सिलौंडी सेंट्रल बैंक में कैश संकट से हाहाकार,40 गांवों के हजारों खाताधारक परेशान।

 सिलौंडी सेंट्रल बैंक में कैश संकट से हाहाकार,40 गांवों के हजारों खाताधारक परेशान।

शादी-विवाह के सीजन में नगद की किल्लत ने बढ़ाई मुश्किलें,पैसे होते हुए भी कर्ज लेने को मजबूर ग्रामीण।

सिलौंडी,ग्रामीण खबर MP।

 कटनी जिले के सिलौंडी क्षेत्र में स्थित सेंट्रल बैंक में लंबे समय से जारी कैश संकट अब गंभीर जनसमस्या का रूप ले चुका है। क्षेत्र के लगभग 40 गांवों के हजारों खाताधारक इस समस्या से प्रभावित हैं और उन्हें अपनी ही जमा पूंजी निकालने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि महीने के 15 से 18 दिन बैंक में नगद राशि उपलब्ध नहीं रहती, जिससे बैंक पहुंचने वाले लोगों को खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि सिलौंडी क्षेत्र में यह एकमात्र प्रमुख बैंक शाखा है, जहां आसपास के गांवों के लोग अपनी दैनिक जरूरतों, कृषि कार्यों, सामाजिक आयोजनों और अन्य लेन-देन के लिए निर्भर रहते हैं। ऐसे में जब बैंक में कैश उपलब्ध नहीं होता, तो पूरा क्षेत्र आर्थिक रूप से प्रभावित होने लगता है। लोग सुबह से ही बैंक के बाहर लंबी कतारों में खड़े रहते हैं, लेकिन कई बार घंटों इंतजार करने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगती है।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि बाजार व्यवस्था भी इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हो रही है। सिलौंडी क्षेत्र आसपास के गांवों के लिए प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, जहां लोग कपड़े, किराना, कृषि सामग्री, ज्वैलरी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीददारी करने आते हैं। लेकिन नगद राशि की कमी के कारण ग्राहक खरीददारी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे व्यापारियों का कारोबार भी ठप पड़ने की स्थिति में पहुंच रहा है।

शादी-विवाह के इस सीजन में समस्या और अधिक गंभीर हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार विवाह जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक आयोजनों में नगद राशि की आवश्यकता अधिक होती है। कपड़े, आभूषण, कैटरिंग, टेंट, सजावट और अन्य व्यवस्थाओं के लिए समय पर कैश की जरूरत पड़ती है, लेकिन बैंक से पैसे नहीं मिलने के कारण लोगों को मजबूरन रिश्तेदारों, साहूकारों या अन्य स्रोतों से कर्ज लेना पड़ रहा है। इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।

किसान वर्ग भी इस समस्या से खासा परेशान है। वर्तमान समय में कृषि कार्यों के लिए बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी भुगतान के लिए नगद राशि की आवश्यकता होती है, लेकिन बैंक में कैश नहीं होने के कारण किसान समय पर अपनी जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं। कई किसानों ने बताया कि उन्हें बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उनका समय और श्रम दोनों व्यर्थ हो रहा है।

पेंशनधारी बुजुर्गों की स्थिति भी बेहद दयनीय बनी हुई है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले बुजुर्ग घंटों बैंक में इंतजार करते हैं, लेकिन नगद राशि नहीं मिलने के कारण उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। कई बार उन्हें अगली तारीख पर फिर से आने के लिए कहा जाता है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।

मजदूर वर्ग के लिए यह समस्या और भी गंभीर है, क्योंकि उनकी आजीविका प्रतिदिन की कमाई और नगद भुगतान पर निर्भर करती है। बैंक से समय पर पैसे नहीं मिलने के कारण वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि बैंक में कैश प्रबंधन की उचित व्यवस्था नहीं है। समय पर पर्याप्त नगद राशि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जिससे लगातार यह समस्या बनी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि क्षेत्र में एक से अधिक बैंक शाखाएं या वैकल्पिक व्यवस्था होती, तो उन्हें इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों ने बैंक प्रबंधन एवं संबंधित उच्च अधिकारियों से मांग की है कि सिलौंडी शाखा में नियमित रूप से पर्याप्त नगद राशि की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही वैकल्पिक बैंकिंग सुविधाएं, जैसे अतिरिक्त काउंटर, मोबाइल बैंकिंग वैन या एटीएम में पर्याप्त कैश की व्यवस्था भी की जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ बैंक की समस्या नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

फिलहाल, सिलौंडी क्षेत्र के हजारों लोग अपनी ही मेहनत की कमाई निकालने के लिए जूझ रहे हैं और बैंक प्रबंधन की ओर से ठोस समाधान का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब तक ध्यान देते हैं और क्षेत्रवासियों को राहत दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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