मंत्रिपरिषद की बैठक में 33,240 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी,कैमोर में ईएसआईसी औषधालय खुलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक;यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम,“एक जिला-एक उत्पाद”योजना और कई विभागों की योजनाओं को स्वीकृति।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के विकास, रोजगार, स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं और कार्यक्रमों की आगामी पांच वर्षों तक निरंतरता के लिए लगभग 33 हजार 240 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई।
मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम को भी मंजूरी दी है। इसके साथ ही सिंगरौली जिले के चितरंगी में व्यवहार न्यायालय की स्थापना के लिए कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित कुल 7 नवीन पदों के सृजन को स्वीकृति प्रदान की गई है।
प्रदेश के श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मैहर, कैमोर (जिला कटनी) और निमरानी (जिला खरगोन) में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के तीन नए औषधालय खोले जाने तथा चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ के 51 पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है। इन औषधालयों के शुरू होने से 15,686 पंजीकृत श्रमिकों तथा उनके लगभग 62,744 आश्रित परिजनों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
मंत्रिपरिषद ने “मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम” को तीन वर्षों के लिए क्रियान्वित करने हेतु लगभग 190 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सुशासन की प्रक्रिया से जोड़ना तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली में नवाचार को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए लोक सेवा प्रबंधन विभाग को आवश्यक नियम और दिशा-निर्देश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
बैठक में मध्यप्रदेश वृत्तिकर अधिनियम 1995 के अंतर्गत दिव्यांगजनों को वृत्तिकर से दी जा रही छूट को 31 मार्च 2030 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय दिव्यांगजनों को आर्थिक राहत प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मंत्रिपरिषद ने “एक जिला-एक उत्पाद” परियोजना के अंतर्गत सात जिलों में पारंपरिक और विशिष्ट उत्पादों के संरक्षण, विकास और विपणन के लिए आगामी पांच वर्षों में 37.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना में सीधी जिले में दरी और कारपेट, दतिया में गुड़, अशोकनगर में चंदेरी हाथकरघा वस्त्र, भोपाल में जरी-जरदोजी और जूट उत्पाद, धार में बाग प्रिंट, सीहोर में लकड़ी के खिलौने तथा उज्जैन में बटिक प्रिंट को शामिल किया गया है। इस योजना के माध्यम से स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण, ब्रांडिंग और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
मंत्रिपरिषद ने रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतर्गत वितरण अधोसंरचना के उन्नयन के लिए प्राप्त केंद्रांश पर देय एसजीएसटी राशि को वितरण कंपनियों को अनुदान के स्थान पर अंशपूंजी के रूप में उपलब्ध कराने का निर्णय भी लिया है। इसके तहत नवंबर 2024 तक ऋण के रूप में दी गई 887 करोड़ 91 लाख रुपये की राशि को भी वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में प्रदान किए जाने का अनुमोदन किया गया है। इस योजना का उद्देश्य विद्युत वितरण प्रणाली को अधिक सुदृढ़, आधुनिक और उपभोक्ता-अनुकूल बनाना है।
इसके अलावा मंत्रिपरिषद ने लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों और परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 63 करोड़ 76 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है।
खनिज साधन विभाग के अंतर्गत संचालित “खनिज अधिभार का रक्षित निधि में अंतरण” योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 6,090 करोड़ 12 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस राशि का उपयोग ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में अवसंरचना विकास, पेयजल आपूर्ति और सड़क निर्माण जैसे कार्यों में किया जाएगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए 31 मार्च 2031 तक 7,127 करोड़ 38 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसमें महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज संस्थान जबलपुर के संचालन तथा प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत शासकीय स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने से संबंधित कार्यक्रम भी शामिल हैं।
योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की 10 योजनाओं की निरंतरता के लिए 2,064 करोड़ 62 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत राज्य नीति आयोग के कार्य, योजनाओं की मॉनिटरिंग, नवाचार, मूल्यांकन, सांसद और विधायक स्वेच्छानुदान निधि से आर्थिक सहायता तथा विभिन्न क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों से संबंधित व्यय शामिल हैं।
जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों के विकास और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति सहित अन्य योजनाओं के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 1,645 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, आवागमन, सिंचाई, पेयजल और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की निरंतरता के लिए 3,773 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत राज्य महिला आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग और महिला वित्त विकास निगम के कार्यों के संचालन को भी शामिल किया गया है।
इसके अतिरिक्त एमएसएमई विभाग के अंतर्गत निवेश संवर्धन और स्टार्ट-अप नीति के क्रियान्वयन के लिए 11,361 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस राशि के माध्यम से उद्योग विकास अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणन सहायता, निर्यात प्रोत्साहन, बीमार इकाइयों के पुनर्जीवन तथा स्टार्ट-अप को निवेश और ऋण प्राप्त करने में सहायता प्रदान की जाएगी।
मंत्रिपरिषद के इन निर्णयों को प्रदेश में विकास, रोजगार सृजन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
