मध्यप्रदेश में 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा ‘स्वदेशी जागरण सप्ताह’।
सीएम मोहन यादव ने किया शुभारंभ, हर विकासखंड में होंगे स्वदेशी उत्पादों के प्रचार-प्रसार के कार्यक्रम।
कटनी,ग्रामीण खबर MP।
मध्यप्रदेश सरकार ने राज्यभर में 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक ‘स्वदेशी जागरण सप्ताह’ मनाने का निर्णय लिया है। इस सप्ताह का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल से किया। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे त्योहारों के इस पावन अवसर पर विदेशी वस्तुओं का त्याग कर स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का संकल्प लें और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने में अपनी भूमिका निभाएँ।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के समय स्वदेशी को एक मजबूत हथियार बनाया था। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सौ वर्ष पहले थे। यदि हमें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनना है तो हमें अपने देश में बने उत्पादों का उपयोग बढ़ाना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को आत्मसात करना ही सच्ची देशभक्ति है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है, बल्कि जनता के बीच यह व्यापक संदेश पहुँचाना है कि स्वदेशी अपनाकर ही हम अपने कारीगरों, किसानों, लघु उद्योगों और परंपरागत व्यवसायों को सशक्त बना सकते हैं। स्वदेशी अपनाने से न केवल आर्थिक सुदृढ़ता बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगे।
‘स्वदेशी जागरण सप्ताह’ के तहत प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। इनमें रैलियाँ, प्रदर्शनी, सांस्कृतिक आयोजन, जागरूकता कार्यशालाएँ और संवाद कार्यक्रम शामिल होंगे। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य आमजन को यह समझाना है कि छोटे-छोटे बदलाव से बड़ा असर उत्पन्न किया जा सकता है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने दैनिक जीवन की आवश्यकताओं में से कुछ वस्तुएँ भी स्वदेशी अपनाने का निश्चय कर ले तो यह आंदोलन एक जन-आंदोलन का रूप धारण कर सकता है।
कार्यक्रम में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और परंपरागत हस्तशिल्प को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया जाएगा। छोटे कुटीर उद्योगों, बुनकरों, कारीगरों और ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जहाँ स्थानीय स्तर पर बने सामानों को खरीदने और उनके उपयोग के लिए जनता को प्रेरित किया जाएगा। इस दौरान शैक्षणिक संस्थानों में भी स्वदेशी विषयक व्याख्यान और निबंध प्रतियोगिताएँ कराई जाएँगी, जिससे युवा पीढ़ी को स्वदेशी विचारधारा से जोड़ा जा सके।
हालाँकि यह अभियान इस समय केवल मध्यप्रदेश सरकार द्वारा चलाया जा रहा है और इसकी कोई केंद्रीय स्तर पर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस तरह के प्रयास अन्य राज्यों में भी किए जाएँ तो ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर नई गति मिल सकती है।
प्रदेश सरकार का यह निर्णय त्योहारों के समय बेहद सार्थक माना जा रहा है क्योंकि इसी अवधि में उपभोग बढ़ता है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में लोग स्वदेशी वस्तुएँ खरीदते हैं तो इसका सीधा लाभ स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को मिलेगा। आर्थिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के अभियान से न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
स्वदेशी जागरण सप्ताह के आयोजन के साथ ही प्रदेश सरकार यह संदेश देना चाहती है कि आत्मनिर्भरता की ओर जाने का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग है — अपने देश में बने उत्पादों को अपनाना। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी दैनिक जरूरतों में स्वदेशी को प्राथमिकता दे, तो भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने से कोई रोक नहीं सकता।
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