद्रकुमार यादव, राजेन्द्र यादव, अशोक यादव, पुरुषोत्तम यादव, प्रीतम यादव, शेषकुमार यादव, अनिल यादव, नीरज यादव,शिवप्रसाद यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।
ग्राम खम्हरिया नं. 1 में चल रही यह श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बन गई है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, त्याग, समर्पण, सेवा और मानवता का संदेश प्राप्त हो रहा है। प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या इस बात का प्रमाण है कि भगवान की कथा आज भी जनमानस के हृदय में आस्था और विश्वास की ज्योति प्रज्वलित कर रही है। कथा स्थल पर उमड़ रही भक्तों की भीड़ और गूंजते भक्ति रस से पूरा क्षेत्र कृष्णमय वातावरण में सराबोर दिखाई दे रहा है।

