रीठी अध्ययन केंद्र में विश्व जल दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।
जल और लैंगिक समानता थीम पर विद्यार्थियों ने रखे विचार,जल संरक्षण का लिया संकल्प।
रीठी,ग्रामीण खबर MP।
मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद द्वारा संचालित बीएसडब्ल्यू एवं एमएसडब्ल्यू पाठ्यक्रम की साप्ताहिक कक्षाओं के अंतर्गत रीठी अध्ययन केंद्र में विश्व जल दिवस के अवसर पर एक विस्तृत एवं जागरूकता आधारित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जल संरक्षण, सामाजिक भागीदारी तथा लैंगिक समानता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत एवं प्रेरणागीत के साथ सामूहिक परिचर्चा से हुई, जिसमें सभी छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रारंभिक सत्र में अध्ययन केंद्र से जुड़े शैक्षणिक कार्यों की समीक्षा की गई, जिसमें अपार आईडी निर्माण, द्वितीय किस्त जमा करने तथा परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से पूर्ण कराया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को समयसीमा के भीतर शैक्षणिक दायित्वों को पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया गया।
इसके पश्चात विश्व जल दिवस 2026 की थीम “जल और लैंगिक समानता” पर केंद्रित विचार गोष्ठी आयोजित की गई। परामर्शदाता शरद यादव ने अपने संबोधन में कहा कि जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि यह मानव जीवन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि जल तक समान पहुंच सुनिश्चित करना सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं और बालिकाओं पर पड़ता है, क्योंकि जल संग्रहण की जिम्मेदारी अक्सर उन्हीं के कंधों पर होती है। इस कारण उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता प्रभावित होती है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित इस वर्ष की थीम का उल्लेख करते हुए कहा कि जल प्रबंधन की नीतियों और निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। इससे न केवल जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन होगा, बल्कि समाज में समानता और सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे इस विषय को केवल एक अभियान तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
परामर्शदाता अमर बहादुर यादव ने जल के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। उन्होंने बताया कि अनियंत्रित दोहन, जल स्रोतों का प्रदूषण और वर्षा जल का उचित संचयन न होने के कारण जल संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में जल के विवेकपूर्ण उपयोग को अपनाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान जनभागीदारी से ही सफल हो सकता है और इसमें युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
परामर्शदाता रूपा बर्मन ने विद्यार्थियों को अभियान के अंतर्गत प्रोजेक्ट कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र-छात्रा को जल संरक्षण से संबंधित विषयों पर अध्ययन कर प्रोजेक्ट तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल शैक्षणिक कार्य नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्थानीय जल स्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता एवं पुनर्जीवन के प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
साक्षी नामदेव ने विद्यार्थियों को असाइनमेंट निर्माण, ऑनलाइन अपलोड एवं सत्यापन की प्रक्रिया को समय पर पूर्ण करने के लिए मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रक्रियाओं में दक्षता प्राप्त करना भी आज के समय की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत दीवार लेखन, श्रमदान, जनजागरूकता रैलियों एवं सामूहिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लें।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और जल संरक्षण के विभिन्न उपायों पर चर्चा की। कई विद्यार्थियों ने वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों की सफाई, प्लास्टिक मुक्त वातावरण और जल के पुनः उपयोग जैसे विषयों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। इस संवादात्मक सत्र ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी एवं प्रेरणादायक बना दिया।
अंतिम सत्र में परामर्शदाता अरुण तिवारी द्वारा जल संरक्षण एवं जल गंगा संवर्धन अभियान की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि जल संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी उपस्थितजनों को जल संरक्षण की शपथ दिलाते हुए कहा कि हमें अपने जीवन में जल के प्रति संवेदनशीलता विकसित करनी होगी।
कार्यक्रम के समापन पर “जल ही जीवन है” और “जल है तो कल है” जैसे प्रेरणादायक नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। इस अवसर पर अध्ययन केंद्र के सभी छात्र-छात्राएं, परामर्शदाता एवं संबंधित सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने न केवल विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाई, बल्कि उन्हें जल संरक्षण के प्रति सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित भी किया।








