कटनी नगर निगम का अजीब कारनामा,सफाई के नाम पर तोड़ी जा रही लाखों की आरसीसी नालियां,जनता ने उठाए भ्रष्टाचार पर सवाल।

 कटनी नगर निगम का अजीब कारनामा,सफाई के नाम पर तोड़ी जा रही लाखों की आरसीसी नालियां,जनता ने उठाए भ्रष्टाचार पर सवाल।

नदी पार क्षेत्र से बस स्टैंड मार्ग पर आठ वर्ष पहले बने आरसीसी ढके नालों को जेसीबी से तोड़कर की जा रही सफाई,नागरिक बोले-आखिर सरकारी धन की इस बर्बादी का जिम्मेदार कौन?

कटनी,ग्रामीण खबर MP।

कटनी शहर में एक बार फिर नगर निगम की कार्यप्रणाली चर्चा और विवाद का विषय बन गई है। शहर के नदी पार क्षेत्र से लेकर बस स्टैंड तक बने मुख्य मार्ग पर नगर निगम द्वारा लगभग आठ वर्ष पूर्व सड़क के दोनों किनारों पर पक्के नाले बनवाए गए थे। उस समय इस परियोजना को शहर के विकास और बेहतर जल निकासी व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया था। नालों को आरसीसी स्लैब से पूरी तरह ढंक दिया गया था ताकि सड़क सुंदर दिखाई दे, यातायात व्यवस्थित बना रहे और राहगीरों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उस दौरान इस निर्माण कार्य पर लाखों रुपये की लागत खर्च की गई थी और नगर निगम द्वारा इसे उपलब्धि के रूप में प्रचारित भी किया गया था।

समय बीतने के साथ अब वही निर्माण कार्य नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वर्तमान में नगर निगम द्वारा उन्हीं आरसीसी ढके नालों को जेसीबी मशीनों की सहायता से तोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई नालों की सफाई के लिए की जा रही है। लेकिन स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि यदि नगर निगम ने समय-समय पर नालों की नियमित सफाई और रखरखाव कराया होता तो आज लाखों रुपये की मजबूत आरसीसी संरचना को तोड़ने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जिस निर्माण को वर्षों पहले स्थायी और आधुनिक व्यवस्था बताकर बनाया गया था, आज वही निर्माण सफाई व्यवस्था की कमजोरी और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है। नागरिकों के अनुसार नगर निगम पहले जनता के टैक्स के पैसे से लाखों रुपये खर्च कर निर्माण कराता है और फिर कुछ वर्षों बाद उसी निर्माण को तोड़कर दोबारा निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर देता है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और योजनाबद्ध भ्रष्टाचार की आशंकाएं और अधिक मजबूत होती दिखाई दे रही हैं।

स्थानीय रहवासियों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि नालों की सफाई के लिए पूरी आरसीसी स्लैब को तोड़ना पड़ रहा है तो आखिर निर्माण के समय तकनीकी मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। आमतौर पर ऐसे नालों में निरीक्षण चैंबर, सफाई बिंदु और रखरखाव के लिए आवश्यक संरचनाएं बनाई जाती हैं ताकि बिना तोड़फोड़ के सफाई का कार्य किया जा सके। लेकिन यहां स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। भारी मशीनों से स्लैब तोड़े जाने के कारण आसपास धूल और मलबे का अंबार लग गया है, जिससे स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

राहगीरों का कहना है कि सड़क के किनारे टूटे पड़े स्लैब और चल रही जेसीबी मशीनों के कारण यातायात भी प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर सड़क संकरी हो गई है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि लगातार चल रहे तोड़फोड़ कार्य के कारण व्यापार पर भी असर पड़ रहा है और ग्राहकों को आवाजाही में कठिनाई हो रही है।

शहर के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि आखिर वह कौन सी मजबूरी थी जिसके कारण मजबूत आरसीसी ढांचे को तोड़कर सफाई करनी पड़ रही है। यदि निर्माण कार्य में तकनीकी खामियां थीं तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है, और यदि रखरखाव में लापरवाही हुई है तो उसके लिए कौन जवाबदेह होगा। नागरिकों का मानना है कि इस पूरे मामले में तकनीकी और वित्तीय दोनों पहलुओं की जांच आवश्यक है।

कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम में विकास कार्यों के नाम पर बार-बार एक ही स्थान पर निर्माण और पुनर्निर्माण का खेल लंबे समय से चलता आ रहा है। पहले सड़क बनाई जाती है, फिर पाइप लाइन के लिए खोदी जाती है, उसके बाद नाले तोड़े जाते हैं और फिर दोबारा निर्माण कराया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अधिक नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है, जबकि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की मूलभूत व्यवस्थाएं स्थायी रूप से सुधर नहीं पातीं।

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और जिला अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण और दूरदर्शिता के साथ किया गया होता तो आज ऐसी स्थिति निर्मित नहीं होती। साथ ही नागरिकों ने यह भी मांग की है कि भविष्य में शहर में होने वाले विकास कार्यों की नियमित निगरानी की जाए ताकि जनता के टैक्स के पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।

नगर निगम की इस कार्रवाई को लेकर अब शहरभर में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और इसे सरकारी धन की खुली बर्बादी बता रहे हैं। आमजन का कहना है कि विकास कार्य केवल दिखावे तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उनमें गुणवत्ता, पारदर्शिता और दीर्घकालिक योजना का समावेश होना चाहिए। फिलहाल नदी पार से बस स्टैंड मार्ग तक टूटती आरसीसी नालियां और मलबे के बीच चलती जेसीबी मशीनें नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती दिखाई दे रही हैं।



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