बरही में 9 जून को सजेगी सूफियाना महफिल,फैजान अजमेरी और आशिफ चिश्ती बिखेरेंगे कलाम का जादू।
हज़रत दाता भुलनशाह वली के सालाना उर्स मुबारक में उमड़ेगी अकीदतमंदों की भीड़,चादरपोशी,लंगर और कव्वाली की रहेगी विशेष रौनक।
बरही,ग्रामीण खबर MP।
बरही नगर की पावन धरती एक बार फिर आध्यात्मिक उल्लास, सूफियाना रंग और अकीदत के नूर से जगमगाने जा रही है। नगर में स्थित हज़रत दाता भुलनशाह वली रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स मुबारक 8 एवं 9 जून 2026 को पूरे धार्मिक उत्साह, श्रद्धा और पारंपरिक गरिमा के साथ आयोजित किया जाएगा। उर्स को लेकर दरगाह परिसर सहित पूरे नगर में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और अकीदतमंदों के बीच विशेष उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र रही हज़रत दाता भुलनशाह वली की दरगाह पर हर वर्ष आयोजित होने वाला उर्स न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन भी माना जाता है। इस आयोजन में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग शामिल होकर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और अमन, चैन, खुशहाली तथा तरक्की की दुआ मांगते हैं।
उर्स कार्यक्रम के अंतर्गत 8 जून, सोमवार को चादरपोशी, फातिहाख्वानी, कुरआन शरीफ की तिलावत, विशेष दुआ, लंगर एवं तबर्रुक वितरण जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सुबह से ही श्रद्धालुओं का दरगाह पहुंचना शुरू हो जाएगा और देर रात तक इबादत एवं दुआओं का सिलसिला जारी रहेगा। दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले जायरीन बाबा की मजार पर चादर पेश कर अपनी मन्नतें मांगेंगे तथा उर्स की बरकतों में शामिल होंगे।
आयोजन समिति के अनुसार उर्स के दौरान हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए दरगाह परिसर में व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधा, साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था तथा पार्किंग की विशेष तैयारियां की जा रही हैं। स्वयंसेवकों की टीम लगातार व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है ताकि बाहर से आने वाले जायरीन को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
उर्स मुबारक का सबसे प्रमुख आकर्षण 9 जून, मंगलवार की रात्रि 9 बजे से आयोजित होने वाली भव्य कव्वाली एवं महफिल-ए-समां होगी। इस सूफियाना महफिल में देश के प्रसिद्ध सूफी गायक एवं कव्वाल फैजान अजमेरी और आशिफ चिश्ती अपनी रूहानी आवाज का जादू बिखेरेंगे। दोनों कलाकार अपनी शानदार प्रस्तुतियों के लिए देशभर में विशेष पहचान रखते हैं और उनकी कव्वालियां लाखों लोगों के दिलों में खास जगह बना चुकी हैं।
महफिल में हम्द, नात, मनकबत और सूफियाना कलामों की ऐसी श्रृंखला प्रस्तुत की जाएगी जो श्रोताओं को आध्यात्मिक आनंद और भावनात्मक जुड़ाव का अद्भुत अनुभव कराएगी। इश्क-ए-रसूल, औलिया-ए-किराम की मोहब्बत और इंसानियत के संदेश से भरपूर कलाम पूरी महफिल को आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर कर देंगे। आयोजकों का कहना है कि इस वर्ष की कव्वाली महफिल पहले की अपेक्षा और भी अधिक भव्य एवं आकर्षक होगी।
सूफी संगीत की परंपरा हमेशा से लोगों के दिलों को जोड़ने का कार्य करती रही है। यही कारण है कि उर्स के दौरान आयोजित होने वाली कव्वाली महफिल में केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित होकर सूफी संगीत का आनंद लेते हैं। यह आयोजन प्रेम, भाईचारे और आपसी सौहार्द का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आता है।
बरही क्षेत्र में हज़रत दाता भुलनशाह वली रहमतुल्लाह अलैह के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। स्थानीय लोगों का मानना है कि बाबा के दरबार में आने वाला कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता। इसी आस्था के कारण हर वर्ष उर्स में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। कई परिवार ऐसे हैं जो पीढ़ियों से उर्स में शामिल होते आ रहे हैं और इसे अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
उर्स कमेटी ने क्षेत्रवासियों सहित आसपास के जिलों और प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस पावन आयोजन में शामिल होकर बाबा के दरबार में हाजिरी दें और उर्स की रौनक बढ़ाएं। समिति ने यह भी कहा कि उर्स का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारा, एकता और इंसानियत के मूल्यों को मजबूत करना है।
नगर के वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि बरही का यह ऐतिहासिक उर्स वर्षों से गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल बना हुआ है। यहां हर धर्म और समाज के लोग एक साथ बैठकर लंगर ग्रहण करते हैं, कव्वाली सुनते हैं और सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हैं। यही विशेषता इस आयोजन को अन्य आयोजनों से अलग पहचान प्रदान करती है।
8 एवं 9 जून को आयोजित होने वाला यह सालाना उर्स मुबारक बरही नगर के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में से एक माना जा रहा है। जैसे-जैसे आयोजन की तिथि नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं और अकीदतमंदों के उत्साह में भी लगातार वृद्धि हो रही है। पूरे नगर में उर्स की तैयारियों और कव्वाली महफिल की चर्चाएं सुनाई दे रही हैं।
हज़रत दाता भुलनशाह वली रहमतुल्लाह अलैह का यह उर्स एक बार फिर प्रेम, श्रद्धा, भाईचारे और इंसानियत का ऐसा संदेश लेकर आ रहा है, जो समाज को जोड़ने और आपसी सौहार्द को मजबूत करने का कार्य करेगा। 8 एवं 9 जून को बाबा के दरबार में आस्था का विशाल संगम देखने को मिलेगा, जहां हजारों श्रद्धालु बरकतें हासिल करने और सूफियाना महफिल का आनंद लेने पहुंचेंगे।

