बेलानारा में क्षतिग्रस्त कुएं में गिरा बकरा,ग्रामीणों ने दो घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला।

 बेलानारा में क्षतिग्रस्त कुएं में गिरा बकरा,ग्रामीणों ने दो घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला।

मां नर्मदा मंदिर के सामने स्थित कुएं में पहले भी हो चुके हैं हादसे,ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सुरक्षा इंतजाम की उठाई मांग।

विदिशा,ग्रामीण खबर MP।

 जिले के नटेरन जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत खैराई के ग्राम बेलानारा में स्थित मां नर्मदा मंदिर के सामने एक पुराने और क्षतिग्रस्त कुएं में शुक्रवार को एक बकरा गिर गया। घटना की जानकारी लगते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और बकरे को बचाने के प्रयास शुरू किए। करीब दो घंटे तक चले सामूहिक प्रयास और ग्रामीणों की सूझबूझ के चलते आखिरकार बकरे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

बताया गया कि यह कुआं लंबे समय से जर्जर अवस्था में खुला पड़ा हुआ है। कुएं के आसपास न तो कोई मजबूत घेराबंदी की गई है और न ही सुरक्षा के अन्य पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। इसी कारण आए दिन यहां हादसे होने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कई बार इस कुएं में पशु-पक्षी और लोग गिर चुके हैं, जिससे क्षेत्र के लोगों में हमेशा भय और चिंता का माहौल बना रहता है।

गुरुवार को जब बकरा कुएं में गिरा तो कुछ देर तक वह कुएं के अंदर ही फंसा रहा और लगातार आवाज करता रहा। उसकी आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण वहां पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। कुएं की गहराई और दीवारों की जर्जर स्थिति के कारण बकरे को बाहर निकालना आसान नहीं था, लेकिन ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी और सामूहिक प्रयास से बचाव कार्य शुरू किया।

ग्रामीणों ने पहले रस्सियों और लकड़ी की सहायता से बकरे तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद गांव के ही रामकृष्ण वंशकार ने साहस दिखाते हुए रस्सी के सहारे कुएं के अंदर उतरने का निर्णय लिया। ग्रामीणों की मदद से वे सावधानीपूर्वक कुएं में नीचे उतरे और बकरे को खटिया पर मजबूती से बांधा गया। इसके बाद ऊपर खड़े ग्रामीणों ने रस्सी की मदद से धीरे-धीरे खटिया को ऊपर खींचा। लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत और जोखिम भरे प्रयासों के बाद बकरे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

बकरे के सुरक्षित बाहर आते ही वहां मौजूद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे और पूरे घटनाक्रम को देखते रहे। ग्रामीणों ने रामकृष्ण वंशकार के साहस और सूझबूझ की सराहना भी की, जिनकी पहल से यह बचाव कार्य सफल हो सका।

हालांकि इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही और अनदेखी को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि मां नर्मदा मंदिर के सामने स्थित यह कुआं लंबे समय से क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़ा है और इसके कारण कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ग्रामीणों के अनुसार इससे पहले इस कुएं में गाय का बछड़ा, कुत्ते और एक बालक भी गिर चुके हैं, जिनकी खबरें भी विभिन्न मीडिया माध्यमों में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक प्रशासन द्वारा इस कुएं की मरम्मत, ढक्कन लगाने या मजबूत घेराबंदी करने जैसे कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय रहते इस कुएं की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में कोई बड़ी अप्रिय घटना भी हो सकती है। उनका कहना है कि मंदिर के पास होने के कारण यहां हमेशा लोगों का आना-जाना लगा रहता है, ऐसे में यह खुला और क्षतिग्रस्त कुआं किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

ग्राम बेलानारा के कई ग्रामीणों ने बताया कि वे पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक प्रशासन अक्सर इस प्रकार की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेता, जो चिंता का विषय है।

ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस कुएं की मरम्मत कराई जाए और इसके चारों ओर मजबूत घेराबंदी की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोका जा सके। साथ ही मंदिर परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है, जिससे ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा बनी रहे।

ग्रामीण खबर MP-
जनमानस की निष्पक्ष आवाज
विशेष संवाददाता:हाकम सिंह रघुवंशी

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