पिंडरई में “हर घर जल” योजना फेल,पानी के लिए भटक रहे ग्रामीण।
एक साल से जल संकट,आधा किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर लोग,टंकी बनी शोपीस,बोर पर कब्जे के आरोप।
ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।
कटनी जिले के ढीमरखेड़ा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत पिंडरई से शासन की महत्वाकांक्षी “हर घर नल, हर घर जल” योजना की जमीनी सच्चाई सामने आई है, जो न केवल हैरान करने वाली है बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की खामियों को भी उजागर करती है। योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, लेकिन पिंडरई में यह योजना पूरी तरह से धरातल पर विफल होती नजर आ रही है।
गांव में बीते लगभग एक वर्ष से जल संकट गहराया हुआ है। ग्राम पंचायत के वार्ड क्रमांक 01, 02 और 13 में स्थिति सबसे अधिक खराब है, जहां लोगों को रोजमर्रा के जीवन के लिए पानी जुटाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए करीब आधा किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। सुबह और शाम के समय पानी भरने के लिए लंबी कतारें लगती हैं, जिससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गांव की महिलाओं का कहना है कि दिन की शुरुआत और अंत पानी भरने की जद्दोजहद से ही होता है। कई बार तो पानी की कमी के कारण घर के अन्य कामकाज भी प्रभावित हो जाते हैं। वहीं स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका असर पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें भी परिवार की मदद के लिए पानी लाने जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और संबंधित विभागों के अधिकारियों से शिकायत की है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
गांव में जल आपूर्ति के लिए पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था, जिससे लोगों को उम्मीद थी कि अब उन्हें राहत मिलेगी। लेकिन यह टंकी आज तक अपनी उपयोगिता साबित नहीं कर पाई है। वर्तमान स्थिति यह है कि टंकी से एक भी वार्ड में नियमित और पर्याप्त जल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा आम है कि यह टंकी केवल दिखावे के लिए बनाई गई है और इसका वास्तविक लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा।
इसके अलावा ग्राम पंचायत में उपलब्ध जल संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कुल आठ बोरवेल हैं, लेकिन उनमें से केवल दो ही चालू स्थिति में हैं। बाकी बोरवेल या तो खराब पड़े हैं या फिर कथित रूप से कुछ प्रभावशाली लोगों के कब्जे में हैं, जो उनका उपयोग अपने निजी हितों के लिए कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि एक बोरवेल का उपयोग सरपंच द्वारा निजी सिंचाई कार्य के लिए किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही है, तो यह न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है बल्कि ग्रामीणों के अधिकारों का भी हनन है। इस मामले में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
ग्रामीणों का मानना है कि समस्या संसाधनों की कमी की नहीं है, बल्कि उनके सही प्रबंधन और वितरण की है। यदि सभी बोरवेलों को चालू किया जाए, पाइपलाइन व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए और जल वितरण को पारदर्शी तरीके से संचालित किया जाए, तो इस संकट से आसानी से निपटा जा सकता है।
गांव में लगातार बनी इस गंभीर स्थिति के चलते लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अब ग्रामीण खुलकर प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
यह मामला केवल एक गांव का नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किस तरह की लापरवाही बरती जा रही है। “हर घर जल” जैसी महत्वपूर्ण योजना का इस तरह विफल होना शासन-प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संबंधित अधिकारी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करेंगे, या फिर पिंडरई के ग्रामीणों को इसी तरह पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

