रायपुर से मास्टरमाइंड गिरफ्तार,जमीन धोखाधड़ी मामले में ढीमरखेड़ा पुलिस की बड़ी सफलता।
24.52 लाख की ठगी में फरार आरोपी दबोचा गया,फर्जी बैंक खातों के जरिए रची गई थी सुनियोजित साजिश।
ढीमरखेड़ा,ग्रामीण खबर MP।
जिले में जमीन धोखाधड़ी के एक बहुचर्चित और गंभीर मामले में ढीमरखेड़ा पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे मास्टरमाइंड आरोपी को पुलिस ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई को जिले में आर्थिक अपराधों के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के मार्गदर्शन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष डेहरिया तथा एसडीओपी आकांक्षा चतुर्वेदी के निर्देशन में अंजाम दी गई। थाना ढीमरखेड़ा प्रभारी निरीक्षक अभिषेक चौबे के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने इस मामले में लगातार प्रयास करते हुए फरार आरोपी तक पहुंच बनाई और उसे गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
मामले का संक्षिप्त विवरण यह है कि ग्राम बरेली निवासी प्रार्थी रणजीत पटेल ने थाना ढीमरखेड़ा में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ व्यक्तियों द्वारा महर्षि महेश योगी संस्थान की जमीन बेचने के नाम पर उससे 24 लाख 52 हजार रुपये की धोखाधड़ी की गई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 63/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की।
जांच के दौरान सामने आया कि यह कोई साधारण ठगी नहीं बल्कि पूरी तरह से सुनियोजित आपराधिक साजिश थी। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान के आधार पर बैंक खातों का जाल तैयार किया था, जिसके माध्यम से ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर ट्रैकिंग से बचने का प्रयास किया जाता था। आरोपी मुकेश पटेल ने एस.आर.एम. फाउंडेशन ऑफ इंडिया के नाम से फर्जी बैंक खाता खुलवाया था, जिसका उपयोग ठगी की राशि को इधर-उधर स्थानांतरित करने में किया गया।
इसके अलावा मुकुंदी पटेल के नाम से भी एक अन्य फर्जी खाता संचालित किया गया, जिसमें मनीष पांडे और दिलीप दुबे द्वारा पैसे ट्रांसफर किए जाते थे। इस तरह आरोपियों ने मिलकर एक संगठित नेटवर्क के जरिए धोखाधड़ी को अंजाम दिया और बड़ी रकम हड़प ली।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले ही आरोपी मुकेश पटेल और मुकुंदी पटेल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया था। हालांकि, इस पूरे मामले का मुख्य साजिशकर्ता मनीष पांडे घटना के बाद से फरार हो गया था। उसने अपना पुराना ठिकाना छोड़ दिया था और लगातार स्थान बदलकर पुलिस से बचने का प्रयास कर रहा था।
पुलिस को गुप्त सूचना प्राप्त हुई कि आरोपी मनीष पांडे रायपुर में छिपकर रह रहा है। सूचना की पुष्टि होते ही थाना ढीमरखेड़ा पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया और तत्काल रायपुर के लिए रवाना किया। पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर आरोपी की लोकेशन ट्रेस की और सुनियोजित तरीके से घेराबंदी करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को ढीमरखेड़ा लाया गया, जहां आवश्यक कानूनी कार्यवाही पूर्ण कर उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय द्वारा आरोपी को जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब मामले में अन्य संभावित आरोपियों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है, जिससे इस पूरे नेटवर्क का और खुलासा होने की संभावना है।
इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक अभिषेक चौबे के साथ उपनिरीक्षक सुरेश चौधरी, आरक्षक पंकज सिंह और आरक्षक डुमनदास की विशेष भूमिका रही। टीम के समन्वित प्रयास, तकनीकी जांच और सतत निगरानी के चलते ही पुलिस को यह सफलता मिली है।
पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में आमजन में विश्वास बढ़ा है और यह स्पष्ट संदेश गया है कि आर्थिक अपराधों में संलिप्त किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन द्वारा ऐसे मामलों में सख्ती बरतते हुए लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिससे भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

